रायपुर। राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) के तहत प्रदेश के ऑटोनॉमस कॉलेजों में चार वर्षीय स्नातक (UG) पाठ्यक्रम पूरा करने वाले छात्रों के सामने पीजी प्रवेश को लेकर बड़ा संकट खड़ा हो गया है। चार साल पहले शुरू किए गए इस पायलट प्रोजेक्ट का पहला बैच अब आठवें सेमेस्टर की परीक्षा दे चुका है, लेकिन छात्रों को अब तक यह स्पष्ट नहीं है कि उन्हें एक वर्षीय पीजी पाठ्यक्रम में प्रवेश कैसे मिलेगा।
जानकारी के अनुसार, नई शिक्षा नीति के तहत चार वर्षीय यूजी करने वाले विद्यार्थियों को एक वर्षीय पीजी का विकल्प दिया गया था। इसके लिए विश्वविद्यालय स्तर पर अलग ऑर्डिनेंस और प्रवेश व्यवस्था तैयार की जानी थी, लेकिन चार साल बीत जाने के बाद भी संबंधित नियम और ऑर्डिनेंस तैयार नहीं हो सके हैं।
प्रदेश के आठ ऑटोनॉमस कॉलेजों में लागू इस व्यवस्था के तहत पढ़ने वाले हजारों छात्र अब अपने भविष्य को लेकर चिंतित हैं। छात्रों का कहना है कि कॉलेज और विभागीय अधिकारियों से संपर्क करने के बावजूद उन्हें कोई स्पष्ट जानकारी नहीं मिल रही है। वहीं विश्वविद्यालयों पर जल्द से जल्द ऑर्डिनेंस तैयार कर प्रवेश प्रक्रिया शुरू करने का दबाव बढ़ता जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते एक वर्षीय पीजी पाठ्यक्रम के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी नहीं किए गए तो नए शैक्षणिक सत्र में प्रवेश प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है और छात्रों का एक वर्ष भी प्रभावित होने की आशंका है।


