नई दिल्ली:
पश्चिम बंगाल की राजनीति में शुभेंदु अधिकारी (Suvendu Adhikari) शायद सबसे दिलचस्प और सबसे तेज राजनीतिक बदलाव का चेहरा माने जाते हैं. शुभेंदु अधिकारी की राजनीति की धुरी देखते ही देखते 180 डिग्री घूम गई. दरअसल, एक दौर था जब नंदीग्राम आंदोलन के नायक के रूप में उनकी पहचान धर्म और जाति की सीमाओं से ऊपर उठे नेता की थी. उनकी सभाओं में “अल्लाह-हू-अकबर” और “हर-हर महादेव” के नारे एक साथ गूंजते थे. मुस्लिम परिवार अपने नवजात बच्चों का नाम ‘शुभेंदु’ रख रहे थे. लेकिन डेढ़ दशक बाद वही शुभेंदु बंगाल में बीजेपी के सबसे फ्रायरब्रांड नेता और ‘जय श्री राम’ राजनीति के सबसे बड़े पोस्टर बॉय बन चुके हैं.
अल्लाह-हू-अकबर से जय श्री राम तक
दरअसल, यह बदलाव केवल एक बड़े नेता की राजनीतिक यात्रा नहीं, बल्कि पश्चिम बंगाल की बदलती सामाजिक और चुनावी राजनीति की कहानी भी है. साल 2007 का ‘नंदीग्राम आंदोलन’ बंगाल की राजनीति का टर्निंग पॉइंट माना जाता है. भूमि अधिग्रहण के खिलाफ शुरू हुए आंदोलन ने तत्कालीन वाम मोर्चा सरकार की नींव हिला दी थी. उस आंदोलन के चर्चित चेहरों में शुभेंदु अधिकारी शामिल थे. उस समय उनकी राजनीति का केंद्र किसान, ग्रामीण अस्मिता और स्थानीय अधिकार थे, न कि धार्मिक पहचान. पूर्व मेदिनीपुर और नंदीग्राम के मुस्लिम बहुल इलाकों में शुभेंदु की लोकप्रियता इतनी अधिक थी कि कई मुस्लिम परिवारों ने अपने बच्चों का नाम उनके नाम पर रखा. स्थानीय नेता बताते हैं कि उस समय शुभेंदु की सभाओं में हिंदू और मुस्लिम समुदाय के लोग एक समान शामिल होते थे. मंच से “अल्लाह-हू-अकबर” और “हर-हर महादेव” के एक साथ नारे लगना उस दौर की बंगाल राजनीति में आम दृश्य थे. उस समय उनकी छवि एक ऐसे नेता की थी, जो ममता बनर्जी के आंदोलनकारी सहयोगी के रूप में वामपंथ के खिलाफ जनता की आवाज बन रहे थे.

TMC से दूरी और राजनीतिक असंतोष
समय के साथ ममता बनर्जी और शुभेंदु अधिकारी के रिश्तों में दूरी बढ़ने लगी. पार्टी और सरकार में प्रभाव को लेकर मतभेद खुलकर सामने आने लगे. अधिकारी परिवार, जो लंबे समय तक तृणमूल कांग्रेस का मजबूत स्तंभ माना जाता था, धीरे-धीरे खुद को अलग-थलग महसूस करने लगा. इसी दौर में शुभेंदु ने बंगाल की बदलती चुनावी हवा को पढ़ना शुरू किया. बीजेपी राज्य में तेजी से उभर रही थी और हिंदू वोटों का ध्रुवीकरण उसकी सबसे बड़ी ताकत बन रहा था. शुभेंदु ने इस नई राजनीति में अपने लिए अवसर देखा. 19 दिसंबर 2020 को शुभेंदु अधिकारी बीजेपी में शामिल हो गए.

शुभेंदु की बीजेपी में नई पहचान ‘जय श्री राम’
साल 2020 में बीजेपी में शामिल होने के बाद शुभेंदु अधिकारी की राजनीतिक भाषा बदल गई. जो नेता कभी साझा सांस्कृतिक मंच की बात करता था, वही अब ‘तुष्टीकरण की राजनीति’ के खिलाफ खुलकर बोलते हुए नजर आने लगे. उनकी सभाओं में ‘जय श्री राम’ प्रमुख नारा बन गया. उन्होंने बार-बार आरोप लगाया कि बंगाल में हिंदुओं के साथ भेदभाव हुआ है और बीजेपी ही उनके अधिकारों की रक्षा कर सकती है. यह बदलाव केवल भाषणों तक सीमित नहीं था. सुवेंदु ने खुद को बंगाल में हिंदुत्व राजनीति के सबसे भरोसेमंद चेहरे के रूप में स्थापित करने की रणनीति अपनाई.


