लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने विधि निर्माताओं से आग्रह किया है कि वे व्यक्तिगत और राजनीतिक हितों से ऊपर उठकर ईमानदारी व निष्ठा के साथ जनता की सेवा करें। उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधियों की जिम्मेदारी है कि वे जनता की अपेक्षाओं पर खरे उतरें और लोकतांत्रिक संस्थाओं को मजबूत बनाएं।
गोवा में सम्मेलन का उद्घाटन
ओम बिरला ने राष्ट्रमंडल संसदीय संघ सम्मेलन जोन-7 के प्रथम सम्मेलन का गोवा में उद्घाटन करते हुए यह बातें कहीं। उन्होंने पारदर्शी, समावेशी और जवाबदेह शासन को विकसित भारत के लिए आवश्यक बताया।
2047 के लक्ष्य में युवाओं की अहम भूमिका
उन्होंने कहा कि वर्ष 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने में युवा विधि निर्माताओं की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। युवाओं की ऊर्जा, नई सोच और समर्पण देश को आत्मनिर्भर और समृद्ध बना सकता है।
राज्य विधानमंडलों में स्वस्थ प्रतिस्पर्धा जरूरी
लोकसभा अध्यक्ष ने जन कल्याण और सुशासन को बढ़ावा देने के लिए राज्य विधानमंडलों के बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्धा पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि संसदीय लोकतंत्र दुनिया की सबसे प्रभावी शासन प्रणाली है और बढ़ता मतदान प्रतिशत इसकी मजबूती का प्रमाण है।
तकनीक के साथ मानवीय संवेदना भी जरूरी
उन्होंने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) जैसी उन्नत तकनीकों के दौर में भी मानवीय संवेदनशीलता का महत्व कम नहीं हुआ है। जनप्रतिनिधियों को तकनीक का उपयोग करते हुए जनता की समस्याओं का समाधान करना चाहिए।
विधायी प्रक्रियाओं की समझ पर जोर
लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि जनप्रतिनिधियों को विधायी प्रक्रियाओं और नियमों की जितनी अधिक जानकारी होगी, सदन में उनकी भागीदारी उतनी ही प्रभावी होगी। सक्रिय भागीदारी से वे अपने क्षेत्रों में मजबूत नेतृत्व स्थापित कर सकते हैं।
सहयोग और नवाचार से आगे बढ़ेगा भारत
ओम बिरला ने कहा कि विभिन्न राज्यों के सामने अलग-अलग चुनौतियां हैं, लेकिन सहयोग और नवाचार के जरिए इन्हें अवसरों में बदला जा सकता है। तटीय विकास जैसे क्षेत्रों में राज्य एक-दूसरे से सीख सकते हैं।
अन्य नेताओं ने भी रखे विचार
इस अवसर पर राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश, गोवा के मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत, महाराष्ट्र विधान परिषद के सभापति राम शिंदे और महाराष्ट्र विधानसभा अध्यक्ष राहुल नार्वेकर ने भी अपने विचार व्यक्त किए। (इनपुट: पीआईबी)


