Friday, September 25, 2026
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पिछले 20 महीनों में फलस्तीन पर भारत की नीति शर्मनाक रही है: कांग्रेस

नयी दिल्ली. ऑस्ट्रेलिया, कनाडा और ब्रिटेन द्वारा फलस्तीन को एक राष्ट्र के रूप में मान्यता देने की घोषणा के बाद, कांग्रेस ने रविवार को मोदी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि फलस्तीन पर विशेष रूप से पिछले 20 महीनों में भारत की नीति ”शर्मनाक और नैतिक रूप से कायराना” रही है.

कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि ऑस्ट्रेलिया, कनाडा और ब्रिटेन ने फलस्तीन को एक राष्ट्र के रूप में मान्यता दी है, और जल्द ही अन्य देशों द्वारा भी ऐसा किये जाने की उम्मीद है. उन्होंने उल्लेख किया कि भारत ने 18 नवंबर 1988 को ही फलस्तीनी राष्ट्र को औपचारिक रूप से मान्यता दे दी थी.

रमेश ने ‘एक्स’ पर इजराइल-हमास संघर्ष का स्पष्ट संदर्भ देते हुए कहा, ”लेकिन फलस्तीन के संबंध में भारत की नीति – खासकर पिछले बीस महीनों में – शर्मनाक और नैतिक रूप से कायरना रही है.” उनकी यह टिप्पणी ब्रिटेन के प्रधानमंत्री केअर स्टार्मर द्वारा रविवार को इस बात की पुष्टि किये जाने के बाद आई है कि अमेरिका और इजराइल के कड़े विरोध के बावजूद ब्रिटेन फलस्तीनी राष्ट्र को औपचारिक रूप से मान्यता दे रहा है.

मीडिया में आई खबरों के अनुसार, उन्होंने यह घोषणा कनाडा और ऑस्ट्रेलिया की घोषणाओं के बाद की, जो राष्ट्रमंडल देशों की समन्वित पहल प्रतीत होती है. कांग्रेस ने पिछले महीने कहा था कि वह ”इजराइल की अस्वीकार्य कार्रवाइयों” पर मोदी सरकार की ”पूरी तरह से चुप्पी की कड़ी निंदा” करती है.

अगस्त में भी, कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी वाद्रा ने आरोप लगाया था कि इजराइल ”नरसंहार” कर रहा है और भारत सरकार की इस बात के लिए आलोचना की थी कि जब इजराइल, फलस्तीन के लोगों को ”तबाह” कर रहा है, तो वह ”चुप” है. इस महीने की शुरुआत में भारत ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के उस प्रस्ताव के पक्ष में मतदान किया था जिसमें ‘न्यूयॉर्क घोषणापत्र’ का समर्थन किया गया था. घोषणापत्र में द्विराष्ट्र समाधान के माध्यम से फलस्तीन मुद्दे के शांतिपूर्ण समाधान का आह्वान किया गया था.

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