रायपुर। खरीफ सीजन की शुरुआत से पहले छत्तीसगढ़ के किसानों को बढ़ती खेती लागत का बड़ा झटका लगा है। खाद की कमी, डीजल की बढ़ती कीमतों और मजदूरी दरों में इजाफे के कारण खेती की लागत में भारी वृद्धि दर्ज की गई है। अनुमान के अनुसार, इस वर्ष प्रति एकड़ खेती का खर्च पिछले साल की तुलना में करीब 10 हजार रुपये तक बढ़ गया है।
कृषि विशेषज्ञों और किसानों के मुताबिक, खेत की जुताई से लेकर रोपाई, निराई-गुड़ाई, खाद, कीटनाशक और कटाई-मिंजाई तक लगभग हर कृषि कार्य महंगा हो गया है। वर्ष 2025 में जहां प्रति एकड़ खेती की लागत लगभग 23 से 25 हजार रुपये थी, वहीं 2026 में यह बढ़कर 34 हजार रुपये से अधिक पहुंच गई है।
रिपोर्ट के अनुसार जुताई का खर्च 4,500 रुपये से बढ़कर 5,000 रुपये, बीज का खर्च 1,500 से 1,700 रुपये, रोपाई-निराई का खर्च 5,000 से बढ़कर 10,000 रुपये तथा खाद और कीटनाशकों पर होने वाला व्यय भी उल्लेखनीय रूप से बढ़ा है।
किसानों की परेशानी का एक बड़ा कारण खाद संकट भी है। डीएपी, यूरिया, पोटाश और सुपर फॉस्फेट जैसी जरूरी खादों की उपलब्धता सीमित बताई जा रही है। सहकारी समितियों में पर्याप्त स्टॉक नहीं होने से किसानों को खुले बाजार से अधिक कीमत पर खाद खरीदनी पड़ रही है।
इसके अलावा, मानसून को लेकर भी किसानों की चिंता बनी हुई है। मौसम विशेषज्ञों के अनुसार अल नीनो जैसी परिस्थितियों का असर बारिश पर पड़ सकता है, जिससे खरीफ फसलों की बुवाई और उत्पादन प्रभावित होने की आशंका है।
किसानों का कहना है कि यदि समय रहते खाद उपलब्धता और लागत नियंत्रण के लिए प्रभावी कदम नहीं उठाए गए, तो खेती की लाभप्रदता पर गंभीर असर पड़ सकता है और कृषि उत्पादन भी प्रभावित हो सकता है।


