Sunday, September 27, 2026
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दक्षिण पूर्व एशिया में ‘छिपे हुए सुनामी’ का कारण बन रहा है अमेरिकी इलेक्ट्रॉनिक कचरा

हनोई. पर्यावरण पर नजर रखने वाली एक संस्था द्वारा बुधवार को जारी की गई एक नयी रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका से लाखों टन खराब इलेक्ट्रॉनिक सामग्री विदेशों में भेजी जा रही है जिनमें से अधिकांश दक्षिण पूर्व एशिया के विकासशील देश हैं. ये वो देश हैं जो इस खतरनाक कचरे के सुरक्षित रूप से निस्तारण के लिए तैयार नहीं हैं.

सिएटल स्थित ‘बासेल एक्शन नेटवर्क’ (बीएएन) ने कहा कि दो साल तक हुई जांच में यह पाया गया कि कम से कम 10 अमेरिकी कंपनियां इस्तेमाल किए गए इलेक्ट्रॉनिक्स को एशिया और पश्चिम एशिया में निर्यात करती हुई पाई गईं है जोकि ई-कचरे की “छिपी हुई सुनामी” है.

रिपोर्ट के अनुसार, “यह ई-कचरे की नई, लगभग अदृश्य सुनामी आ रही है… इलेक्ट्रॉनिक्स पुनर्चक्रण क्षेत्र के पहले से ही लाभदायक मुनाफे को ब­ढ़ा रही है जबकि अमेरिकी जनता और कॉर्पोरेट आईटी उपकरणों के एक बड़े हिस्से को गुप्त रूप से दक्षिण-पूर्व एशिया में निर्यात करने और हानिकारक परिस्थितियों में संसाधित करने की अनुमति दे रही है.” इलेक्ट्रॉनिक कचरों में फोन, कंप्यूटर जैसे खराब और फेंके गए उपकरण हैं जिनमें लेड (सीसा), कैडमियम और मरकरी (पारा) जैसी मूल्यवान सामग्री और विषाक्त धातु दोनों ही शामिल हैं. जैसे-जैसे गैजेट्स तेजी से बदले जा रहे हैं, वैश्विक ई-कचरा औपचारिक रूप से पुनर्चक्रित होने की तुलना में पांच गुना तेजी से ब­ढ़ रहा है.

संयुक्त राष्ट्र के अंतरराष्ट्रीय दूरसंचार संघ और अनुसंधान शाखा- यूएनआईटीएआर के अनुसार, दर्ज आकड़े बताते हैं कि 2022 में वैश्विक स्तर पर 6.2 करोड़ मीट्रिक टन ई-कचरा उत्पन्न किया गया. यह मात्रा 2030 तक ब­ढ़कर 8.2 करोड़ मीट्रिक टन तक पहुंचने की उम्मीद है.

यह अमेरिकी ई-कचरा एशिया के बोझ को और ब­ढ़ा देता है जो पहले से ही दुनिया के कुल ई-कचरे का लगभग आधा उत्पादन करता है. इसका अधिकांश हिस्सा कचरा भराव क्षेत्रों (लैंडफिल) में फेंक दिया जाता है, जिससे जहरीले रसायन पर्यावरण में रिसते रहते हैं. कुछ कचरा अनौपचारिक कबाड़खानों तक पहुंच जाता है, जहां मज़दूर अक्सर बिना किसी सुरक्षा के उपकरणों के उन्हें हाथ से जलाते या खोलते हैं जिससे विषाक्त धुआं और कचरा निकलता है.

रिपोर्ट के अनुसार, हर महीने लगभग 2,000 कंटेनरों में लगभग 33,000 मीट्रिक टन (36,376 अमेरिकी टन) इस्तेमाल किए गए इलेक्ट्रॉनिक्स अमेरिकी बंदरगाहों से बाहर भेजे जाते हैं. इसके मुताबिक इन खेपों की आपूर्ति करने वाली कंपनियां, जिन्हें “ई-कचरा ब्रोकर” बताया गया है, आमतौर पर स्वयं कचरे का पुनर्चक्रण नहीं करती हैं बल्कि इसे विकासशील देशों की कंपनियों को भेज देती हैं.

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