नई दिल्ली/कोलकाता। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में हार के बाद तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) में अंदरूनी संकट लगातार गहराता दिखाई दे रहा है। पार्टी प्रमुख ममता बनर्जी द्वारा बुलाई गई बैठक में कई सांसदों और विधायकों की गैरमौजूदगी ने संसदीय दल में संभावित टूट की चर्चाओं को और तेज कर दिया है।
जानकारी के अनुसार, पार्टी के भीतर असंतुष्ट खेमे की सक्रियता बढ़ गई है। हाल के दिनों में बड़ी संख्या में विधायकों ने बागी नेता ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट का समर्थन किया है, जिससे टीएमसी के भीतर शक्ति संतुलन को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं।
ममता बनर्जी ने स्थिति को संभालने के लिए सांसदों और विधायकों की आपात बैठक बुलाई थी, लेकिन अपेक्षित संख्या में जनप्रतिनिधियों के नहीं पहुंचने से पार्टी नेतृत्व की चिंता बढ़ गई है। रिपोर्टों के मुताबिक कई सांसद भी नए राजनीतिक विकल्पों पर विचार कर रहे हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि असंतुष्ट गुट की सक्रियता इसी तरह बढ़ती रही तो टीएमसी के संसदीय दल में भी विभाजन की स्थिति बन सकती है। पार्टी नेतृत्व संगठन को मजबूत करने और नुकसान की भरपाई के लिए लगातार रणनीतिक बैठकें कर रहा है।
पश्चिम बंगाल की राजनीति में इस घटनाक्रम को टीएमसी के लिए अब तक की सबसे बड़ी अंदरूनी चुनौती माना जा रहा है। आने वाले दिनों में सांसदों और विधायकों का रुख पार्टी के भविष्य की दिशा तय कर सकता है।


