Saturday, September 26, 2026
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उच्चतम न्यायालय ने भ्रष्टाचार के मामले में पंजाब सरकार के अधिकारी को अग्रिम जमानत दी

नयी दिल्ली: उच्चतम न्यायालय ने 2021 के भ्रष्टाचार के एक मामले में पंजाब सरकार के एक अधिकारी को अग्रिम जमानत दे दी है और पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय द्वारा उसकी याचिका से निपटने के तरीके को दृढ़ता से अस्वीकार कर दिया है।

पंजाब सरकार के अधिकारी गुरसेवक ंिसह ने 2021 में अपने खिलाफ दर्ज भ्रष्टाचार के मामले में अग्रिम जमानत के लिए 2025 में उच्च न्यायालय का रुख किया था। उच्चतम न्यायालय ने तीन सितंबर को कहा था कि उच्च न्यायालय ने रिश्वत की राशि प्राप्त करने के मामले में सह-आरोपी को जमानत दे दी, लेकिन ंिसह को राहत देने से इनकार कर दिया और इसके बजाय पंजाब के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) से पूछा कि आरोपी की गिरफ्तारी में चार साल की देरी के अलावा आरोप-पत्र क्यों नहीं दायर किया गया।

न्यायमूर्ति जे बी पारदीवाला और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने उच्च न्यायालय के निर्देश को ‘‘बहुत ही अस्पष्ट और असामान्य आदेश’’ करार देते हुए कहा, ‘‘हम उच्च न्यायालय द्वारा अग्रिम जमानत की याचिका से निपटने के तरीके को स्वीकार नहीं करते हैं।’’

पीठ ने कहा, ‘‘उच्च न्यायालय को या तो अग्रिम जमानत देने वाली अर्जी स्वीकार कर लेनी चाहिए थी या फिर उसे उसके गुण-दोष के आधार पर खारिज कर देना चाहिए था। हैरानी की बात है कि उच्च न्यायालय ने एक सह-अभियुक्त को अग्रिम जमानत दे दी, जिस पर रिश्वत की राशि स्वीकार करने का आरोप है।’’

न्यायमूर्ति पारदीवाला ने इस बात पर भी आश्चर्य जताया कि अग्रिम जमानत पर विचार करते समय उच्च न्यायालय को जांच एजेंसी से यह क्यों पूछना चाहिए कि उसने पिछले चार वर्षों से आरोपी को गिरफ्तार क्यों नहीं किया।

पीठ ने कहा, ‘‘यह तथ्य कि याचिकाकर्ता को चार साल तक गिरफ्तार नहीं किया गया था, उच्च न्यायालय के लिए अपने विवेक का इस्तेमाल करने और अग्रिम जमानत देने का आदेश देने का एक अच्छा आधार था।’’ यह देखते हुए कि मामला अभी भी उच्च न्यायालय में लंबित है, उच्चतम न्यायालय ने मामले के अंतिम परिणाम की प्रतीक्षा न करने का निर्णय लिया।

अपने विवेक का इस्तेमाल करते हुए उच्चतम न्यायालय ने कहा कि गिरफ्तारी की स्थिति में आरोपी को आर्थिक अपराध शाखा, लुधियाना, पंजाब के जांच अधिकारी की ‘‘शर्तों और नियमों के अधीन’’ जमानत पर रिहा किया जाना चाहिए।

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