इंदौर
सिंध की प्राचीन संस्कृति, कला और ऐतिहासिक धरोहरों से आज की युवा पीढ़ी को रूबरू कराने के लिए इंदौर शहर में एक भव्य 'सिंधु कला केंद्र' का निर्माण कार्य शुरू हो चुका है। लगभग 10 हजार वर्गफीट के विशाल क्षेत्र में आकार ले रहे इस प्रोजेक्ट पर करीब 15 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।
इस कला केंद्र की सबसे बड़ी खूबी यह होगी कि यहां सिर्फ पुरानी चीजें ही नहीं रखी जाएंगी, बल्कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के जरिए लोगों को उस पुराने दौर की जिंदगी का साक्षात अहसास कराया जाएगा।
ऑडिटोरियम से लेकर सिंधी फूड जोन तक की सुविधा
सांसद एवं सिंधु हेरिटेज ट्रस्ट के अध्यक्ष शंकर लालवानी के मुताबिक, समाज के सहयोग से बन रहे इस प्रोजेक्ट को अगले 18 महीने के भीतर पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। इस परिसर में एक भव्य संग्रहालय के साथ-साथ 270 सीटों वाला एक सर्वसुविधायुक्त ऑडिटोरियम भी तैयार किया जाएगा।
यहां सांस्कृतिक व सामाजिक कार्यक्रमों के साथ-साथ वर्कशॉप और प्रदर्शनियां भी आयोजित की जा सकेंगी। इसके अलावा, सिंधी व्यंजनों का लुत्फ उठाने के लिए एक खास 'सिंधी फूड जोन' भी बनाया जाएगा। आने वाले समय में यह केंद्र सभी समाज के लोगों के लिए खोल दिया जाएगा।
एआई और 3D तकनीक से जीवंत होगा सिंध का पुराना दौर
इस म्यूजियम को बेहद आधुनिक तरीके से डिजाइन किया जा रहा है। 3D और इमर्सिव तकनीक का इस्तेमाल करते हुए पुराने सिंध क्षेत्र के रहन-सहन, व्यापार, पहनावे और संस्कृति को डिजिटल रूप में पर्दे पर उतारा जाएगा। इसका मकसद दर्शकों को सिर्फ किताबी जानकारी देना नहीं है।
उन्हें उस युग में होने का जीवंत अनुभव कराना है। इस पूरे काम के लिए इतिहास में रुचि रखने वाले जानकारों की एक अलग टीम बनाई जा रही है, जो देशभर में मौजूद सिंध की प्राचीन वस्तुओं और जानकारियों को एक जगह इकट्ठा करेगी।
सहेजे जा रहे 1800 साल पुराने दुर्लभ सिक्के और पुश्तैनी धरोहरें
प्रोजेक्ट के आर्किटेक्ट अर्जुन हबलानी ने बताया कि विभाजन से पहले के सिंध की यादों को संजोने के लिए वरिष्ठ नागरिकों और इतिहास प्रेमियों की मदद ली जा रही है। यहां तक कि पाकिस्तान में रह रहे सिंधी समुदाय के लोगों से भी संपर्क साधा जा रहा है।
लोगों ने स्वेच्छा से पुराने बर्तन, ताले, हाथ वाले पंखे और कई ऐतिहासिक वस्तुएं उपलब्ध कराई हैं। संग्रहालय का मुख्य आकर्षण सिंध क्षेत्र के राजाओं के 1700 से 1800 साल पुराने दुर्लभ सिक्के होंगे। इनमें चच वंश के राजा यशादित्य (लगभग 679-712 ईस्वी) के समय के वे सिक्के भी शामिल हैं, जिन पर मुकुट पहने हुए राजा और त्रिशूल की आकृति उकेरी गई है।


