प्रमुख संपादक कौशल जोशी की रिपोर्ट
रायपुर। प्रदेश की कई ग्राम पंचायतों में सरपंच और सचिव की कथित मिलीभगत से भ्रष्टाचार के गंभीर मामले सामने आने की चर्चाएं तेज हो गई हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में लगातार ऐसी शिकायतें मिल रही हैं कि विकास कार्यों और सरकारी योजनाओं के नाम पर आने वाली राशि का दुरुपयोग कर कुछ लोग पांच वर्षों के कार्यकाल में लाखों की संपत्ति खड़ी कर लेते हैं।
ग्रामीणों का आरोप है कि पंचायतों में सड़क, नाली, भवन निर्माण, हैंडपंप, आवास योजना और अन्य विकास कार्यों में कागजों पर काम दिखाकर सरकारी राशि निकाल ली जाती है। कई मामलों में निर्माण कार्य अधूरे रहते हैं या गुणवत्ता बेहद खराब होती है, जबकि रिकॉर्ड में पूरा भुगतान दर्शा दिया जाता है।
जानकारों का कहना है कि पंचायत स्तर पर निगरानी कमजोर होने के कारण भ्रष्टाचार का यह खेल वर्षों से चलता आ रहा है। कुछ पंचायतों में सरपंच-सचिव की जोड़ी पर फर्जी बिल, फर्जी मस्टर रोल और कमीशनखोरी के आरोप भी लगते रहे हैं।
ग्रामीण जनता का कहना है कि गांवों के विकास के लिए आने वाला पैसा यदि सही तरीके से खर्च हो तो ग्रामीण क्षेत्रों की तस्वीर बदल सकती है, लेकिन भ्रष्टाचार के कारण योजनाओं का पूरा लाभ लोगों तक नहीं पहुंच पाता।
सरकार द्वारा पंचायतों में पारदर्शिता बढ़ाने और भ्रष्टाचार रोकने के लिए निगरानी मजबूत करने की बात कही जा रही है। वहीं सामाजिक संगठनों और ग्रामीणों ने पंचायतों के आय-व्यय और संपत्तियों की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है, ताकि दोषियों पर कार्रवाई हो सके और जनता का पैसा जनता के विकास में खर्च हो।


