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राजस्व मामलों के समाधान में राजनांदगांव ने मारी बाजी, लंबित प्रकरणों के निराकरण में शानदार प्रदर्शन

राजनांदगांव.

राजस्व वर्ष 2026 में राजनांदगांव जिले में राजस्व प्रकरणों के निराकरण की स्थिति बेहतर रही है। 1 अक्टूबर 2025 से 30 सितंबर 2026 तक राजस्व अमले के समक्ष दर्ज कुल 37,306 प्रकरणों में से 34,939 का निराकरण किया गया। इस तरह जिले में कुल 93.66 प्रतिशत प्रकरणों का निराकरण हुआ, जबकि 2,367 प्रकरण लंबित हैं।

आंकड़ों के अनुसार, विवादित नामांतरण के कुल 25, 150 प्रकरणों में से 23,343 का निराकरण किया गया, जिसका निराकरण प्रतिशत 92.82 प्रतिशत रहा। विवादित खाता विभाजन के 3,254 मामलों में 3,062 का निराकरण कर 94.10 प्रतिशत उपलब्धि हासिल की गई। इसी तरह अविवादित नामांतरण के 2,241 प्रकरणों में 2,125 का निराकरण हुआ और निराकरण दर 94.82 प्रतिशत रही। अविवादित खाता विभाजन के 768 मामलों में 735 का निराकरण कर 95.70 प्रतिशत की उपलब्धि दर्ज की गई। अन्य राजस्व मामलों में सीमांकन के 2,333 प्रकरणों में 2,331 का निराकरण हुआ, जिसकी दर 99.91 प्रतिशत है। व्यपवर्तन (डायवर्सन ) के 1,632 मामलों में 1,591 का निराकरण कर 97.49 प्रतिशत की उपलब्धि हासिल की गई। वृक्ष कटाई अनुमति के सभी 51 प्रकरणों का निराकरण किया गया, यानी 100 प्रतिशत सफलता मिली। ई-अभिलेख संबंधित सुधार के 1,877 मामलों में 1,701 का निराकरण हुआ।

पंचायत अमले ने भी किया बेहतर प्रदर्शन
वर्ष 2026 में पंचायत अमले द्वारा निराकृत प्रकरणों में भी बेहतर स्थिति सामने आई है। विवादित नामांतरण के 12,629 प्रकरणों में 11,887 का निराकरण कर 94.12 प्रतिशत की दर हासिल की गई। वहीं विवादित खाता विभाजन के 2,867 मामलों में 2,807 का निराकरण हुआ, जिसकी दर 97.91 प्रतिशत रही।

मॉनिटरिंग से मिली तेजी
प्रशासनिक कार्ययोजना के तहत विवादित नामांतरण और खाता विभाजन जैसे जटिल प्रकरणों की विशेष राजस्व शिविरों एवं नियमित सुनवाई के माध्यम से मॉनिटरिंग की गई। तहसीलदार, नायब तहसीलदार, राजस्व निरीक्षक और पटवारियों के समन्वय से पंचायत स्तर पर शिविर आयोजित कर मामलों का निराकरण किया गया। प्रशासन के अनुसार त्वरित एवं पारदर्शी निराकरण से आम लोगों को कोर्ट-कचहरी के चक्कर से राहत मिली है और प्रशासन के प्रति जनविश्वास भी मजबूत हुआ है।

प्रशासनिक वक्तव्य के अनुसार, पिछले वर्ष की तुलना में विवादित नामांतरण के निराकरण की दर 68.49 प्रतिशत से बढ़कर 94.82 प्रतिशत तथा विवादित खाता विभाजन की दर 72.53 प्रतिशत से बढ़कर 95.70 प्रतिशत हुई है। इसे राजस्व एवं पंचायत अमले की कार्यक्षमता में सुधार का महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है।

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