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Pakistan Diplomacy: सऊदी के समर्थन और ईरान से रिश्तों के बीच फंसा पाकिस्तान, हूतियों के दावे और तीखी बयानबाजी चर्चा में

इस्लामाबाद

पाकिस्तान अपनी जिस कूटनीति के गीत पूरी दुनिया में गा रहा था, वो पूरी तरह से फेल होती दिख रही है. मध्य पूर्व के मसलों में दलाल बनकर हर तरफ से मलाई खाने का उसका प्लान बर्बाद हो चुका है क्योंकि न तो ईरान उसकी मंशा पर भरोसा कर रहा है, न ही सऊदी अरब और तुर्की के साथ मिलकर बना उसका इस्लामिक नाटो उसके किसी काम का रह गया है. वहां पाकिस्तान के अंदर विरोध ने शहबाज-मुनीर के होश उड़ा रखे हैं, यहां अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उसकी इज्जत का फालूदा बन चुका है। 

दरअसल सऊदी अरब और तुर्की के साथ मिलकर पाकिस्तान ने जो मक्का पैक्ट किया था और दुनियाभर में इस रक्षा गठबंधन का ढिंढोरा पीटा था, वो सबसे ज्यादा नुकसान उसी का कर रहा है. हूतियों की वॉर्निंग के बाद भी डिफेंस पैक्ट में बंधे पाकिस्तान ने सऊदी अरब के समर्थन में जैसे ही अपनी सेना उतारी, उसके भाड़े के सैनिकों को हूती विद्रोहियों ने धर लिया. हूती प्रवक्ता जनरल याह्या सरी ने कहा है कि बाब अल-मंदेब की लड़ाई में हूतियों ने सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन के 85 सैनिकों को पकड़ लिया है. इनमें 47 पाकिस्तानी सैनिक शामिल हैं। 

ईरान के सांसद ने क्यों पाकिस्तान को लताड़ा?

ईरानी सांसद मोहसेन जंगनेह ने पाकिस्तान की शांति की कोशिशों का मजाक उड़ाते हुए उनके निष्पक्ष होने पर सवाल उठाया. पाकिस्तान के सऊदी की जंग में उतरने के बाद ईरान की ओर से ऐसा बयान आया है. जंगनेह ने साफ तौर पर कहा कि विदेश नीति पर साफ तौर से अमेरिका का असर रहता है. ईरानी सांसद ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ का भी जिक्र करते हुए भरपूर मखौल उड़ाया. उन्होंने लिखा-  उनके ट्वीट भी अमेरिकियों की ओर से लिखे जाते हैं. जंगनेह के निशाने पर वो ट्वीट था, जिसमें आखिर में एक ऐसी लाइन लिखी हुई थी, जिसे देखकर यह साफ समझ आ रहा था कि शहबाज शरीफ किया गया ट्वीट कहीं और से फॉरवर्ड हुआ है। 

क्यों फंस गया है पाकिस्तान?
पाकिस्तान को लेकर बात करें तो ये देश ईरान-अमेरिका के युद्ध की शुरुआत से ही पंचायत सुलझाने की भूमिका में आ गया था. उसने कुछ महीनों बाद इस्लामाबाद में दलाली का पूरा इंतजाम किया और दोनों पक्षों को बुला भी लिया लेकिन बात बनने के बजाय और बिगड़ गई. ईरान का भरोसा यहीं से पाकिस्तान पर से उठने लगा था और अब हूतियों के खिलाफ सेना उतारने के बाद परिस्थितियां पाकिस्तान के और खिलाफ हो चुकी हैं. ऐसे में पाकिस्तान पूरी तरह से फंसा हुआ है. एक तरफ सऊदी-तुर्की के साथ उसका डिफेंस पैक्ट है और ये दोनों देश अमेरिका की फ्रेंड लिस्ट में हैं, वहीं दूसरी ओर ईरान है- जो उसका पड़ोसी है और उससे रिश्ते बिगाड़ना उसे कभी भी फायदा नहीं देगा। 

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