बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने क्रीमी लेयर ओबीसी श्रेणी में किए गए आवेदन को नॉन-क्रीमी लेयर श्रेणी में बदलने की मांग को लेकर दायर सभी याचिकाओं को खारिज कर दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि याचिकाकर्ताओं को ऑनलाइन आवेदन में त्रुटि सुधारने का पर्याप्त अवसर दिया गया था, लेकिन उन्होंने समय रहते उसका उपयोग नहीं किया।
न्यायमूर्ति रवींद्र कुमार अग्रवाल की अवकाशकालीन पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि अभ्यर्थियों को आवेदन में संशोधन के लिए निर्धारित अवधि उपलब्ध थी। इसके बावजूद समय सीमा समाप्त होने के बाद श्रेणी परिवर्तन की मांग स्वीकार नहीं की जा सकती।
याचिकाकर्ताओं ने तर्क दिया था कि उन्होंने गलती से स्वयं को क्रीमी लेयर ओबीसी श्रेणी में दर्ज कर दिया था, जबकि वे वास्तव में नॉन-क्रीमी लेयर वर्ग के पात्र हैं। उन्होंने परीक्षा परिणाम में अपनी वास्तविक श्रेणी के अनुसार लाभ देने की मांग की थी।
कोर्ट ने कहा कि परीक्षा प्राधिकरण द्वारा निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार आवेदन में सुधार का अवसर उपलब्ध कराया गया था। ऐसे में बाद में श्रेणी परिवर्तन की अनुमति देने से पूरी चयन प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। इसी आधार पर सभी याचिकाएं प्रारंभिक स्तर पर ही खारिज कर दी गईं।
अदालत के इस फैसले से स्पष्ट हो गया है कि प्रतियोगी परीक्षाओं में आवेदन भरते समय अभ्यर्थियों को अपनी श्रेणी और अन्य जानकारियों का विशेष ध्यान रखना होगा, क्योंकि निर्धारित समय सीमा के बाद सुधार की मांग स्वीकार नहीं की जाएगी।


