Sunday, September 27, 2026
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प्रख्यात लेखिका लीलावती को गाजा पर टिप्पणी के लिए ऑनलाइन आलोचना का सामना करना पड़ा

तिरुवनंतपुरम. प्रख्यात मलयालम लेखिका एवं साहित्यिक समालोचक एम. लीलावती को गाजा में बच्चों के प्रति सहानुभूति व्यक्त करने वाली उनकी टिप्पणी के लिए ऑनलाइन आलोचना का सामना करना पड़ा, लेकिन उन्हें वाम और कांग्रेस दोनों दलों से समर्थन मिला. आलोचना पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए 98 वर्षीय शिक्षाविद ने मंगलवार को कहा कि उनकी किसी के प्रति कोई शत्रुता नहीं है तथा वह दुनिया के सभी बच्चों को समान मानती हैं.

लीलावती को ‘लीलावती टीचर’ के नाम से जाना जाता है. उन्होंने हाल ही में कहा था कि वह अपना जन्मदिन नहीं मनाना चाहतीं और सवाल किया था कि गाजा के बच्चों को भूख से मरते हुए देखकर वह भोजन का आनंद कैसे ले सकती हैं. उनकी यह टिप्पणी कथित तौर पर दक्षिणपंथी समूहों से जुड़े सोशल मीडिया मंच के उपयोगकर्ताओं के एक वर्ग को रास नहीं आई, जिन्होंने सोशल मीडिया पर इस अनुभवी लेखिका को जमकर ट्रोल किया और उनकी आलोचना की. आलोचकों ने सवाल उठाया कि क्या लीलावती को दुनिया के अन्य हिस्सों में बच्चों की दुर्दशा नहीं दिखी और उन्होंने इस बारे में चुप्पी क्यों साधे रखी.

लीलावती ने एक टेलीविजन चैनल से बात करते हुए कहा कि जो भी उनसे नफरत करता है, उसके प्रति उनकी कोई शत्रुता नहीं है और दुनिया में कहीं भी रहने वाले सभी बच्चे उनके लिए समान हैं. लीलावती ने कहा, ”मैं उन्हें एक मां की नजर से देखती हूं… इसमें धर्म, जाति या रंग की कोई पृष्ठभूमि नहीं जुड़ी है.” साइबर हमले के खिलाफ विभिन्न क्षेत्रों के लोग उनके समर्थन में सामने आए.
मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के वरिष्ठ नेता एवं सामान्य शिक्षा मंत्री वी. शिवनकुट्टी ने इस घटना की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि यह केरलवासियों के सदाचार और सांस्कृतिक मूल्यों पर सवाल खड़ा करता है.

इसी तरह के विचार व्यक्त करते हुए, प्रख्यात लेखक सी. राधाकृष्णन ने कहा कि ऐसा ऑनलाइन हमला किसी के साथ नहीं होना चाहिए था. कांग्रेस नेता एवं केरल प्रदेश कांग्रेस कमेटी महासचिव पी. मधु ने अधिकारियों से वरिष्ठ लेखिका पर हुए साइबर हमले के संबंध में कड़ी कानूनी कार्रवाई करने और उन्हें पर्याप्त सुरक्षा प्रदान करने का आग्रह किया. उन्होंने राज्य पुलिस प्रमुख को एक पत्र भी भेजा, जिसमें इस संबंध में मामला दर्ज करने और ऑनलाइन हमलों की एक विशेष जांच दल द्वारा जांच कराने की मांग की गई.

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