रायपुर: राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड), छत्तीसगढ़ क्षेत्रीय कार्यालय ने आज रायपुर में ‘राज्य ऋण संगोष्ठी’ का आयोजन किया। इस संगोष्ठी में छत्तीसगढ़ के लिए राज्य फोकस पेपर (SFP) 2026-27 जारी किया गया, जिसमें राज्य की प्राथमिकता वाले क्षेत्रों के लिए ₹1.45 लाख करोड़ की अनुमानित ऋण क्षमता का खाका तैयार किया गया है। यह दस्तावेज बैंकों द्वारा वार्षिक ऋण योजना तैयार करने के लिए एक मुख्य आधार के रूप में कार्य करता है।
इस संगोष्ठी में मुख्य अतिथि के रूप में श्रीमती शहला निगार, कृषि उत्पादन आयुक्त (APC) एवं प्रमुख सचिव, कृषि विकास और किसान कल्याण, छत्तीसगढ़ सरकार शामिल हुईं, जिन्होंने छत्तीसगढ़ के लिए राज्य फोकस पेपर 2026-27 का विमोचन किया। कार्यक्रम में राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों, बैंकिंग जगत, भारतीय रिजर्व बैंक और विकास क्षेत्र के हितधारकों ने हिस्सा लिया। उन्होंने राज्य में क्षेत्रवार और जिलावार ऋण क्षमता और जमीनी स्तर पर ऋण प्रवाह (Ground Level Credit) बढ़ाने की रणनीतियों पर चर्चा की।
अपने संबोधन में, मुख्य अतिथि ने जिला स्तर की ‘संभाव्यता युक्त ऋण योजनाओं’ (PLP) के माध्यम से नाबार्ड द्वारा किए गए व्यापक और जमीनी स्तर के ऋण नियोजन प्रयासों की सराहना की। उन्होंने जोर देकर कहा कि राज्य फोकस पेपर बैंकों और संबंधित विभागों के लिए एक रोडमैप की तरह काम करना चाहिए ताकि चिन्हित प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में संस्थागत ऋण का समय पर और पर्याप्त प्रवाह सुनिश्चित हो सके। उन्होंने सभी हितधारकों से समन्वय के साथ काम करने का आग्रह किया, विशेष रूप से छोटे और सीमांत किसानों, आदिवासी परिवारों, महिला स्वयं सहायता समूहों और ग्रामीण उद्यमियों के लिए, ताकि छत्तीसगढ़ में समावेशी और सतत ग्रामीण विकास को बढ़ावा मिल सके।
राज्य फोकस पेपर 2026-27 में राज्य की कृषि और आदिवासी बहुल अर्थव्यवस्था को ध्यान में रखते हुए कृषि और संबद्ध गतिविधियों, एमएसएमई (MSME), मत्स्य पालन, डेयरी, वानिकी, नवीकरणीय ऊर्जा, शिक्षा और अन्य प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में ऋण क्षमता पर प्रकाश डाला गया है। इसमें जलवायु अनुकूल कृषि, जलसंभर (Watershed) आधारित विकास, किसान उत्पादक संगठनों (FPO) को बढ़ावा देने, प्राथमिक कृषि साख समितियों (PACS) के सुदृढ़ीकरण व कंप्यूटरीकरण और ग्रामीण बुनियादी ढांचे के विकास पर विशेष जोर दिया गया है।
संगोष्ठी को संबोधित करते हुए श्री डी. के. गवली, मुख्य महाप्रबंधक, नाबार्ड (छत्तीसगढ़ क्षेत्रीय कार्यालय) ने कहा कि राज्य फोकस पेपर हितधारकों के साथ व्यापक परामर्श और जिला-विशिष्ट क्षमताओं के संकलन का परिणाम है। उन्होंने ग्रामीण वित्तीय संस्थानों के पुनर्वित्त (Refinance), RIDF के तहत बुनियादी ढांचा वित्तपोषण, वित्तीय समावेशन की पहल और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने वाले विकासात्मक कार्यों के माध्यम से राज्य को नाबार्ड के निरंतर समर्थन को रेखांकित किया।
संगोष्ठी का समापन हितधारकों के बीच सार्थक चर्चा के साथ हुआ, जिसमें ऋण अवशोषण में सुधार, ग्रामीण बुनियादी ढांचे के विकास में तेजी लाने और छत्तीसगढ़ के सभी क्षेत्रों में संतुलित एवं समावेशी विकास प्राप्त करने की प्रतिबद्धता दोहराई गई।


