Saturday, September 26, 2026
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ईरान ने अमेरिका-इजरायल पर विश्वविद्यालयों को ‘जानबूझकर’ टारगेट करने का लगाया आरोप

ईरान और अमेरिका के बीच जारी संघर्ष की वजह से दुनिया के दूसरे देशों में तनाव बढ़ता जा रहा है। दोनों तरफ से हमले जारी हैं। इस बीच ईरान के विदेश मंत्रालय ने अमेरिका और इजरायल पर ये आरोप लगाया है कि दोनों देश जानबूझकर विश्वविद्यालयों पर हमले कर रहे हैं। ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने अमेरिका और इजरायल पर आरोप लगाया है कि उन्होंने युद्ध के दौरान जानबूझकर कई विश्वविद्यालयों और रिसर्च सेंटर पर हमला किया। इन हमलों में इस्फहान यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी और तेहरान में यूनिवर्सिटी ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी शामिल हैं।

बघाई ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में लिखा, “ईरान के खिलाफ अमेरिकी-इजरायली हमले का असली मकसद सामने आ रहा है: यूनिवर्सिटी, रिसर्च सेंटर, ऐतिहासिक स्मारकों और जाने-माने वैज्ञानिकों को सिस्टमैटिक तरीके से निशाना बनाकर हमारे देश की वैज्ञानिक नींव और सांस्कृतिक विरासत को कमजोर करना।” ईरान की रेड क्रिसेंट सोसाइटी के मुताबिक, युद्ध की वजह से ईरान में कम से कम 600 शैक्षिक जगहों को नुकसान पहुंचा है या वे नष्ट हो गई हैं।

उन्होंने लिखा, “इस्फहान यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी और तेहरान में यूनिवर्सिटी ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी उन कई यूनिवर्सिटी और रिसर्च सेंटर में से सिर्फ दो हैं जिन पर हमलावरों ने पिछले 30 दिनों में जानबूझकर हमला किया है। ईरान के न्यूक्लियर प्रोग्राम और आने वाले खतरे का मुकाबला करना सिर्फ झूठे बहाने थे, सिर्फ मनगढ़ंत बातें जो उनके असली इरादे को छिपाने के लिए बनाई गई थीं।”

इससे पहले ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद में अमेरिका और इजरायल की ओर से की जा रही कार्रवाई की घोर निंदा की थी। उन्होंने कहा, “ईरान के ऊपर दो न्यूक्लियर सरकारों यानी अमेरिका और इजरायल की तरफ से जबरदस्ती एक गैर-कानूनी युद्ध थोप दिया गया है। यह हमला साफ तौर पर बिना किसी वजह के और बहुत बेरहम है।”

उन्होंने यह हमला 28 फरवरी को शुरू किया जब ईरान और अमेरिका ईरान के न्यूक्लियर प्रोग्राम को लेकर अमेरिका की कही जा रही चिंताओं को हल करने के मकसद से एक डिप्लोमैटिक प्रक्रिया में लगे हुए थे। नौ महीने में दूसरी बार, उन्होंने बातचीत को रोककर और पटरी से उतारकर डिप्लोमेसी को धोखा दिया।”

उन्होंने कहा कि इस हमले के सबसे डरावने उदाहरणों में से एक दक्षिणी ईरान के मिनाब शहर में शजारेह तैयबेह प्राइमरी स्कूल पर किया गया हमला था, जहां 175 से ज्यादा स्टूडेंट्स और टीचर्स को जानबूझकर और बेरहमी से मार डाला गया था। अगर वो यह कहते हैं कि ये हमला जानबूझकर और पहले से प्लान किया गया नहीं था, तो इसे माना नहीं जाना चाहिए। अराघची ने कहा कि स्कूल को टारगेट करना एक वॉर क्राइम और इंसानियत के खिलाफ एक ऐसा अपराध है जिसकी सभी को साफ और बिना शर्त निंदा करनी चाहिए।

उन्होंने कहा, “शजारेह तैयबेह प्राइमरी स्कूल इस गैर-कानूनी युद्ध के पिछले 27 दिनों में अमेरिका और इजरायल द्वारा किए गए घिनौने जुर्मों का अकेला शिकार नहीं है। हमलावरों ने मानवाधिकार और अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून का बड़े पैमाने पर और सिस्टमैटिक तरीके से और बहुत बेरहम तरीके से उल्लंघन किया है। ईरानी विदेश मंत्री ने दुनिया के सभी देशों से अमेरिका-इजरायल के हमले के खिलाफ आवाज उठाने की अपील करते हुए कहा, “आप सभी को हमलावरों की खुलकर निंदा करनी चाहिए और यह दिखाना चाहिए कि देशों का समुदाय और इंसानियत की सामूहिक अंतरात्मा उन्हें ईरान के लोगों के खिलाफ किए जा रहे भयानक अपराधों के लिए जवाबदेह ठहराएगी। ईरान ने कभी युद्ध नहीं चाहा। ईरानी लोग एक शांतिप्रिय और इज्जतदार देश हैं, जो दुनिया की सबसे समृद्ध सभ्यताओं में से एक के वारिस हैं। हालांकि, उन्होंने बेरहम हमलावरों के खिलाफ खुद का बचाव करने का पक्का इरादा और संकल्प दिखाया है, जो अपराध करने की कोई सीमा नहीं मानते; यह बचाव तब तक जारी रहेगा जब तक जरूरी है।”(इनपुट-आईएएनएस)

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