Friday, September 25, 2026
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तीनों सेनाओं का एकीकरण सिर्फ नीतिगत मामला नहीं, बल्कि अस्तित्व के लिए भी अहम : राजनाथ

नयी दिल्ली. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने मंगलवार को कहा कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान प्रर्दिशत एकीकृत, तत्क्षण अभियानगत समन्वय के साथ तीनों सेनाओं का तालमेल निर्णायक परिणाम देने का एक “जीवंत उदाहरण” है, और इसे भविष्य की सभी सैन्य कार्रवाइयों के लिए मानक बनना चाहिए.

एक कार्यक्रम में अपने संबोधन में सिंह ने इस बात पर प्रकाश डाला कि किस प्रकार भारतीय वायु सेना की एकीकृत वायु कमान और नियंत्रण प्रणाली ने सेना की आकाशतीर वायु रक्षा प्रणाली और भारतीय नौसेना की त्रिगुण के साथ मिलकर काम किया और यह भारत और पाकिस्तान के बीच सात से 10 मई तक चले संघर्ष के दौरान संयुक्त अभियान की री­ढ़ बना. तीनों सेनाओं के बीच तालमेल के महत्व को रेखांकित करते हुए रक्षा मंत्री ने कहा कि एकजुटता का मार्ग संवाद, समझ और परंपराओं के प्रति सम्मान में निहित है. उन्होंने कहा कि सेनाओं को एक-दूसरे की चुनौतियों का सम्मान करते हुए एक साथ मिलकर नई प्रणालियां बनानी चाहिए.

उन्होंने कहा कि सरकार का मकसद तीनों सेनाओं के एकीकरण को और ब­ढ़ावा देना है और यह न केवल नीतिगत मामला है, बल्कि तेजी से बदलते सुरक्षा माहौल में अस्तित्व का मामला भी है. सिंह ने कहा, “ऑपरेशन सिंदूर के दौरान, तीनों सेनाओं के तालमेल ने एक एकीकृत, तत्क्षण संचालन की तस्वीर तैयार की. इसने कमांडरों को समय पर निर्णय लेने, स्थितिजन्य जागरूकता ब­ढ़ाने और अपने नुकसान के जोखिम को कम करने में सक्षम बनाया. यह निर्णायक परिणाम देने वाली एकजुटता का जीवंत उदाहरण है और यह सफलता भविष्य के सभी अभियानों के लिए एक मानक बननी चाहिए.” सिंह भारतीय वायु सेना (आईएएफ) द्वारा आयोजित एक संगोष्ठी को संबोधित कर रहे थे.

उन्होंने कहा कि युद्ध के बदलते स्वरूप और पारंपरिक तथा गैर-पारंपरिक खतरों के जटिल अंतर्संबंध के कारण, संयुक्तता एक विकल्प के बजाय एक प्रमुख अभियानगत आवश्यकता बन गई है. रक्षा मंत्री ने कहा, “आज संयुक्तता हमारी राष्ट्रीय सुरक्षा और अभियानगत प्रभावशीलता के लिए एक मूलभूत आवश्यकता बन गई है.” उन्होंने कहा, “हालांकि हमारी प्रत्येक सेना में स्वतंत्र रूप से जवाबी कार्रवाई की क्षमता रखती है, लेकिन भूमि, समुद्र, वायु, अंतरिक्ष और साइबरस्पेस की आपस में जुड़ी प्रकृति सहयोगात्मक ताकत को जीत की सच्ची गारंटी बनाती है.” सिंह ने हाल में कोलकाता में आयोजित संयुक्त कमांडर सम्मेलन को याद किया, जहां स्वयं प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने संयुक्तता और एकीकरण के महत्व पर जोर दिया था.

उन्होंने रेखांकित किया, “हमारी सरकार का उद्देश्य तीनों सेनाओं के बीच संयुक्तता और एकीकरण को और ब­ढ़ावा देना है. यह केवल नीतिगत मामला नहीं है, बल्कि तेजी से बदलते सुरक्षा परिवेश में अस्तित्व का प्रश्न भी है.” सिंह ने बताया कि दशकों से प्रत्येक सेना ने विभिन्न भौगोलिक क्षेत्रों में अपने विशिष्ट अनुभवों के आधार पर अभियानगत पद्धतियां, निरीक्षण ढांचे और ऑडिट प्रणालियां विकसित की हैं. उन्होंने बर्फ से ढकी चोटियों से लेकर रेगिस्तान, घने जंगलों, गहरे समुद्र और खुले आसमान तक विविध परिस्थितियों में सशस्त्र बलों के कार्य करने के लचीलेपन की सराहना की.

उन्होंने बताया कि इस तरह के कठिन परिश्रम से अर्जित ज्ञान अक्सर एक ही सेना तक सीमित रह जाता है. रक्षा मंत्री ने जोर देकर कहा कि आज की सुरक्षा परिस्थितियों में सेनाओं के बीच कामकाज को अलग-अलग खानों में बांटकर रखने की बजाय मुक्त आदान-प्रदान और सामूहिक रूप से सीखने की प्रक्रिया अपनाई जानी चाहिए. उन्होंने कहा, “दुनिया तेज.ी से बदल रही है. ख.तरे कहीं ज़्यादा जटिल हो गए हैं और हमें यह स्वीकार करना होगा कि कोई भी सेना अलग-थलग होकर काम नहीं कर सकती. किसी भी संघर्ष में सफलता के लिए अब अंतर-संचालन और संयुक्तता ज.रूरी है.”

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