Friday, September 25, 2026
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भारतीय सेना के तोपखाने की बढ़ेगी ताकत, 300 देसी बोफोर्स ‘धनुष’ की खरीद के प्रस्ताव को डीएसी ने दी मंजूरी

भारतीय सेना अपने आधुनिकीकरण के दौर से गुजर रही है। खास तौर पर आर्टिलरी की ताकत को स्वदेशी तकनीक के जरिये बढ़ाया जा रहा है। इसी कड़ी में भारतीय सेना के लिए स्वदेशी धनुष गन सिस्टम की खरीद के प्रस्ताव को मंजूरी मिल गई है। शुक्रवार को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में हुई रक्षा अधिग्रहण परिषद (डीएसी) की बैठक में सेना के लिए कई अहम फैसले लिए गए। उन फैसलों में से एक थलसेना के लिए 300 स्वदेशी आर्टिलरी गन सिस्टम की खरीद भी शामिल है।

इस खरीद प्रक्रिया के पूरा होने के बाद भारतीय सेना के पास 15 से ज्यादा रेजिमेंट और हो जाएंगी। फिलहाल करीब 3 रेजिमेंट भारतीय सेना में शामिल हो चुकी हैं, जबकि 3 और रेजिमेंट आने वाले दिनों में शामिल हो जाएंगी। धनुष को देसी बोफोर्स भी कहा जाता है। 155 मिमी, 45 कैलिबर की धनुष तोप 40 किलोमीटर तक मार कर सकती है, जो कि बोफोर्स की 27 किलोमीटर की रेंज से ज्यादा है। इसका निर्माण गन कैरिज फैक्ट्री कर रही है। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भी इसकी तैनाती की गई थी और इसका इस्तेमाल किया गया था।

 

1999 में शुरू हुए सेना के आधुनिकीकरण योजना में आर्टिलरी तोपें सबसे अहम हिस्सा रही हैं, जिसमें साल 2027 तक 2800 तोपें भारतीय सेना में शामिल करने का लक्ष्य है। 155 मिमी की अलग-अलग कैलिबर की तोपें ली जानी हैं और इस दिशा में काम तेजी से जारी है। इस योजना के मुताबिक टोड तोपें, जिन्हें गाड़ियों के जरिए खींचा जाता है; ट्रक-माउंटेड गन, यानी गाड़ियों पर लगी तोपें; ट्रैक्ड सेल्फ-प्रोपेल्ड और व्हील्ड सेल्फ-प्रोपेल्ड गन; तथा अल्ट्रा-लाइट होवित्जर तोपें शामिल हैं। इन अल्ट्रा-लाइट तोपों को हेलीकॉप्टर के जरिए उन पहाड़ी इलाकों तक पहुंचाया जा सकता है, जहां सड़कों के माध्यम से पहुंचना मुश्किल होता है।

इनमें से 145 एम-777 अल्ट्रा-लाइट होवित्जर तोपें पहले ही शामिल की जा चुकी हैं। इसके अलावा 100 ट्रैक्ड सेल्फ-प्रोपेल्ड गन के-9 वज्र भी सेना में शामिल हैं।
(IANS)

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