Friday, September 25, 2026
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भारतीय टेनिस की मदद के लिए सिर्फ पद पर काबिज होना ही एकमात्र रास्ता नहीं है: सानिया

दुबई. राष्ट्रीय खेल प्रशासन अधिनियम के अनुसार देश के प्रत्येक खेल महासंघ की 15 सदस्यीय कार्यकारी समिति में चार महिलाओं का होना अनिवार्य है लेकिन दिग्गज खिलाड़ी सानिया मिर्जा का मानना ??है कि युवा प्रतिभाओं को तराशने में उनकी भूमिका अखिल भारतीय टेनिस संघ (एआईटीए) में एक पद से कहीं अधिक है. खेलों में भारतीय महिलाओं के लिए पथ प्रदर्शक रहीं सानिया ने अपने दुबई स्थित आवास से पीटीआई से कई मुद्दों पर बात की जिनमें टेनिस में वेतन समानता से लेकर स्विट्जरलैंड के खिलाफ भारत की डेविस कप जीत शामिल रहीं जबकि उन्होंने 16 साल की माया राजेश्वरन रेवती की विशेष प्रतिभा पर भी बात की है.

यह पूछे जाने पर कि क्या वह निकट भविष्य में खेल प्रशासन में दिखाई दे सकती हैं तो सानिया ने इसमें ज्यादा दिलचस्पी नहीं दिखाई.
उन्होंने कहा, ”मुझे नहीं पता कि मदद करने के लिए उस शक्तिशाली पद पर होना ही एकमात्र तरीका है. ईमानदारी से कहूं तो मेरा यही जवाब है. अगर मुझे मौका मिले तो क्या मैं कर पाऊंगी, तो क्या मैं उस पद पर रहकर और योगदान दे पाऊंगी तो मैं ऐसा करना पसंद करूंगी. लेकिन क्या मैं इसका लक्ष्य बना रही हूं तो मेरा जवाब है, नहीं. क्योंकि यह मेरा लक्ष्य नहीं है. ” सानिया के लिए भारतीय टेनिस की अगली पीढ़ी के स्तर को बढ़ाने में मदद करने के लिए कोई पद पर बैठना जरूरी नहीं है.

उन्होंने कहा, ”मेरा लक्ष्य युवा पीढ़ी के ज्यादा से ज्यादा खिलाड़ियों और विशेषकर युवा लड़कियों की मदद करना है क्योंकि मुझे लगता है कि उनके पास ज्यादा आदर्श नहीं हैं जिनसे वे प्रेरणा ले सकें. ” सानिया ने कहा, ”मैं अपने अनुभव साझा करना चाहती हूं. और अगर मुझे इसके लिए किसी तंत्र में शामिल होने का मौका मिलता है और इससे मुझे सिर्फ फोन पर बात करने या कोर्ट पर उनकी मदद करने या किसी भी तरह की अन्य चीज से ज्यादा मौके मिलते है तो मुझे ऐसा करने में खुशी होगी. ” उन्होंने कहा, ”लेकिन मेरा फोकस इस पर नहीं है. यह मेरा लक्ष्य नहीं है. ” सानिया के बाद भारत में महिला टेनिस में कौन उभरती हुई प्रतिभा है , यह पूछने पर उन्होंने माया राजेश्वरन रेवती का नाम लिया .

माया स्पेन में राफेल नडाल अकादमी में ट्रेनिंग लेती हैं. सानिया ने कहा, ”माया में काफी प्रतिभा है. मेरे बाद कौन आएगा, यह ऐसा सवाल है जिससे हम शायद पिछले 25 साल से जूझ रहे हैं. ” उन्होंने कहा, ”तो एक 15-16 साल की युवा खिलाड़ी को आगे बढ़ते हुए देखना और अपने आयु वर्ग के ऊपर वर्गों में भी अपनी पकड़ बनाए रखते हुए देखना अच्छा लगता है. ” एकल में पूर्व 27वें नंबर की खिलाड़ी सानिया ने स्विट्जरलैंड के खिलाफ डेविस कप मुकाबला जीतने के लिए भारतीय पुरुष टीम की भी जमकर तारीफ की.
उन्होंने कहा, ”डेविस कप टीम तारीफ की हकदार है जिसने यूरोप में शायद 31 या 32 साल बाद स्विट्जरलैंड को हराकर एक यूरोपीय टीम के खिलाफ पहली बार जीत हासिल की है. सुमित नागल ने अच्छा नेतृत्व किया और पिछले डेढ़ साल में एक तरह से शानदार वापसी की है. ” नागल के बारे में बात करते हुए सानिया ने कहा कि भारत का शीर्ष एकल खिलाड़ी अभी 28 साल का है. उन्होंने कहा, ”लेकिन यह खिलाड़ी अब उतना युवा नहीं है. ये खिलाड़ी 28, 29, 30 साल के हैं. और टेनिस के लिहाज से ये इतने युवा नहीं हैं. यही सच है. लेकिन सुमित ने पिछले कुछ सालों से अकेले ही अविश्वसनीय काम किया है और डेविस कप में भी जीत हासिल की है.” जहां तक युवा दक्षिणेश्वर सुरेश की बात है तो सानिया अभी थोड़ा और इंतजार करना चाहती हैं.

ग्रैंडस्लैम प्रतियोगिताओं में पुरुषों और महिलाओं के लिए पुरस्कार राशि समान होती है लेकिन सानिया आने वाले दिनों में अन्य टूर्नामेंट के वेतन में और समानता देखना चाहती हैं. उन्होंने कहा, ”महिला और पुरुष टेनिस खिलाड़ी बराबर पैसा कमाते हैं, असल में यह एक मिथक है. हां, ग्रैंडस्लैम में दोनों बराबर पैसा कमाते हैं. लेकिन इसके अलावा शायद एक-दो टूर्नामेंट में ही ऐसा होता है. लेकिन ज्यादा टूर्नामेंट में ऐसा नहीं है. ” सानिया ने कहा, ”मुझे लगता है कि आज के जमाने में बराबर इनामी राशि होना चर्चा का विषय भी नहीं होना चाहिए क्योंकि इसमें जो मेहनत लगती है, जो खर्च होता है, वह महिला और पुरुष दोनों के लिए एक जैसा है. ”

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