Thursday, September 24, 2026
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उच्च शिक्षा महंगी होती जा रही है; गरीब लोगों तक शिक्षा ऋण नहीं पहुंच रहा: संसदीय समिति

नयी दिल्ली. एक संसदीय समिति ने कहा है कि जहां उच्च शिक्षा की लागत में भारी वृद्धि हुई है, वहीं समय के साथ शिक्षा ऋण की उपलब्धता कम होती जा रही है. इसके साथ ही, समिति ने सरकार को ऋण आवेदनों में कटौती या अस्वीकार नहीं करने की सलाह दी है.
कांग्रेस सांसद दिग्विजय सिंह की अध्यक्षता वाली शिक्षा, महिला, बाल, युवा और खेल संबंधी संसदीय स्थायी समिति की यह रिपोर्ट संसद में पेश की गयी.

समिति ने कहा कि वंचित, ग्रामीण पृष्ठभूमि और दूरदराज के क्षेत्रों के ज्यादातर छात्र शायद शिक्षा ऋण के लिए सरकार द्वारा चलाई जा रही योजनाओं से अवगत नहीं हैं, जबकि उच्च शिक्षा विभाग ने प्रधानमंत्री विद्यालक्ष्मी योजना के प्रचार के लिए कई पहल की हैं.
रिपोर्ट में एक ऐसी व्यवस्था की चिंताजनक तस्वीर पेश की गई है, जो अवसरों की कमी को दूर करने के बजाय, उम्मीदवारों के एक बड़े वर्ग को लगातार वंचित कर रही है.

समिति की रिपोर्ट में कहा गया है, ‘‘तमिलनाडु, केरल और महाराष्ट्र में शिक्षा ऋण लेने वालों की बड़ी संख्या है. ऋण का यह असमान वितरण दर्शाता है कि शिक्षा ऋण योजनाओं के कार्यान्वयन में खामियां हैं और राज्यों में जागरूकता बढ़ाने के लिए प्रयास की सख्त ज़रूरत है.’’ समिति ने कहा कि उत्तरी और ग्रामीण क्षेत्रों के छात्र, सबसे ज्Þयादा जरूरतमंद होने के बावजूद, बड़े पैमाने पर इससे वंचित हैं.

रिपोर्ट के अनुसार, ‘‘हालांकि योजनाएं बिना ज़मानत के, कम ब्याज दर पर पहुंच का वादा करती हैं, व्यवहार में, बैंक अब भी औपचारिकताओं पर बहुत निर्भर हैं. ऋण आवेदन केवल उचित दस्तावेज़ों और सह-आवेदक या गारंटर की उपस्थिति पर ही स्वीकार किए जाते हैं. ऋण स्वीकृति से पहले पूरी जांच-पड़ताल की जाती है.’’ समिति ने कहा कि 2014 से 2025 के बीच, सक्रिय छात्र ऋणों की संख्या 23.36 लाख से घटकर 20.63 लाख हो गई. हालांकि, कुल ऋण राशि 2014 में 52,327 करोड़ रुपये थी, जो 2025 में बढक़र 1,37,474 करोड़ रुपये हो गई है. यह हाल के वर्षों में उच्च शिक्षा की लागत में वृद्धि के कारण प्रति छात्र बहुत अधिक उधारी का संकेत देती है.

समिति ने सिफारिश की कि उच्च शिक्षा और वित्तीय सेवा विभाग अधिकतम छात्रों को शैक्षिक ऋण सुनिश्चित करें, और गरीबी रेखा से नीचे (बीपीएल) के परिवारों को प्राथमिकता दें. समिति ने बताया कि पीएम विद्यालक्ष्मी योजना के तहत, इस वर्ष 25 फरवरी से 31 अगस्त के बीच प्राप्त शिक्षा ऋण आवेदनों की कुल संख्या 55,887 थी और स्वीकृत राशि 4,427 करोड़ रुपये थी. उसने कहा कि इस अवधि के दौरान स्वीकृत शिक्षा ऋणों की संख्या 30,442 थी, वितरित ऋणों की संख्या 21,967 थी, और वितरित कुल धनराशि केवल 688.27 करोड़ रुपये थी.

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