Saturday, September 26, 2026
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आठ बांग्लादेशी भारत में अवैध रूप से रहने के दोषी करार

ठाणे. कल्याण की एक अदालत ने ठाणे जिले के विभिन्न हिस्सों में अवैध रूप से रहने के जुर्म में आठ बांग्लादेशी नागरिकों को दोषी ठहराया और नौ महीने के सश्रम कारावास की सजा सुनाई. अदालत ने पांच दिसंबर को चार मामलों में पारित फैसले में कहा कि जिन आरोपियों ने अपना अपराध स्वीकार किया है, वे सजा के हकदार हैं, लेकिन उनकी परिस्थितियों को देखते हुए “मानवीय दृष्टिकोण” भी जरूरी है. दोषियों को अप्रैल 2025 में गिरफ्तार किया गया था.

अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश एस जी इनामदार ने उन्हें आव्रजन एवं विदेशी अधिनियम तथा विदेशी अधिनियम, 1946 के तहत दोषी ठहराया. अदालत ने उनमें से प्रत्येक पर 1,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया. अदालत ने कहा, “चूंकि अभियुक्तों ने अपना अपराध स्वीकार कर लिया है, इसलिए वे कानून के प्रावधानों के अनुसार दंड के पात्र हैं. हालांकि… यह ध्यान रखना आवश्यक है कि अभियुक्त गरीबी, अज्ञानता और निरक्षरता के कारण अदालत के समक्ष यह भी प्रस्तुत नहीं कर सके कि वे बिना किसी दस्तावेज़ के भारतीय क्षेत्र में कैसे प्रवेश कर पाए. इस परिस्थिति में दंड देते समय मानवीय दृष्टिकोण अपनाना आवश्यक है.” जिन अपराधों के लिए अभियुक्तों को दोषी ठहराया गया है, उनके लिए अधिकतम पांच वर्ष तक की सज़ा हो सकती है.

चार महिलाओं मोइना गाजी उर्फ ?मोइना मस्जिद सरदार (37), अमीना जहांगीर गाजी (22), शहनाज मोहम्मद अली सरदार (44) और नरगिस मोहम्मद सरदार (32) को डोंबिवली से गिरफ्तार किया गया, जबकि माजिदा रसूल शेख (35) नाम की महिला को कल्याण से गिरफ्तार किया गया. पेंटर का काम करने वाले मोहम्मद शांतो यूनुस मुल्ला (30) और ब्यूटी पार्लर में काम करने वाली उसकी पत्नी सुमी मोहम्मद शांतो मुल्ला (28) को भी कल्याण से गिरफ्तार किया गया.

नूर मोनू पठान नामक मजदूर को उल्हासनगर से गिरफ्तार किया गया. अदालत ने कहा कि जेल अधीक्षक, जांच अधिकारी के साथ समन्वय करके, सजा पूरी होने के बाद कानूनी प्रक्रिया का पालन करते हुए आरोपियों को निर्वासित करने के लिए आवश्यक कदम उठाएंगे. फरार आरोपी तौकीर मोहम्मद गुलामुद्दीन आलम के खिलाफ मामला अब भी लंबित है.

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