Thursday, September 24, 2026
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दिल्ली सरकार उन्नाव दुष्कर्म पीड़िता की मां को खतरे की आशंका पर रिपोर्ट दाखिल करे : न्यायालय

नयी दिल्ली. उच्चतम न्यायालय ने मंगलवार को दिल्ली सरकार को निर्देश दिया कि वह दो सप्ताह के भीतर उसे बताए कि 2017 की उन्नाव दुष्कर्म पीड़िता की मां और परिवार के सदस्यों को क्या कोई खतरा है. न्यायमूर्ति पंकज मिथल और न्यायमूर्ति पी. बी. वराले की पीठ दुष्कर्म पीड़िता की मां द्वारा दायर एक याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें उन्होंने अपने और परिवार के सदस्यों के जीवन एवं स्वतंत्रता को गंभीर खतरा होने का दावा किया था. शीर्ष अदालत ने दिल्ली सरकार को इस मुद्दे पर दो सप्ताह के भीतर एक हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया.

पीड़िता की मां ने शीर्ष अदालत के 25 मार्च के उस आदेश को वापस लेने की मांग की है, जिसमें उनके परिवार और अन्य गवाहों को दी गई सीआरपीएफ (केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल) सुरक्षा हटा दी गई थी. शीर्ष अदालत ने दुष्कर्म पीड़िता को दी गई सीआरपीएफ सुरक्षा पूर्व में हटाने से इनकार कर दिया था और कहा था कि अभी भी खतरा है, लेकिन उसके परिवार के सदस्यों और अन्य गवाहों को दी गई सुरक्षा यह उल्लेख करते हुए वापस ले ली थी कि दोषसिद्धि हो चुकी है.

शीर्ष अदालत ने उस वक्त कहा था, ”हमारा मानना है कि इस अदालत द्वारा संबंधित व्यक्तियों को प्रासंगिक समय पर दी गई सुरक्षा जारी नहीं रखी जा सकती, क्योंकि मामले में दोषी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई है.” न्यायालय ने कहा था, ”हालांकि, हम यह स्पष्ट करते हैं कि पीड़िता को सीआरपीएफ सुरक्षा इस अदालत के अगले आदेश तक जारी रहेगी.” शीर्ष अदालत ने कहा था कि अगर परिवार के सदस्यों और अन्य गवाहों को कोई खतरा महसूस होता है, तो वे स्थानीय पुलिस से संपर्क कर सकते हैं. वर्ष 2019 में अदालत के आदेश के बाद केंद्र ने परिवार को प्रदान की गई सीआरपीएफ सुरक्षा वापस लेने की मांग संबंधी एक याचिका दायर की थी.

भाजपा के निष्कासित नेता कुलदीप सिंह सेंगर 2017 में उत्तर प्रदेश के उन्नाव में नाबालिग लड़की से दुष्कर्म के आरोप में जेल में आजीवन कारावास की सजा काट रहे हैं. शीर्ष अदालत ने एक अगस्त, 2019 को निर्देश दिया था कि दुष्कर्म पीड़िता, उसकी मां, परिवार के अन्य सदस्यों और उनके वकील को सीआरपीएफ सुरक्षा प्रदान की जाए. दुष्कर्म के संबंध में दर्ज सभी पांच मामलों को उच्चतम न्यायालय ने लखनऊ से दिल्ली स्थानांतरित कर दिया था तथा एक विशेष अदालत को निर्देश दिया कि वह प्रतिदिन सुनवाई करे और 45 दिनों के भीतर सुनवाई पूरी करे. शीर्ष अदालत ने उत्तर प्रदेश सरकार को पीड़िता को 25 लाख रुपये का अंतरिम मुआवजा देने का भी निर्देश दिया था.

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