Sunday, September 27, 2026
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कांग्रेस का आरोप : मोदी है तो महंगाई है

नयी दिल्ली. कांग्रेस ने खाद्य वस्तुओं की कीमतों को लेकर बृहस्पतिवार को केंद्र सरकार पर निशाना साधा और कटाक्ष करते हुए कहा कि ”मोदी है तो महंगाई है.” पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के पास महंगाई से जुड़े संकट का कोई समाधान नहीं है.

खाद्य उत्पादों की कीमतों में मामूली कमी आने से खुदरा मुद्रास्फीति मई के महीने में एक साल के निचले स्तर 4.75 प्रतिशत पर आ गई और यह भारतीय रिजर्व बैंक के संतोषजनक दायरे में बनी रही. बुधवार को जारी आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) पर आधारित खुदरा मुद्रास्फीति में जनवरी से ही जारी गिरावट का सिलसिला मई में भी कायम रहा. राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) की तरफ से जारी आंकड़ों के मुताबिक, मई में खाद्य वस्तुओं की महंगाई दर 8.69 प्रतिशत रही जो अप्रैल के 8.70 प्रतिशत से थोड़ा ही कम है.

रमेश ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, ”मोदी है तो महंगाई है. चार महीनों से खाद्य मूल्य मुद्रास्फीति 8.5 प्रतिशत से अधिक है. दालों की महंगाई दर पिछले एक वर्ष में लगातार दोहरे अंक में है जो 10 प्रतिशत से ज़्यादा है. मई में क.ीमतें 17.14 प्रतिशत बढ.ी हैं.” उन्होंने कहा, ”कांग्रेस के न्याय पत्र में हमने महंगाई और विशेष रूप से दालों की समस्या के समाधान के लिए दो उपाय करने का वादा किया था. हमने स्वामीनाथन आयोग के फॉर्मूले द्वारा निर्धारित मूल्य के साथ दालों के लिए एमएसपी की कानूनी गारंटी की बात की थी क्योंकि इससे दालों की घरेलू खेती को बढ.ावा मिलेगा.

रमेश के अनुसार, सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) में दालों को शामिल करने की बात की गई थी क्योंकि ऐसा करने से ग.रीबों के खाने में प्रोटीन की मात्रा बढ.ेगी और उन्हें महंगाई से भी बचाया जा सकेगा. उन्होंने आरोप लगाया कि ”एक तिहाई प्रधानमंत्री” के पास इस संकट का कोई समाधान नहीं है.

अपनी गिरती अंतरराष्ट्रीय छवि को बचाने जी7 सम्मेलन में शामिल होने जा रहे हैं प्रधानमंत्री : कांग्रेस

कांग्रेस ने बृहस्पतिवार को दावा किया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी अपनी ”गिरती अंतरराष्ट्रीय छवि को बचाने के मकसद से” जी7 शिखर सम्मेलन में शामिल होने जा रहे हैं. पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने 2007 के जी7 शिखर सम्मेलन का उल्लेख करते हुए कहा कि तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ‘ग्लोबल साउथ’ (विकासशील देशों) की आवाज बनकर उभरे थे.

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी लगातार तीसरे कार्यकाल में कार्यभार संभालने के बाद अपनी पहली विदेश यात्रा के तहत वार्षिक जी7 शिखर सम्मेलन में शामिल होने के लिए आज इटली रवाना होंगे. जी7 शिखर सम्मेलन का आयोजन इटली के अपुलिया क्षेत्र में लग्जरी रिजॉर्ट बोरगो एग्नाजिया में 13 से 15 जून तक होना है. बैठक में यूक्रेन में युद्ध और गाजा संघर्ष का मुद्दा छाये रहने की संभावना है.

रमेश ने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, “अमेरिका, कनाडा, जर्मनी, फ्रांस, इटली, ब्रिटेन और जापान के राष्ट्राध्यक्षों का जी7 शिखर सम्मेलन 1970 के दशक से होता आ रहा है. 1997 से 2014 के बीच रूस भी इसका सदस्य था. 2003 से भारत, चीन, ब्राज.ील, मैक्सिको और दक्षिण अफ्रीका को भी जी7 शिखर सम्मेलन में आमंत्रित किया जाता है.” उन्होंने कहा, “भारत के दृष्टिकोण से सबसे अहम जी7 शिखर सम्मेलन जून, 2007 में जर्मनी के हेलिगेंडम में हुआ था. यहीं पर वैश्विक जलवायु परिवर्तन वार्ता में समानता सुनिश्चित करने के लिए प्रसिद्ध ‘सिंह-मर्केल फॉर्मूला’ पहली बार दुनिया के सामने प्रस्तुत किया गया था. इसके बारे में अभी भी बात होती है. “

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