Sunday, September 27, 2026
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किसान आंदोलन के बीच कांग्रेस ने किया एमएसपी की कानूनी गारंटी का वादा

नयी दिल्ली/अंबिकापुर. कांग्रेस ने किसानों के ‘दिल्ली चलो’ आंदोलन के बीच मंगलवार को ऐलान किया कि अगर इस साल होने वाले लोकसभा चुनाव के बाद वह सत्ता में आती है, तो उसकी सरकार फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की कानूनी गारंटी प्रदान करेगी. इसके साथ ही पार्टी ने सत्ता में आने पर स्वामीनाथन आयोग की अनुशंसाओं को लागू करने का भी एलान किया.

पार्टी ने अपनी इस घोषणा को ‘ऐतिहासिक और क्रांतिकारी’ करार दिया है. पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि लोकसभा चुनाव से पहले यह कांग्रेस की पहली ‘गारंटी’ है. कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने इस घोषणा को लेकर कहा कि देश के किसानों के लिए ‘ऐतिहासिक दिन’ है तथा यह कदम 15 करोड़ किसान परिवारों की समृद्धि सुनिश्चित कर उनका जीवन बदल देगा.

छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले के मुख्यालय अंबिकापुर में राहुल गांधी की ‘भारत जोड़ो न्याय यात्रा’ के दौरान एक सभा को संबोधित करते हुए खरगे ने कहा, ”मैं छत्तीसगढ़ से घोषणा करना चाहता हूं कि किसानों के लिए फसलों की व्यापक खरीद के साथ एमएसपी की कानूनी गारंटी हमारी गारंटी है (आगामी लोकसभा चुनावों के लिए). अगर हम सत्ता में आते हैं, तब इस गारंटी को जरूर लागू किया जायेगा. यह हमारी पहली गारंटी है.”

उन्होंने कहा, ”जो किसान (दिल्ली सीमा पर) अपने अधिकारों के लिए लड़ रहे हैं, उन्हें रोकने के लिए सड़क पर लोहे की कीलें बिछाई गईं और सीमेंट की दीवारें खड़ी की गईं. ये कैसा लोकतंत्र है? क्या कोई अपने अधिकारों के लिए नहीं लड़ सकता” ‘दिल्ली चलो’ मार्च में शामिल किसानों की एक मांग फसलों के लिए एमएसपी की गारंटी वाला कानून बनाने की है.

राहुल गांधी ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, ”किसान भाइयों आज ऐतिहासिक दिन है! कांग्रेस ने हर किसान को फसल पर स्वामीनाथन कमीशन के अनुसार एमएसपी की कानूनी गारंटी देने का फैसला लिया है. यह कदम 15 करोड़ किसान परिवारों की समृद्धि सुनिश्चित कर उनका जीवन बदल देगा. न्याय के पथ पर यह कांग्रेस की पहली गारंटी है.” उन्होंने यह भी कहा, ”हमारी एमएसपी पर कानूनी गारंटी किसानों के जीवन में 3 बड़े बदलाव लाएगी. फसल के सही दाम मिलने से किसान कज.र् की मुसीबत से छुटकारा पा जाएगा. कोई भी किसान आत्महत्या को मजबूर नहीं होगा. खेती मुनाफे का व्यवसाय होगा और किसान समृद्ध बनेगा. समृद्ध किसान देश की तक.दीर बदल देगा.”

राहुल गांधी ने अंबिकापुर की सभा में कहा कि केंद्र सरकार एमएस स्वामीनाथन को भारत रत्न देने की घोषणा तो करती है, लेकिन वह (कृषि और किसानों पर) उनके सुझावों को लागू करने के लिए तैयार नहीं है. उन्होंने इस दौरान वादा किया कि केंद्र में विपक्षी दलों के गठबंधन ‘इंडिया’ की सरकार बनने पर स्वामीनाथन कमेटी के सुझावों पर अमल किया जाएगा.

राहुल गांधी का कहना था, ”मैं कहना चाहता हूं कि केंद्र में ‘इंडिया’ (गठबंधन) की सरकार आएगी, तो हम एमएसपी की गारंटी हिंदुस्तान के किसानों को देंगे. जो स्वामीनाथ रिपोर्ट में लिखा है, वह हम पूरा करके देंगे. यह हमारी शुरुआत है. हमारा चुनाव घोषणा पत्र बन रहा है. हम किसानों के लिए, मजदूरों के लिए काम करने जा रहे हैं.” कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाद्रा ने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, ”कांग्रेस ने किसानों के लिए आज एक ऐतिहासिक फैसला लिया है. खरगे जी और राहुल जी ने ऐलान किया है कि कांग्रेस की सरकार स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों को लागू करेगी और देश के हर किसान को इसके मुताबिक न्यूनतम समर्थन मूल्य की कानूनी गारंटी देगी.”

उन्होंने कहा, ”फसलों का उचित मूल्य किसानों का हक है. वे लाठी, गोली, आंसू गैस और हिंसा के नहीं, सम्मानजनक आय के हकदार हैं. कांग्रेस पार्टी किसानों की जायज मांगों के साथ खड़ी है.” कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, ”आज छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर में हरित और श्वेत क्रांति की नींव रखने वाली पार्टी ने किसान और किसान परिवारों के लिए एक और ऐतिहासिक और क्रांतिकारी घोषणा की है, जो शीघ्र ही जनता के समर्थन से हक.ीक.त बन जाएगी.” उन्होंने यह आरोप भी लगाया कि किसानों को प्रदर्शन करने से रोकना और उन्हें परेशान करना, मोदी सरकार की किसान विरोधी मानसिकता को दर्शाता है.

कांग्रेस महासचिव रणदीप सुरजेवाला ने संवाददाताओं से कहा, ”जब भी इतिहास लिखा जाएगा, तब मोदी सरकार के 10 साल के कार्यकाल को किसानों के खिलाफ क्रूरता, बर्बरता, दमन और दंशकाल के रूप में जाना जाएगा.” उन्होंने कहा, ”हमारी मांग है कि आदरणीय प्रधानमंत्री स्वयं किसानों से बात करें और उन्हें न्याय दें. ”

प्रधानमंत्री खुद किसानों से बात करें और उन्हें न्याय दें: कांग्रेस

कांग्रेस ने किसानों के ‘दिल्ली चलो’ मार्च के मद्देनजर सुरक्षा के व्यापक इंतजाम एवं ”किलेबंदी” को लेकर मंगलवार को केंद्र सरकार पर तीखा प्रहार किया और कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को खुद किसानों से बात कर उन्हें न्याय देना चाहिए. पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने मंगलवार को किसानों के आंदोलन का समर्थन किया और आरोप लगाया कि सरकार ने देश के अन्नदाताओं से किए वादे तोड़ दिए और अब उनकी आवाज पर लगाम लगाने का प्रयास कर रही है.

किसान नेताओं और केंद्र के बीच बातचीत के बेनतीजा रहने के बाद मंगलवार को किसानों के ‘दिल्ली चलो’ मार्च को राष्ट्रीय राजधानी में प्रवेश करने से रोकने के लिए दिल्ली की सीमाओं पर बहुस्तरीय अवरोधक, कंक्रीट के अवरोधक, लोहे की कीलों और कंटेनर की दीवारें लगाकर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए.

खरगे ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, “कंटीले तार, ड्रोन से आंसू गैस, कीले और बंदूक.ेंङ्घ सबका है इंतज.ाम, तानाशाह मोदी सरकार ने किसानों की आवाज. पर जो लगानी है लगाम ! ” उन्होंने कहा, “याद है ना ह्लआंदोलनजीवीह्व व ह्लपरजीवीह्व कहकर किया था बदनाम और 750 किसानों की ली थी जान. ” खरगे ने आरोप लगाया, “10 वर्षों में मोदी सरकार ने देश के अन्नदाताओं से किए गए अपने तीन वादे तोड़े हैं – 2022 तक किसानों की आमदनी दोगुनी, स्वामीनाथन रिपोर्ट के मुताबिक. लागत और 50 प्रतिशत एमएसपी लागू करना और एमएसपी को क.ानूनी दर्जा.” उन्होंने कहा, “हमारा किसान आंदोलन को पूरा समर्थन है. न डरेंगे, न झुकेंगे !” कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि किसानों को प्रदर्शन करने से रोकना और उन्हें परेशान करना, मोदी सरकार की किसान विरोधी मानसिकता को दर्शाता है.

उन्होंने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, ”किसान आंदोलन के लिए कारण स्पष्ट हैं. चाहे वह पूंजीपतियों की मदद के लिए भूमि अधिग्रहण कानून में संशोधन करने की कोशिश हो अथवा तीन काले कृषि कानून लाना रहा हो, इन्होंने हर तरह से किसानों को नुक.सान पहुंचाने का प्रयास किया है.” रमेश ने दावा किया, ”किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य की गारंटी भी आज तक नहीं मिली है. किसानों के लिए बाज.ार को कमज.ोर करने का कार्य किया गया है. यहां तक कि यह सरकार किसानों को उचित लागत मूल्य देने में भी विफल रही है.”

उन्होंने कहा, ” 2004-14 की अवधि में कांग्रेस सरकार के दौरान गेहूं के न्यूनतम समर्थन मूल्य में 126 फीसदी की बढ़ोतरी की गई थी. अगर वर्तमान सरकार द्वारा किसानों को वही न्यूनतम समर्थन मूल्य प्रदान किया जाता, तो आज उन्हें 3277 रुपये प्रति क्विंटल गेहूं का मूल्य मिल रहा होता, जबकि मौजूदा समय में 2275 रुपये प्रति क्विंटल मिल रहा है.” रमेश के मुताबिक, ”किसान ऋण के दुष्चक्र में फंसते जा रहे हैं. वर्ष 2013 से किसानों के ऊपर क.ज.र् में 60 फीसदी बढ़ोतरी हुई है और इससे उनकी स्थिति बेहद ख.राब हो चुकी है.”

उन्होंने कहा, ”प्रधानमंत्री फ.सल बीमा योजना के तहत बीमा करवाने वाले लाखों किसानों को उनके क्लेम (दावे) के भुगतान में देरी की समस्या का सामना करना पड़ता है. सरकार के अपने ही आंकड़ों के मुताबिक. ’21-22′ में लगभग 2761 करोड़ रुपये के दावे लंबित थे.” रमेश ने दावा किया, ”2022 तक किसानों की आय दोगुनी करने के बड़े-बड़े दावों और भाषणों की आड़ में अन्नदाताओं की वास्तविकता को छुपाने की कोशिश की गई. हक.ीक.त यह है कि किसान एक सम्मानजनक जीवन भी नहीं जी पा रहे हैं. वे क.ज.र् में डूबे हैं और उन्हें उनकी फ.सलों के नुक.सान के लिए बीमा की राशि भी नहीं मिल रही है.

कांग्रेस महासचिव रणदीप सुरजेवाला ने संवाददाताओं से कहा, ”जब भी इतिहास लिखा जाएगा, तब मोदी सरकार के 10 साल के कार्यकाल को किसानों के खिलाफ क्रूरता, बर्बरता, दमन और दंशकाल के रूप में जाना जाएगा.” उन्होंने दावा किया, ”भाजपा की केंद्र सरकार तथा हरियाणा-राजस्थान-उत्तर प्रदेश की भाजपा सरकारों ने देश की राजधानी दिल्ली को एक ‘पुलिस छावनी’ में तब्दील कर रखा है, जैसे कि किसी दुश्मन ने दिल्ली की सत्ता पर हमला बोल दिया हो.”

उन्होंने सवाल किया, ”क्या देश का अन्नदाता किसान न्याय मांगने देश की राजधानी दिल्ली में नहीं आ सकता? क्या किसान को दिल्ली की परिधि के सौ किलोमीटर तक भी आने की आजादी नहीं है? क्या सरकार यह मानती और सोचती है कि किसान दिल्ली की सत्ता पर आक्रमण करने आ रहा है या फिर जबरन सत्ता पर कब्जा करना चाहता है? देश की राजधानी को पुलिस और अर्द्धसैनिक बलों की छावनी में बदलने का क्या कारण है?” सुरजेवाला ने यह भी पूछा, ”देश का अन्नदाता प्रधानमंत्री और देश की सरकार से न्याय न मांगे, तो कहां जाए? तो क्या अब न्याय मांगने का कोई और रास्ता या तरीका है?” उन्होंने कहा, ”हमारी मांग है कि आदरणीय प्रधानमंत्री स्वयं किसानों से बात करें और उन्हें न्याय दें. ”

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