Friday, September 25, 2026
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कोयला घोटाला: उच्च न्यायालय ने पूर्व लोक सेवक की तीन साल की सजा निलंबित की

नयी दिल्ली. दिल्ली उच्च न्यायालय ने छत्तीसगढ. में कोयला ब्लॉक आवंटन में अनियमितताओं से संबंधित एक मामले में पूर्व लोक सेवक के. सी. सामरिया की तीन साल की सजा मंगलवार को निलंबित कर दी. सामरिया ने अपनी दोषसिद्धि और जेल की सजा को चुनौती दी है.

उच्च न्यायालय ने निचली अदालत के फैसले को चुनौती देने वाली सामरिया की याचिका पर केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) को नोटिस जारी करके जवाब तलब भी किया. उच्च न्यायालय ने सामरिया की अपील सुनवाई के लिए स्वीकार करते हुए इसे अन्य दोषियों की संबंधित याचिकाओं के साथ संबद्ध करते हुए नियमित मामले की श्रेणी में सूचीबद्ध किया.

न्यायमूर्ति तुषार राव गेडेला ने कहा, ”इस बात को ध्यान में रखते हुए कि याचिकाकर्ता को मुकदमे के दौरान कभी गिरफ्तार नहीं किया गया और सह-अभियुक्त लोक सेवकों को इस अदालत की एक समन्वय पीठ द्वारा पहले ही जमानत दे दी गई है, मेरी राय है कि अपील लंबित रहने तक निचली अदालत का सजा का आदेश निलंबित रहेगा.” मामले में वकील तरन्नुम चीमा ने सीबीआई का प्रतिनिधित्व किया.

उच्च न्यायालय की एक अन्य पीठ ने 16 अगस्त को सह-अभियुक्त और पूर्व कोयला सचिव एच. सी गुप्ता और पूर्व लोक सेवक के. एस. क्रोफा की तीन साल की सजा निलंबित कर दी थी और उनकी याचिकाओं के लंबित रहने तक उन्हें जमानत दे दी थी. निचली अदालत ने जुलाई में गुप्ता, क्रोफा ओर सामरिया को मामले में दोषी करार देते हुए तीन साल की जेल की सजा सुनाई थी.
निचली अदालत ने उन्हें हालांकि 45 दिनों की जमानत दे दी थी, ताकि वे उच्च न्यायालय के समक्ष अपनी दोषसिद्धि और सजा को चुनौती दे सकें.

इसके अलावा निचली अदालत ने इस मामले में पूर्व राज्यसभा सदस्य विजय दर्डा, उनके बेटे देवेंद्र और कारोबारी मनोज कुमार जयसवाल को भी दोषी ठहराया था तथा चार साल कैद की सजा सुनाई थी. दो दिन जेल में बिताने के बाद दर्डा और जायसवाल को 28 जुलाई को उच्च न्यायालय ने अंतरिम जमानत दे दी. उच्च न्यायालय ने नोटिस जारी किया था और दोषसिद्धि तथा सजा को चुनौती देने वाली एवं सजा निलंबित करने के अनुरोध वाली उनकी याचिका पर सीबीआई से जवाब तलब भी किया था.

निचली अदालत ने मामले में दोषी कंपनी जेएलडी यवतमाल एनर्जी प्राइवेट लिमिटेड पर 50 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया था.
अदालत ने दर्डा और जायसवाल पर 15-15 लाख रुपये का जुर्माना लगाया था तथा तीन अन्य दोषियों को 20-20 हजार रुपये का जुर्माना भरने का निर्देश दिया था.

समारिया की ओर से पेश हुए वकील राहुल त्यागी ने मंगलवार को सुनवाई के दौरान कहा कि दोषी ने निचली अदालत द्वारा लगाया गया 20,000 रुपये का जुर्माना पहले ही भर दिया है. उन्होंने कहा कि सामरिया को सुनवाई के दौरान कभी गिरफ्तार नहीं किया गया और अदालत से अनुरोध किया कि उनके मुवक्किल की जेल की सजा निलंबित कर दी जाये. उन्होंने कहा कि इस मामले में अन्य सह-आरोपी लोक सेवकों की सजा उच्च न्यायालय ने पहले ही निलंबित कर दी है.

सीबीआई ने अपनी प्राथमिकी में आरोप लगाया था कि जेएलडी यवतमाल ने 1999 और 2005 के बीच अपने समूह की कंपनियों को पहले ही चार कोयला ब्लॉक आवंटित करने की जानकारी गलत तरीके से छुपाई थी. हालांकि, बाद में दायर एक ‘क्लोजर रिपोर्ट’ में उसने कहा कि कोयला ब्लॉक के आवंटन में कोयला मंत्रालय से जेएलडी यवतमाल को कोई अनुचित लाभ नहीं मिला था. नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक (कैग) ने शुरू में अनुमान लगाया था कि कोयला घोटाले से सरकारी खजाने को 10.6 लाख करोड़ रुपये का भारी नुकसान हुआ, लेकिन संसद में पेश की गई इसकी अंतिम रिपोर्ट में यह आंकड़ा 1.86 लाख करोड़ रुपये बताया गया.

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