Saturday, September 26, 2026
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मुख्यमंत्री विजयन ने जमात-ए-इस्लामी पर निशाना साधा, इसके नेताओं के साथ बैठक की बात स्वीकारी

कोझिकोड. मुस्लिम संगठन जमात-ए-इस्लामी की अक्सर आलोचना करने वाले केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने रविवार को कहा कि उन्होंने उनके अनुरोध पर उनके नेताओं से मुलाकात की थी. कोझिकोड प्रेस क्लब में आयोजित ‘प्रेस से मिलिए’ कार्यक्रम में पत्रकारों से बात करते हुए विजयन ने बैठक की पुष्टि की और कहा कि यह बैठक मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) की राज्य समिति कार्यालय में हुई.

विजयन ने कहा, ‘‘उन्होंने मुझसे मिलने के लिए कहा, इसलिए वे माकपा राज्य समिति कार्यालय आए. लेकिन मैंने मुलाकात के दौरान उन्हें अच्छा नहीं बताया.’’ मुख्यमंत्री के अनुसार, जमात-ए-इस्लामी के नेताओं ने पूरी बैठक में अपना रुख स्पष्ट करने की कोशिश की. उन्होंने बताया कि ‘सॉलिडैरिटी यूथ मूवमेंट’ के नेता भी इस बातचीत में मौजूद थे.

उन्होंने कहा, ‘‘जब उन्होंने ‘सॉलिडैरिटी यूथ मूवमेंट’ के नेता का परिचय कराया, तो मैंने उनके मुंह पर कहा कि वे अब सबसे बड़े असामाजिक तत्व हैं. वे मेरी प्रतिक्रिया से हैरान रह गए.’’ विजयन ने कहा कि उनकी इस तरह की प्रतिक्रिया की वजह से ‘सॉलिडैरिटी यूथ मूवमेंट ने ‘‘राज्य में सभी अच्छी पहलों का विरोध किया है.’’ उन्होंने कहा, ‘‘हम सच बोलने में नहीं हिचकते . न तब, न अब.’’ जमात-ए-इस्लामी एक मुस्लिम संगठन है जिसका अब माकपा और सत्तारूढ़ वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (एलडीएफ) विरोध कर रहा हैं. उनका आरोप है कि इसके कांग्रेस नीत विपक्षी लोकतांत्रिक मोर्चा (यूडीएफ) के साथ घनिष्ठ संबंध हैं.

‘सॉलिडैरिटी यूथ मूवमेंट’ संगठन की युवा शाखा है. राज्य में स्थानीय निकाय चुनावों से पहले आयोजित हालिया प्रेस वार्ता के दौरान मुख्यमंत्री लगातार जमात-ए-इस्लामी पर निशाना साधते रहे हैं और इसे ‘‘सांप्रदायिक समूह’’ कहते रहे हैं. हालांकि, यूडीएफ ने दावा किया है कि एलडीएफ और माकपा ने अतीत में जमात-ए-इस्लामी के साथ बैठकें की थीं और चुनावों के दौरान उसका समर्थन मांगा था.

इस बीच, जमात-ए-इस्लामी केरल के सचिव शिहाब पुक्कोट्टूर ने मुख्यमंत्री के दावे पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि संगठन ने अतीत में आयोजित बैठकों में कभी भी माकपा से कोई ‘‘अच्छा होने का प्रमाण पत्र’’ नहीं मांगा था. पूक्कोट्टूर ने फेसबुक पर एक अखबार में छपी खबर को साझा करते हुए कहा कि विजयन का यह दावा कि बैठक केवल माकपा राज्य समिति कार्यालय में हुई थी, सही नहीं है.
उनके मुताबिक बैठक कई स्थानों पर हुई, जिनमें 31 मार्च 2011 को अलप्पुझा अतिथि गृह में हुई बैठक भी शामिल है.

पूक्कोट्टूर ने अखबार में छपी खबर रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा, ‘‘तत्कालीन माकपा के राज्य सचिव पिनराई विजयन ने वार्ता में हिस्सा लिया, जबकि जमात-ए-इस्लामी का प्रतिनिधित्व टी आरिफाली और शेख मुहम्मद करक्कुन्नू ने किया.’’ उन्होंने कहा कि माकपा ने संगठन से वोट मांगे थे, जो वास्तव में दिए गए. पूक्कोट्टूर ने कहा कि जमात-ए-इस्लामी को कभी भी वामपंथी पार्टी से किसी मान्यता की आवश्यकता नहीं पड़ी.

मुख्यमंत्री विजयन ने कांग्रेस नेता वेणुगोपाल की सार्वजनिक बहस की चुनौती स्वीकार की
केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने रविवार को कहा कि वह संसद में राज्य के विपक्षी कांग्रेस नीत संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा (यूडीएफ)के सांसदों के प्रदर्शन पर सार्वजनिक बहस के लिए तैयार हैं. उन्होंने इसी के साथ विपक्षी मोर्चे से इसके लिए तारीख और समय तय करने का आग्रह किया. मुख्यमंत्री अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (एआईसीसी) महासचिव के सी वेणुगोपाल के बयान के संबंध में संवाददाताओं द्वारा पूछे गए सवाल का जवाब दे रहे थे, जिसमें उन्होंने कहा था कि क्या विजयन इस मामले पर खुली बहस के लिए तैयार हैं.

वेणुगोपाल का बयान वरिष्ठ वाम नेता द्वारा की गई हालिया आलोचना के बाद आया है, जिसमें उन्होंने कहा था कि यूडीएफ सांसद संसद में केरल के विकास के मुद्दों को उठाने में विफल रहे हैं और कई अवसरों पर राज्य के हितों के खिलाफ रुख अपनाया है. विजयन ने कहा, ‘‘निश्चित रूप से मैं (खुली बहस के लिए) तैयार हूं. उन्हें समय और स्थान तय करने दीजिए.’’ उन्होंने सवाल किया कि क्या वेणुगोपाल को राज्य के यूडीएफ सांसदों के प्रदर्शन की जानकारी नहीं है. मुख्यमंत्री ने यूडीएफ सांसदों पर केरल को बर्बाद करने की केंद्र सरकार की कोशिशों में साथ देने का आरोप लगाया.

विजयन ने दावा किया कि विपक्षी सांसदों ने केंद्र को राज्य के खिलाफ रुख अपनाने की सलाह भी दी. उन्होंने आरोप लगाया कि हाल ही में केरल को अत्यधिक गरीबी मुक्त राज्य घोषित किए जाने के बाद विपक्षी सांसदों ने संसद में कुछ प्रश्न उठाकर राज्य में सभी एएवाई (अंत्योदय अन्न योजना) राशन कार्डों को समाप्त करने का प्रयास किया.

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