Saturday, September 26, 2026
Homeछत्तीसगढ़मुख्यमंत्री भूपेश बघेल 22 अप्रैल को माता कौशल्या महोत्सव-2023 का करेंगे शुभारंभ

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल 22 अप्रैल को माता कौशल्या महोत्सव-2023 का करेंगे शुभारंभ

रायपुर. मुख्यमंत्री भूपेश बघेल 22 अप्रैल को चंदखुरी में तीन दिवसीय माता कौशल्या महोत्सव का उद्घाटन करेंगे. कौशल्या माता महोत्सव 22 अप्रैल से 24 अप्रैल तक आरंग विधानसभा क्षेत्र के चंदखुरी में आयोजित होगा. महोत्सव के शुभारंभ कार्यक्रम की अध्यक्षता संस्कृति मंत्री अमरजीत भगत करेंगे. इस कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में पर्यटन मंत्री ताम्रध्वज साहू, कृषि मंत्री एवं रायपुर जिले के प्रभारी मंत्री रविन्द्र चौबे, नगरीय प्रशासन मंत्री डॉ. शिवकुमार डहरिया एवं समस्त मंत्रीगण, सांसदगण, संसदीय सचिव, विधायकगण, निगम मंडल, आयोग, जिला पंचायत के अध्यक्ष एवं उपाध्यक्ष तथा नगर पंचायत के अध्यक्ष शामिल होंगे.

उल्लेखनीय है कि राज्य सरकार द्वारा माता कौशल्या की जन्मभूमि चंदखुरी के वैभव को विश्व पटल पर स्थापित करने प्रदेश की कला, संस्कृति एवं पर्यटन को बढ़ावा देने एवं महिला सशक्तिकरण, कार्यशील कलाकारों के संरक्षण, संवर्धन एवं कला दलों के सतत् विकास हेतु माता कौशल्या महोत्सव का भव्य आयोजन किया जा रहा है. छत्तीसगढ़ में स्थित यह कौशल्या माता का एक मात्र मंदिर है.

सांस्कृतिक कार्यक्रम: 22 अप्रैल
महोत्सव के पहले दिन 22 अप्रैल से सांस्कृतिक प्रस्तुतियों में माधुरी महिला मानस मंडली, गरियाबंद की पुष्पांजलि सिन्हा, राम की शक्ति पूजा वाराणसी के व्योमेश शुक्ला और मुम्बई की सुप्रसिद्ध भजन गायिका सुकविता पौडवाल द्वारा भक्तिमय गीत-संगीत भजन प्रस्तुति दी जाएगी.

सांस्कृतिक कार्यक्रम: 23 अप्रैल
महोत्सव के दूसरे दिन 23 अप्रैल को वीणा वादिनी मानस परिवार, भाटापारा से वीणा साहू ,हरि दर्शन मानस मंडली जांजगीर-चांपा से देवेंद्र कुमार श्रीवास ,दंतेवाड़ा से ज्ञान गंगा मानस परिवार के कुशल सिंह साहू , मुंबई की सुरविंदर खुराना भक्तिमय शास्त्रीय नृत्य नाटिका और प्रभंजन चतुर्वेदी भिलाई भक्तिमय गीत संगीत भजन कार्यक्रम की प्रस्तुति देंगे.

23 अप्रैल को महोत्सव के दूसरे दिन विधानसभा अध्यक्ष चरणदास महंत कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे .कार्यक्रम की अध्यक्षता संस्कृति मंत्री अमरजीत भगत करेंगे. कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि पर्यटन मंत्री ताम्रध्वज साहू, कृषि मंत्री एवं रायपुर जिले के प्रभारी मंत्री रविन्द्र चौबे, नगरीय प्रशासन मंत्री डॉ. शिवकुमार डहरिया एवं समस्त मंत्रीगण, सांसदगण, संसदीय सचिव, विधायकगण, निगममंडल, आयोग, जिला पंचायत के अध्यक्ष एवं उपाध्यक्ष तथा नगर पंचायत के अध्यक्ष शामिल होंगे.

सांस्कृतिक कार्यक्रम: 24 अप्रैल
महोत्सव के तीसरे दिन 24 अप्रैल को प्रज्ञा महिला मानस परिवार, कुरूद सिलयारी की कुमुदिनी चंद्रवंशी ,देवेश शर्मा रायगढ़ भक्तिमय गीत संगीत भजन और मुंबई की सुतृप्ति शाक्य भक्तिमय गीत संगीत भजन की प्रस्तुति देंगे. 24 अप्रैल को महोत्सव के समापन समारोह में मुख्यमंत्री भूपेश बघेल मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे. कार्यक्रम की अध्यक्षता संस्कृति मंत्री अमरजीत भगत करेंगे. इस कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि पर्यटन मंत्री ताम्रध्वज साहू, कृषि मंत्री एवं रायपुर जिले के प्रभारी मंत्री रविन्द्र चौबे, नगरीय प्रशासन मंत्री डॉ. शिवकुमार डहरिया एवं समस्त मंत्रीगण, सांसदगण, संसदीय सचिव, विधायकगण, निगममंडल, आयोग, जिला पंचायत के अध्यक्ष एवं उपाध्यक्ष तथा नगर पंचायत के अध्यक्ष शामिल होंगे.

कौशल्या के राम से है छत्तीसगढ़ का गहरा नाता: आज भी लोग भांजे में देखते हैं प्रभु राम की छवि
भगवान श्री राम के ननिहाल और माता कौशल्या की नगरी चंदखुरी में आस्था और भक्ति से सराबोर नारी स्वावलंबन के उद्देश्य से माता कौशल्या महोत्सव का आगाज होने जा रहा है. मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल 22 अप्रैल को महोत्सव का शुभारंभ करेंगे.

गौरतलब है कि अयोेध्या की रानी एवं छत्तीसगढ़ की अस्मिता के प्रतीक माता कौशल्या के पुत्र भगवान श्री राम का भांजा के रूप में गहरा नाता हैै. इसका जीता-जागता उदाहरण है, छत्तीसगढ़ में सभी जाति समुदाय के लोग बहन के पुत्र को भगवान के प्रतिरूप अर्थात भांजा मानकर उनका चरण पखारते हैं. मोक्ष की प्राप्ति के लिए प्रभु श्रीराम से कामना करते हैं. यह और भी प्रबल तब होता है, जब गांव-शहर-कस्बा कहीं भी हो कोई भी जाति अथवा समुदाय के हो मामा-भांजा के बीच के रिश्ते को पूरी आत्मीयता के साथ निभाया जाता है. मामा के साथ किसी भांजे का यह रिश्ता कई बार माता-पिता के लिए पुत्र से भी ज्यादा घनिष्ठ स्वरूप में दिखाई पड़ता है.

त्रेतायुग में जब छत्तीसगढ़ का प्राचीन नाम कोसल व दण्डकारण्य के नाम से विख्यात था, तब कोसल नरेश भानुमंत थे. वाल्मिकी रामायण के अनुसार अयोध्यापति युवराज दशरथ के राज्याभिषेक के अवसर पर कोसल नरेश भानुमंत को भी अयोध्या आमंत्रित किया गया था. इस अवसर पर कोसल नरेश की पुत्री एवं राजकन्या भानुमति भी अयोघ्या गई हुई थी.

युवराज दशरथ कोसल राजकन्या भानुमति के सुंदर और सौम्य रूप को देखकर मोहित हो गए और कोसल नरेश महाराज भानुमंत से विवाह का प्रस्वाव रखा. युवराज दशरथ और कोसल की राजकन्या भानुमति का वैवाहिक संबंध हुआ. शादी के बाद कोसल क्षेत्र की राजकुमारी होने की वजह से भानुमति को कौशल्या कहा जाने लगा. अयोध्या की रानी इसी कौशल्या की कोख से मर्यादा पुरूषोत्तम भगवान श्री राम का जन्म हुआ. तभी ममतामयी माता कौशल्या को तत्कालीन कोसल राज्य के लोग बहन मानकर अपने बहन के पुत्र भगवान श्री राम को प्रतीक मानकर भांजा मानते है और उनका पैर छूकर आशीर्वाद लेते है.

कालांतर छत्तीसगढ में स्मृतिशेष आठवी-नौंवी सदी में निर्मित माता कौशल्या का भव्य मंदिर राजधानी रायपुर से 27 किलोमीटर दूर आरंग विेकासखण्ड के ग्राम चन्दखुरी में स्थित है. चंदखुरी भी रामायण से छत्तीसगढ़ को सीधे जोड़ता है. रामायण के बालकांड के सर्ग 13 श्लोक 26 में आरंग विकासखंड के तहत आने वाले गांव चंदखुरी का जिक्र मिलता है. माना जाता है कि चन्दखुरी सैकड़ों साल पहले चन्द्रपुरी अर्थात् देवताओं की नगरी के नाम से जानी जाती थी. समय के साथ चन्द्रपुरी, चन्द्रखुरी हो गया जो चन्द्रपुरी का अपभ्रंश है.

पौराणिक दृष्टि से इस मंदिर का अवशेष सोमवंशी कालीन आठवी-नौंवी शताब्दी के माने जाते है. इसके अलावा छत्तीसगढी संस्कृति में राम का नाम रचे-बसे है. तभी तो जब एक दूसरे से मिलते समय चाहे रिश्ते-नाते हो अथवा अपरिचित राम-राम कका, राम-राम काकी, राम-राम भैइया जैसे उच्चारण से अभिवादन आम तौर पर देखने सुनने को मिल ही जाता है.

छत्तीसगढ़ के ग्राम चन्दखुरी की पावन भूमि में प्रभु श्रीराम की जननी माता कौशल्या का दुर्लभ मंदिर देश और दुनिया में एक मात्र मंदिर है. यह छत्तीसगढ़ की गौरवपूर्ण अस्मिता का प्रतीक है. प्रकृति की अनुपम छटा बिखेरते इस मंदिर के गर्भ गृह में माता कौशल्या की गोद में बालरूप में प्रभु श्रीराम जी की वात्सल्य प्रतिमा श्रद्धालुओं एवं भक्तों के मन को सहज ही अपनी ओर आकर्षित कर लेती है. वहीं पूर्वी छत्तीसगढ़ के महानदी, जोंक नदी और शिवनाथ नदी के संगम स्थ्ल शिवरीनारायण क्षेत्र में रामनामी समुदाय में भगवान श्री राम के प्रति अकूत प्रेम एवं अराधना को परिलक्षित करता है.

स्मरणीय तथ्य है कि छत्तीसगढ़ का प्राचीनतम नाम दक्षिण कोसल था. रामायण काल में छत्तीसगढ़ का अधिकांश भाग दण्डकारण्य क्षेत्र के अंतर्गत आता था. यह क्षेत्र उन दिनों दक्षिणापथ कहलाता था. शोधकर्ताओं द्वारा वनवास काल में प्रभु श्री राम चन्द्र जी के यहां आने का प्रमाण मिलता है. शोधकर्ताओं के शोध किताबों से प्राप्त जानकारी के अनुसार प्रभु श्रीराम ने अपने वनवास काल के 14 वर्षों में से लगभग 10 वर्ष से अधिक समय छत्तीसगढ़ में व्यतीत किया था. छत्तीसगढ़ के लोकगीतों में देवी सीता की व्यथा, दण्डकारण्य की भौगोलिकता और वनस्पतियों के वर्णन भी मिलते हैं. माना जाता है कि भगवान श्रीराम ने उत्तर भारत से छत्तीसगढ़ में प्रवेश करने और यहां के विभिन्न स्थानों पर चौमासा व्यतीत करने के बाद दक्षिण भारत में प्रवेश किया था. इसलिए छत्तीसगढ़ को दक्षिणापथ भी कहा जाता है.

भगवान श्री रामजी के इन्हीं स्मरणीय तथ्यों और आगमन को सहेजने के लिए छत्तीसगढ़ ने श्री राम के यात्रा पथ को एवं जहां-जहां भगवान श्री राम, भगवान श्री लक्ष्मण और माता सीता ने समय व्यतीत किया है, जिन-जिन स्थानों पर उन्होंने आाराम किया पूजा-अर्चना की उन यादों को सहेजकर मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल ने चन्दखुरी स्थित माता कौशल्या मंदिर से प्रारंभ कर राम-वन-गमन-पर्यटन परिपथ के रूप में विकसित करने का बीड़ा उठाया है. इससे निश्चित ही देशवासियों की आस्था का सम्मान बढ़ेगा. यह श्री भूपेश सरकार का एक बड़ा उल्लेखनीय और ऐतिहासिक कदम हैं.

राम-वन-गमन-पथ के निर्माण से निश्चित ही राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर ख्याति मिलेगी. वहीं राम वन गमन परिपथ को एक पर्यटन सर्किट के तौर पर विकसित किए जाने का निर्णय रोजगार मुहैया कराने की दिशा में भी एक कारगर प्रयास होगा. विभिन्न शोध प्रकाशनों के अनुसार प्रभु श्रीराम ने छत्तीसगढ़ में वनगमन के दौरान लगभग 75 स्थलों का भ्रमण किया. जिसमें से 51 स्थल ऐसे हैं, जहां श्री राम ने भ्रमण के दौरान रूककर कुछ समय बिताया था. राम वन गमन पथ में आने वाले छत्तीसगढ़ के नौ महत्वपूर्ण स्थलों सीतामढ़ी-हरचौका (कोरिया), रामगढ़ (अम्बिकापुर) , शिवरीनारायण (जांजगीर-चांपा), तुरतुरिया (बलौदाबाजार), चंदखुरी (रायपुर), राजिम (गरियाबंद), सिहावा-सप्त ऋषि आश्रम (धमतरी) और जगदलपुर (बस्तर) और रामाराम (सुकमा) सहित उन इक्यांवन स्थलों को चिन्हाकिंत कर विकसित किया जा रहा है.

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Most Popular

Recent Comments