Friday, September 25, 2026
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पीली मटर के सस्ते आयात से किसानों को नुकसान और अदाणी समूह को फायदा : कांग्रेस

नयी दिल्ली. कांग्रेस ने पीली मटर के आयात पर सीमा शुल्क में छूट को लेकर मंगलवार को केंद्र सरकार पर निशाना साधा और आरोप लगाया कि इससे किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है, जबकि इसके ‘सबसे बड़े आयातक’ अदाणी समूह को भारी फायदा हुआ है. कांग्रेस के इस आरोप पर अदाणी समूह की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है.

पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, ”मोदानी की पीली दाल में कुछ तो काला है. 2024-25 में भारत ने 67 लाख टन से ज़्यादा दालों का आयात किया, जिनमें से लगभग 30 लाख टन पीली मटर थी. पीली मटर पर आयात शुल्क न होने के कारण, आयात की गई मटर घरेलू दालों की तुलना में काफ.ी कम कीमत पर बाज़ार में पहुंच रही है.” उन्होंने कहा कि आयातित मटर की कीमत 3,500 रुपये प्रति क्विंटल है, जो घरेलू दालों के 7,000-8,000 रुपये प्रति क्विंटल के एमएसपी का लगभग आधा है.

कांग्रेस नेता ने कहा, ”इसका नतीजा यह हुआ कि सस्ते आयात ने बाज़ार में बा­ढ़ ला दी है, जिससे महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, राजस्थान, गुजरात और उत्तर प्रदेश के किसानों के लिए घरेलू दालें प्रतिस्पर्धा नहीं कर पा रही हैं और उनके लिए यह लाभकारी नहीं रह गया है. इसकी वजह से जहां किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है, वहीं पीली मटर के सबसे बड़े आयातक- अदाणी समूह- को इससे भारी फायदा हुआ है.” कांग्रेस नेता ने कहा, ”उच्च खाद्य मुद्रास्फीति पर अंकुश लगाने के लिए दिसंबर 2023 में पीली मटर पर 50 प्रतिशत मूल सीमा शुल्क ”अस्थायी रूप से” समाप्त कर दिया गया था. हालांकि, किसानों द्वारा बार-बार की गई अपील के बावजूद सरकार ने इस फैसले को जारी रखा. यहां तक कि कृषि लागत एवं मूल्य आयोग (सीएसीपी), नीति आयोग और उच्चतम न्यायालय जैसी संस्थाओं ने भी किसानों की सुरक्षा के लिए बिना रोक-टोक आयात पर प्रतिबंध लगाने की सलाह दी थी.”

रमेश ने दावा किया कि फिर भी केंद्र सरकार ने इन चेतावनियों को नज़रअंदाज़ किया और पीली मटर पर सीमा शुल्क में छूट जारी रखी तथा अब तो यह छूट मार्च 2026 तक ब­ढ़ा दी गई है. उन्होंने आरोप लगाया, ”यह एक और स्पष्ट उदाहरण है कि कैसे तथाकथित ‘आत्मनिर्भर भारत’ वास्तव में ‘मोदानी-निर्भर भारत’ बनकर रह गया है.” उल्लेखनीय है कि उच्चतम न्यायालय ने पीली मटर के आयात पर प्रतिबंध लगाने की मांग वाली जनहित याचिका पर बीते 25 सितंबर को केंद्र से जवाब मांगा था. याचिका में तर्क दिया गया है कि पीली मटर की आपूर्ति से दाल उत्पादक किसानों की आजीविका प्रभावित हो रही है. पीली मटर को दालों का विकल्प माना जाता है.

एसआईआर पूर्णता, समानता और सटीकता के पैमानों पर विफल रहा : कांग्रेस
कांग्रेस ने मंगलवार को आरोप लगाया कि निर्वाचन आयोग द्वारा बिहार में चलाई गई मतदाता सूची की विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की प्रक्रिया पूर्णता, समानता और सटीकता के मोर्चों पर विफल रही है. पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने यह भी आरोप लगाया कि आयोग के पास देश को यह बताने की ईमानदारी या साहस नहीं है कि बिहार में कितने ऐसे लोगों के नाम हटाए गए हैं जो भारत के नागरिक नहीं हैं. मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने बताया था कि मृत्यु होने, भारतीय नागरिक नहीं होने, प्रवासन और नाम के दोहराव के कारण बिहार की मतदाता सूची से 69 लाख नाम हटाए गए. हालांकि उन्होंने इनके अलग-अलग आंकड़े उपलब्ध नहीं कराए.

रमेश ने एक लेख साझा करते हुए ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, “बिहार में एसआईआर पर उच्चतम न्यायालय में सुनवाई आज फिर शुरू हो रही है. इस बेहतरीन विश्लेषण से पता चलता है कि निर्वाचन आयोग द्वारा चलाए गए पूरे एसआईआर अभ्यास पूर्णता, समानता और सटीकता… इन तीनों मोर्चों पर विफल रहे हैं.” उन्होंने कहा, “जो लोग देश के नागरिक नहीं हैं, उनका नाम मतदाता सूची से हटाने के लिए एसआईआर की आवश्यकता के बारे में बहुत कुछ कहा गया था. आयोग के पास देश को यह बताने की ईमानदारी या साहस नहीं है कि बिहार में कितने ऐसे लोगों के नाम हटाए गए हैं जो भारत के नागरिक नहीं हैं.” रमेश के अनुसार, यदि आयोग ने ऐसा किया होता, तो यह पहले से भी अधिक उजागर हो गया होता.

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