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चैतन्यानंद ने छात्राओं को अपने आवास में आने के लिए मजबूर किया: प्राथमिकी में आरोप

नयी दिल्ली. स्वयंभू बाबा स्वामी चैतन्यानंद सरस्वती के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी में आरोप लगाया गया है कि दिल्ली स्थित श्री शारदा भारतीय प्रबंधन संस्थान (एसआईआईएमडी) की छात्राओं को देर रात स्वयंभू बाबा के क्वार्टर (आवास) में जाने के लिए मजबूर किया गया. संस्थान के प्रबंधन की शिकायत के बाद प्राथमिकी दर्ज की गई जिसमें आरोप लगाया गया कि 30 से अधिक छात्राओं के साथ डिजिटल माध्यम से हुई बातचीत के दौरान उनमें से कई ने चैतन्यानंद द्वारा यौन उत्पीड़न और धमकी के मामलों का खुलासा किया. चैतन्यानंद को पहले स्वामी (डॉ.) पार्थसारथी के नाम से जाना जाता था.

प्राथमिकी का हवाला देते हुए अधिकारियों ने कहा कि छात्राओं को धमकी दी गई थी कि अगर उन्होंने विरोध किया तो उन्हें निलंबित कर दिया जाएगा और उनकी डिग्री रोक दी जाएगी. प्राथमिकी में कहा गया है, ”आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग की छात्राओं को देर रात स्वामी चैतन्यानंद सरस्वती के क्वार्टर में जाने के लिए मजबूर किया गया.” संस्थान प्रबंधन ने आरोप लगाया कि एक छात्रा को ”अपना नाम बदलने के लिए मजबूर” किया गया और सबूत मिटाने के लिए उसके फोन से संदेश डिलीट करने को कहा गया.

अक्टूबर 2024 में संस्थान में दाखिला लेने वाली एक पीड़िता ने बताया कि उसके दाखिला लेने के कुछ ही समय बाद उत्पीड़न शुरू हो गया था. उसने बताया कि सरस्वती ने पहली बार एक दिसंबर, 2024 को संस्थान के भूतल स्थित कार्यालय में छात्राओं से बातचीत की थी. उसने कहा, “उस दिन, स्वामीजी ने हमें प्रेरित करने के बजाय, हमारा मनोबल गिरा दिया. उन्होंने एक महिला का परिचय एसोसिएट डीन और अपनी भक्त के रूप में कराया.” प्राथमिकी में शिकायतकर्ता ने कहा कि जब उसके पैर के अंगूठे में चोट आई तो उसने अपनी एक्स-रे रिपोर्ट साझा करने के लिए व्हाट्सएप पर सरस्वती से संपर्क किया. पीड़िता ने प्राथमिकी में आरोप लगाया, “तब से स्वामीजी मुझे अनुचित संदेश भेजने लगे, जिसमें वे कहते थे, ‘बेबी, मैं तुमसे प्यार करता हूं,’ ‘आज तुम बहुत सुंदर लग रही हो.’ जब उसने संदेशों को नजरअंदाज किया, तो आरोपी ने कथित तौर पर संकाय सदस्यों के जरिए उस पर और दबाव डाला. पीड़िता ने प्राथमिकी में कहा, “जब भी मैंने विरोध किया, स्वामीजी ने मुझे हल्द्वानी के पुलिस अधीक्षक द्वारा कार्रवाई की धमकी दी.”

उसने आरोप लगाया, “उन्होंने एसोसिएट डीन को बताया और फिर डीन ने मुझसे उनके संदेशों का जवाब देने को कहा. स्वामीजी ने वरिष्ठों को यह भी निर्देश दिया कि वे सुनिश्चित करें कि सभी लड़कियां उनके संदेशों का जवाब दें. उन्होंने चेतावनी दी कि जो लड़कियां ऐसा नहीं करेंगी, उनकी उपस्थिति में हेराफेरी की जाएगी या परीक्षा में उनके अंक अनावश्यक रूप से काटे जाएंगे.” पीड़िता ने कहा कि मार्च 2025 में सरस्वती कुछ छात्राओं को अपनी बीएमडब्ल्यू कार में घुमाने ले गए और आधी रात के बाद भी उन्हें अनुचित संदेश भेजते रहे. शिकायत में कहा गया, “तड़के 3.30 बजे, वह हमें अजीबोगरीब टिप्पणियों वाले संदेश भेजते और अक्सर उन संवाद को डिलीट कर देते थे.”

शिकायतकर्ता ने यह भी आरोप लगाया कि जब उसने एसोसिएट डीन से शिकायत की, तो मदद करने के बजाय, उसे सरस्वती से माफ.ी मांगने के लिए एक मेल लिखने को कहा गया. उसने कहा, “इसके बाद, उन्होंने मुझे ईमेल भेजने के लिए मजबूर किया और धमकी दी कि मैं पास नहीं होने वाली हूं. उन्होंने खुलेआम कहा कि अगर मैं उनकी बात नहीं मानूंगी तो वे मुझे फेल कर सकते हैं.” प्राथमिकी में कहा गया है कि सरस्वती ने होली समारोह के दौरान पीड़िता के साथ दुर्व्यवहार किया, उस पर जबरन रंग लगाया, उसे बार-बार “बेबी” कहा और हाथ मिलाते समय उसे अनुचित तरीके से छुआ.

जून 2025 में, 35 अन्य लड़कियों के साथ ऋषिकेश के भ्रमण के दौरान, सरस्वती ने कथित तौर पर छात्राओं को बेवक्त अपने कमरे में बुलाया. प्राथमिकी में पीड़िता ने आरोप लगाया, “जब माता-पिता ने उनसे संपर्क करने की कोशिश की, तो उन्होंने उनके नंबर भी ब्लॉक कर दिए. उन्होंने हमें मानसिक, शारीरिक और भावनात्मक रूप से प्रताड़ित किया.” पुलिस ने बताया कि वसंत कुंज उत्तर थाने में मामला दर्ज कर लिया गया है और जांच जारी है. पुलिस ने बताया कि आरोपी को पकड़ने के लिए कई टीम बनाई गई हैं और उसे देश से भागने से रोकने के लिए एक ‘लुकआउट सर्कुलर’ भी जारी किया गया है.

पुलिस सूत्रों ने यह भी बताया कि चैतन्यानंद संस्थान की संपत्ति का कुछ हिस्सा किराये पर लोगों को देने की कोशिश कर रहा था और उनसे उसने भारी रकम ली थी, जिससे वह लक्जरी कारें खरीद रहा था. सूत्रों ने बताया, “हम सभी तथ्यों की जांच कर रहे हैं कि क्या वह कुछ हिस्से को किराए पर देने की कोशिश कर रहा था. टीम पहले से ही उसकी तलाश कर रही हैं. ऐसी संभावना है कि वह छिपने के लिए भेष बदल रहा हो.”

चैतन्यानंद मामले में श्रीसीम और पीठम ने जारी किया बयान

श्री शारदा भारतीय प्रबंधन अनुसंधान संस्थान (श्रीसीम) ने स्वयंभू बाबा स्वामी चैतन्यानंद सरस्वती के खिलाफ उत्पीड़न और दुर्व्यवहार के आरोपों को लेकर कई कदम उठाए हैं. संस्थान ने चार पृष्ठों की एक विस्तृत प्रेस विज्ञप्ति जारी कर इन कदमों का विवरण दिया है.

संस्थान ने बुधवार को जारी बयान में कहा कि इसने चैतन्यानंद, जिन्हें पहले स्वामी (डॉ.) पार्थसारथी के नाम से जाना जाता था, से जुड़े कथित उत्पीड़न, मनमाने व्यवहार और वित्तीय अनियमितताओं के बारे में जानकारी मिलने के बाद वहां अध्ययनरत अपने छात्रों की सुरक्षा के लिए तेजी से और निर्णायक रूप से कार्रवाई की.

बयान के अनुसार, एक शासी परिषद के माध्यम से संस्थान का संचालन करने वाले श्रृंगेरी शारदा पीठम ने पहले स्वतंत्र विशेषज्ञों द्वारा श्रीसीम का व्यापक ‘ऑडिट’ कराने का आदेश दिया था. इस ‘ऑडिट’ में धोखाधड़ी, जालसाजी, आपराधिक विश्वासघात सहित कई अनियमितताओं की ओर इशारा किया गया था जिसमें चैतन्यनंद और उनके सहयोगियों की संलिप्तता का आरोप है.

इसमें कहा गया, ”जांच के निष्कर्षों के आधार पर पीठम ने 300 से अधिक पृष्ठों के दस्तावेज संलग्न करते हुए 19 जुलाई 2025 को एक आपराधिक शिकायत दी जिस पर 23 जुलाई को प्राथमिकी दर्ज की गई.” पीठम ने चैतन्यानंद को दी गई ‘पावर ऑफ अटॉर्नी’ भी रद्द कर दी और संस्थान के कामकाज की देखरेख के लिए ईमानदार, प्रतिष्ठित शिक्षाविदों और पेशेवरों की 11 सदस्यीय शासी परिषद का गठन किया.

प्रेस के लिए जारी बयान में यह भी बताया गया है कि एक अगस्त को पीठम को वायु सेना मुख्यालय के शिक्षा निदेशालय के एक ग्रुप कैप्टन से एक ईमेल प्राप्त हुआ जिसमें चैतन्यानंद के कथित दुर्व्यवहार के बारे में छात्राओं की शिकायतें थीं. शिकायतों में छात्राओं को देर रात व्हाट्सएप संदेश भेजने और उनके शैक्षणिक भविष्य को नुकसान पहुंचाने वाले मनमाने और प्रतिशोधात्मक फैसलों का जिक्र था.

बयान में कहा गया कि ईमेल के बाद नवगठित शासी परिषद ने छात्राओं के साथ एक डिजिटल कॉन्फ्रेंस के जरिए विस्तृत जानकारी एकत्र की. अगले दिन दो अगस्त को पीठम ने निदेशालय को जवाब दिया जिसमें जोर देकर कहा गया कि प्राथमिकी पहले ही दर्ज की जा चुकी है और आवश्यक कानूनी कार्रवाई जारी है.

पीठम ने यह भी स्पष्ट किया कि चैतन्यानंद श्रृंगेरी शारदा पीठम के भिक्षु नहीं थे और न ही आदि शंकराचार्य परंपरा का हिस्सा थे.
संस्थान ने अपनी नवीनतम प्रेस विज्ञप्ति में कहा है कि हमें जानकारी मिली है कि स्वामी चैतन्यनंद सरस्वती फरार हैं और पुलिस से बचने का प्रयास कर रहे हैं. साथ ही इसमें कहा गया है कि छात्र अब पूरी तरह सुरक्षित हैं. इसमें कहा गया है कि पीठम और श्रीसीम जांच प्रक्रिया में पूर्ण सहयोग देंगे, ताकि कानून के अनुसार न्याय सुनिश्चित हो सके.

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