Saturday, September 26, 2026
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लद्दाख के लोगों, संस्कृति पर भाजपा और आरएसएस हमला कर रहे: राहुल गांधी

नयी दिल्ली/श्रीनगर. कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने रविवार को आरोप लगाया कि लद्दाख के लोगों, संस्कृति और परंपराओं पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और आरएसएस द्वारा हमला किया जा रहा है. उन्होंने लद्दाख को छठी अनुसूची में शामिल करने की भी वकालत की.
गांधी की यह टिप्पणी लेह में हुई हिंसा के मद्देनजर आई है. लेह में बुधवार को हुई हिंसा में सुरक्षा बलों की गोलीबारी में चार लोग मारे गये थे और कई अन्य घायल हो गये. तब से, दंगों में संलिप्तता के आरोप में 50 लोगों को हिरासत में लिया गया है. लद्दाख को राज्य का दर्जा देने की मांग कर रहे जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (रासुका) के तहत हिरासत में लिया गया है और राजस्थान की जोधपुर जेल में रखा गया है.

गांधी ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ”लद्दाख के अद्भुत लोगों, संस्कृति और परंपराओं पर भाजपा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) हमला कर रहे हैं.” लोकसभा में विपक्ष के नेता ने कहा, ”लद्दाख के लोगों ने आवाज उठाई. भाजपा ने चार युवकों की जान लेकर और सोनम वांगचुक को जेल में डालकर जवाब दिया. हत्या बंद करो. हिंसा बंद करो. धमकी देना बंद करो.”

उन्होंने कहा, ”लद्दाख को आवाज दीजिए. उन्हें छठी अनुसूची दीजिए.” अधिकारियों ने बताया कि हिंसा प्रभावित लेह में रविवार को लगातार पांचवें दिन कफ्र्यू लगा रहा और उपराज्यपाल कविंदर गुप्ता प्रतिबंधों में ढील देने के बारे में फैसला करने के लिए सुरक्षा समीक्षा बैठक करेंगे. राज्य का दर्जा देने और लद्दाख में छठी अनुसूची के विस्तार के मुद्दे पर केंद्र के साथ बातचीत को आगे बढ़ाने के लिए ‘लेह एपेक्स बॉडी’ (एलएबी) द्वारा आहूत बंद के दौरान बुधवार को प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच हिंसक झड़प हुई थी.
शनिवार को लेह में कफ्र्यू में चार घंटे की ढील दी गई थी.

भाजपा के झूठे वादों और केंद्र के विश्वासघात के कारण लद्दाख आंदोलन हुआ : कांग्रेस

कांग्रेस ने रविवार को कहा कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के ”झूठे वादों” और केंद्र सरकार के ”विश्वासघात” के कारण लद्दाख में आंदोलन हुआ. जम्मू-कश्मीर प्रदेश कांग्रेस कमेटी (जेकेपीसीसी) के अध्यक्ष तारिक कर्रा ने यहां संवाददाता सम्मेलन में कहा, ”यह आंदोलन भाजपा द्वारा अपने घोषणापत्र में किये गये झूठे वादों का नतीजा है. उन्होंने (संविधान की) छठी अनुसूची का वादा किया था. यह आंदोलन पिछले पांच वर्षों में किए गए विश्वासघात और वादों को पूरा न करने के खिलाफ है.” उन्होंने कहा कि अगर भाजपा ने अपने वादे पूरे किए होते, तो यह स्थिति नहीं आती.

उन्होंने कहा, ”लद्दाख के लोगों से बातचीत करने, अपनी (भाजपा) गलतियों को स्वीकार करने और बातचीत को दिशा देने के बजाय, वे कांग्रेस पर निशाना साध रहे हैं. वे अपने कुप्रबंधन और वादे पूरे न करने का दोष कांग्रेस पर मढ़ने की कोशिश कर रहे हैं.” राज्य का दर्जा और लद्दाख को संविधान की छठी अनुसूची में शामिल करने की मांग के समर्थन में आंदोलन ने 24 सितंबर को हिंसक रूप ले लिया था, जिसमें चार लोग मारे गये थे और कई अन्य घायल हो गये थे.

घटना के बाद, आंदोलन का नेतृत्व करने वालों में शामिल जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (एनएसए) के तहत हिरासत में लिया गया. जेकेपीसीसी प्रमुख कर्रा ने कहा कि कांग्रेस बुधवार को हुई आगजनी और गोलीबारी का समर्थन नहीं करती है और उन्होंने पीड़ित परिवारों के साथ एकजुटता व्यक्त की. एनएसए के तहत कार्यकर्ता वांगचुक की हिरासत के बारे में पूछे गए एक सवाल पर कर्रा ने कहा कि इस तरह के कदम से वहां विरोध प्रदर्शन पर अंकुश नहीं लगेगा.

उन्होंने कहा, ”यदि भारत सरकार सोचती है कि वांगचुक को गिरफ्तार करके और उन्हें केंद्र शासित प्रदेश से बाहर भेजकर वहां हिंसा पर अंकुश लग जाएगा, तो वे गलत सोच रहे हैं.” इस मुद्दे को ”बहुत संवेदनशील” और राष्ट्रीय महत्व का बताते हुए, कर्रा ने कहा कि शायद भाजपा इस तथ्य को नजरअंदाज कर रही है कि लद्दाख दो तरफ से दो शत्रु देशों – पाकिस्तान और चीन से घिरा हुआ है.

उन्होंने कहा, ”चीन पहले से ही लद्दाख क्षेत्र में घुस आया है. सोनम और स्थानीय सांसद ने भी यह बात कही है. राष्ट्रीय सुरक्षा को महत्व देने के बजाय, वे अपने अहंकार और अपनी ‘इस्तेमाल करो और फेंको’ की नीति का इस्तेमाल कर रहे हैं.” कर्रा ने यह भी कहा कि जो लोग स्थानीय प्रशासन और केंद्र सरकार के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं, वे वही लोग हैं जिनका भाजपा और केंद्र ने अनुच्छेद 370 को हटाए जाने का जश्न मनाने के लिए ”इस्तेमाल” किया था.

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वर्तमान में कांग्रेस का वांगचुक से कोई संबंध नहीं है. उन्होंने कहा कि वांगचुक के पिता 1970 के दशक में जम्मू-कश्मीर सरकार में उप मंत्री हुआ करते थे, लेकिन पार्टी विरोधी गतिविधियों के कारण 1987 में उन्हें पार्टी से निलंबित कर दिया गया था. कर्रा ने कहा, ”तब से उनका कांग्रेस से कोई संबंध नहीं है. वांगचुक के एक भाई भाजपा की लेह इकाई के उपाध्यक्ष हैं.”

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