आज अंतरराष्ट्रीय नर्स दिवस के अवसर पर स्वास्थ्य सेवाओं में जुटी उन महिलाओं को याद किया जा रहा है, जो समाज के स्वास्थ्य और अपने परिवार की खुशहाली के बीच एक मजबूत सेतु का काम कर रही हैं। चिकित्सा जगत में नर्सों की भूमिका केवल उपचार तक सीमित नहीं है, बल्कि वे ममता और अनुशासन का अनूठा उदाहरण पेश कर रही हैं।
स्वाति छाबड़ा: 14,000 की आबादी और परिवार की जिम्मेदारी

आर.एच.ओ. (RHO) स्वाति छाबड़ा , जो वर्ष 2017 से निरंतर अपनी सेवाएं दे रही हैं, इस समर्पण की एक जीवंत मिसाल हैं। स्वाति के कंधों पर उनके क्षेत्र की 14,000 से अधिक की जनसंख्या की स्वास्थ्य देखभाल का जिम्मा है।
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व्यापक कार्यक्षेत्र: बच्चों के टीकाकरण से लेकर गर्भवती माताओं की प्रसव पूर्व और पश्चात देखभाल तक, वे हर मोर्चे पर सक्रिय रहती हैं।
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पारिवारिक संतुलन: इतनी बड़ी जनसंख्या की जिम्मेदारी के साथ-साथ स्वाति जी अपने घर-परिवार और विशेष रूप से अपने बच्चों की पढ़ाई-लिखाई की जिम्मेदारी भी बखूबी निभा रही हैं। उनका कहना है कि “कर्तव्य और मातृत्व दोनों ही मेरी प्राथमिकताएं हैं।”
ज्योति कश्यप: घर से दूर, सेवा में समर्पित

इसी क्रम में ज्योति कश्यप की कहानी भी प्रेरणादायक है। ज्योति अपने घर और अपनों से दूर रहकर भी पूरी निष्ठा के साथ 12,000 की जनसंख्या को स्वास्थ्य सुविधाएं प्रदान कर रही हैं। इतनी बड़ी आबादी की देखभाल करना चुनौतीपूर्ण है, लेकिन ज्योति ने साबित कर दिया है कि सेवा का जज्बा हो तो कोई भी दूरी बाधा नहीं बन सकती।


