Homeधर्म समाजअहोई अष्टमी पर इस बार बन रहा खास संयोग, जानें शुभ मुहूर्त,...

अहोई अष्टमी पर इस बार बन रहा खास संयोग, जानें शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और व्रत कथा

हिंदू धर्म में अहोई अष्टमी व्रत का विशेष महत्व है. यह व्रत माताएं अपनी संतान की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और सुखी जीवन की कामना से रखती हैं. इस दिन अहोई माता की पूजा की जाती है. वहीं, व्रत में शाम के समय तारों के दर्शन करके उन्हें अर्घ्य देने की खास परंपरा है. पंचांग के अनुसार, यह व्रत हर साल कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को रखा जाता है. हालांकि, तिथि के शुरू होने और समाप्त होने के समय में अंतर के कारण कई बार व्रत की सही तारीख को लेकर असमंजस की स्थिति बन जाती है. साल 2026 में भी अहोई अष्टमी के व्रत की तारीख को लेकर लोगों के मन में सवाल हैं. ऐसे में आइए ज्योतिषाचार्य प्रवीण मिश्र से जानते हैं व्रत की सही तारीख, पूजा विधि, शुभ मुहूर्त, नियम और अहोई माता की कथा.

कब है अहोई अष्टमी 2026?
पंचांग के अनुसार, कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि 1 नवंबर 2026 को दोपहर 2 बजकर 51 मिनट पर शुरू होगी. इसका समापन 2 नवंबर 2026 को दोपहर 1 बजकर 10 मिनट पर होगा. ऐसे में उदयातिथि के अनुसार, अहोई अष्टमी का व्रत 1 नवंबर को रखा जाएगा.

अहोई अष्टमी 2026 शुभ मुहूर्त
अहोई अष्टमी पूजा का शुभ मुहूर्त: शाम 4:59 बजे से 6:15 बजे तक
तारों के दर्शन का समय: शाम 5:22 बजे के आसपास
चंद्रोदय का समय: रात 11:05 बजे के आसपास

अहोई अष्टमी व्रत की पूजा विधि
अहोई अष्टमी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें. इसके बाद घर के मंदिर में पूजा करें. संतान की खुशहाली के लिए व्रत रखने का संकल्प लें. दिनभर व्रत के नियमों का पालन करें. शाम को अहोई माता की पूजा की तैयारी करें. पूजा के लिए अहोई माता की तस्वीर या चित्र रखें. कुछ घरों में दीवार पर अहोई माता का चित्र बनाकर भी पूजा की जाती है. पूजा के दौरान रोली, चावल, फूल और भोग अर्पित करें. शाम के समय अहोई माता की पूजा करें. फिर व्रत कथा सुनें या पढ़ें. इसके बाद तारों के दर्शन करके उन्हें अर्घ्य दें. पूजा के अंत में संतान की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और परिवार की सुख-समृद्धि के लिए प्रार्थना करें.

अहोई माता कौन हैं?
अहोई माता को मां दुर्गा का स्वरूप माना जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, अहोई अष्टमी का व्रत संतान की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और सुखी जीवन की कामना से रखा जाता है. इस दिन माताएं अहोई माता की विधि-विधान से पूजा करती हैं. मान्यता है कि अहोई माता की पूजा और व्रत करने से संतान के जीवन में सुख-समृद्धि बनी रहती है और परिवार में खुशहाली आती है.

अहोई अष्टमी व्रत कथा
पौराणिक कथा के अनुसार, एक नगर में एक साहूकार रहता था. उसके सात बेटे, सात बहुएं और एक बेटी थी. दीपावली से कुछ दिन पहले घर की साफ-सफाई और लिपाई-पुताई की तैयारी शुरू हुई. इसके लिए साहूकार की सातों बहुएं और उसकी बेटी मिट्टी लेने जंगल की ओर गईं. मिट्टी खोदते समय साहूकार की बेटी की कुदाल से एक सेहू के बच्चे की मृत्यु हो गई. सेहू को जब इस बात का पता चला तो वह बहुत दुखी और क्रोधित हुई. उसने साहूकार की बेटी को श्राप देने का फैसला किया. यह देखकर छोटी बहू आगे आई और उसने अपनी ननद की जगह श्राप खुद लेने की बात कही.

इसके बाद छोटी बहू के बच्चों को लेकर दुखद घटनाएं होने लगीं. वह अपने दुख से परेशान रहने लगी. परिवार के लोग भी उसकी परेशानी देखकर चिंतित हो गए. तब एक विद्वान पंडित ने उसे गौ माता की सेवा करने की सलाह दी. उन्होंने बताया कि गौ माता की कृपा से उसके दुख दूर हो सकते हैं. छोटी बहू ने पूरी श्रद्धा से गौ माता की सेवा शुरू कर दी. उसकी सेवा से प्रसन्न होकर गौ माता ने उसकी मदद करने का निश्चय किया. सेहू उसकी श्रद्धा और सेवा से प्रसन्न हुई और उसने अपना श्राप वापस ले लिया. इसके बाद छोटी बहू के जीवन में खुशियां लौट आईं. उसके परिवार में फिर से सुख-समृद्धि आने लगी और उसकी संतान को सुखी जीवन का आशीर्वाद मिला.
 

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Most Popular

Recent Comments