Saturday, September 26, 2026
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वित्तीय ‘अनियमितताओं’ के कारण कार्यकर्ता वांगचुक के NGO का FCRA लाइसेंस रद्द

नयी दिल्ली/लेह. केंद्रीय गृह मंत्रालय ने बृहस्पतिवार को जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक द्वारा स्थापित स्टूडेंट्स एजुकेशनल एंड कल्चरल मूवमेंट ऑफ लद्दाख (एसईसीएमओएल) का एफसीआरए लाइसेंस “तत्काल प्रभाव” से रद्द कर दिया है. एक सरकारी आदेश में यह जानकारी दी गयी.

मंत्रालय की यह कार्रवाई संगठन के खातों में पाई गई कई कथित विसंगतियों पर आधारित थी, जिसमें स्वीडन से धन अंतरण भी शामिल था, जिसे मंत्रालय ने “राष्ट्रीय हित” के विरुद्ध पाया. यह घटनाक्रम लद्दाख को राज्य का दर्जा दिलाने की मांग कर रहे प्रदर्शनकारियों और लेह में बंद के दौरान सुरक्षार्किमयों के बीच व्यापक झड़पों में चार लोगों की मौत के एक दिन बाद हुआ है. सरकार ने भीड़ की हिंसा के लिए वांगचुक को जिम्मेदार ठहराया है. आदेश में कहा गया है कि वांगचुक के नेतृत्व वाले संगठन को सांस्कृतिक और शैक्षणिक कार्यक्रम चलाने के लिए विदेशी योगदान स्वीकार करने का लाइसेंस दिया गया था.

एसईसीएमओएल के अलावा, वांगचुक ने हिमालयन इंस्टीट्यूट ऑफ अल्टरनेटिव्स लद्दाख (एचआईएएल) की भी स्थापना की थी, जो कथित विदेशी अंशदान (विनियमन) अधिनियम (एफसीआरए) के उल्लंघन से संबंधित सीबीआई जांच का सामना कर रहा है. गृह मंत्रालय ने इससे पहले एसईसीएमओएल को कारण बताओ नोटिस जारी कर संगठन के लेनदेन में पाई गई विभिन्न अनियमितताओं पर स्पष्टीकरण मांगा था.

आरोप लगाया गया कि वित्तीय वर्ष 2021-22 के दौरान वांगचुक ने अधिनियम की धारा 17 का उल्लंघन करते हुए एसोसिएशन के एफसीआरए खाते में 3.5 लाख रुपये जमा किए. एसईसीएमओएल द्वारा दिए गए स्पष्टीकरण के अनुसार, यह एफसीआरए निधि से 14 जुलाई 2015 को खरीदी गई पुरानी बस की बिक्री से प्राप्त रकम थी. इसमें कहा गया है कि दिशानिर्देशों के अनुसार, एफसीआरए के कोष से प्राप्त किसी भी परिसंपत्ति की बिक्री से प्राप्त राशि को केवल एफसीआरए के खाते में ही जमा किया जाना चाहिए.

मंत्रालय ने कहा कि यह राशि अधिनियम की धारा 17 का उल्लंघन करते हुए नकद प्राप्त की गई है, जिसका संगठन ने अपने जवाब में उचित रूप से खुलासा नहीं किया है. बयान में कहा गया है, “इसके अलावा, एसोसिएशन द्वारा सोनम वांगचुक से एफसी दान के रूप में 3.35 लाख रुपये की राशि की जानकारी दी गई है. हालांकि, यह लेनदेन एफसीआरए खाते में नहीं दिखाया गया है, जो अधिनियम की धारा 18 का उल्लंघन है.” मंत्रालय ने संगठन के एफसीआरए खातों में 54,600 रुपये की स्थानीय निधियों के अंतरण पर भी रोक लगा दी, जिसके बारे में संगठन ने दावा किया कि यह एक गलती थी.

विभिन्न कार्यशालाओं और प्रशिक्षणों के माध्यम से प्रवासन, जलवायु परिवर्तन, ग्लोबल वार्मिंग, खाद्य सुरक्षा और संप्रभुता तथा जैविक खेती जैसे मुद्दों पर युवाओं के बीच जागरूकता पैदा करने के लिए स्वीडन से लगभग 4.93 लाख रुपये का विदेशी योगदान भी मंत्रालय की जांच के दायरे में है. एसईसीएमओएल के इस तर्क को खारिज करते हुए कि धनराशि का उपयोग संगठन के उद्देश्यों के अनुरूप केवल शैक्षिक उद्देश्यों के लिए किया गया था, मंत्रालय ने कहा है कि विदेशी योगदान को राष्ट्र की संप्रभुता पर अध्ययन के लिए स्वीकार नहीं किया जा सकता क्योंकि यह “राष्ट्रीय हितों” के विरुद्ध है.

संगठन के खातों में कई अन्य विसंगतियों का हवाला देते हुए गृह मंत्रालय ने बृहस्पतिवार को जारी अपने आदेश में कहा कि वह एफसीआरए की धारा 14 के तहत अपनी शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए संगठन को दिए गए लाइसेंस को तत्काल प्रभाव से रद्द करता है. इससे पहले दिन में वांगचुक ने आरोप लगाया था कि सरकार उन्हें जेल में डालने के लिए उनके खिलाफ मामला बना रही है.

लद्दाख हिंसा : सोनम वांगचुक ने कहा – मुझे जेल में डालने से समस्याएं और ब­ढ़ सकती हैं

जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने बृहस्पतिवार को कहा कि उनका जेल में रहना सरकार के लिए उनकी आजादी से ज्यादा समस्याएं पैदा कर सकता है. वांगचुक ने लद्दाख में हाल ही में हुए हिंसक विरोध प्रदर्शनों के लिए गृह मंत्रालय द्वारा उन्हें जिम्मेदार ठहराए जाने को ”बलि का बकरा बनाने की रणनीति” बताया. गृह मंत्रालय के उस बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए वांगचुक ने कहा कि वह कड़े जन सुरक्षा अधिनियम (पीएसए) के तहत गिरफ्तारी के लिए तैयार हैं.

उन्होंने ‘पीटीआई-भाषा’ को फोन पर बताया, ”मैं देख रहा हूं कि वे कुछ ऐसा मामला बना रहे हैं ताकि मुझे जन सुरक्षा अधिनियम के तहत गिरफ्तार करके दो साल के लिए जेल में डाल सकें. मैं इसके लिए तैयार हूं, लेकिन सोनम वांगचुक को आजाद रखने के बजाय जेल में डालने से समस्याएं और ब­ढ़ सकती हैं.” जलवायु कार्यकर्ता ने कहा, ”ये कहना कि यह (हिंसा) मेरे या कांग्रेस द्वारा भड़काई गई थी, समस्या के मूल से निपटने के बजाय बलि का बकरा ढूं­ढ़ने जैसा है, और इससे कोई हल नहीं निकलेगा.”

वांगचुक ने कहा, ”वे किसी को बलि का बकरा बनाने के लिए चालाक हो सकते हैं, लेकिन वे बुद्धिमान नहीं हैं. इस समय, हम सभी को ‘चतुराई’ की बजाय बुद्धिमत्ता की आवश्यकता है क्योंकि युवा पहले से ही निराश हैं.” जलवायु कार्यकर्ता ने हिंसा भड़कने के लिए लंबे समय से चली आ रही शिकायतों, खासकर क्षेत्र के युवाओं में व्याप्त हताशा को जिम्मेदार ठहराया और तर्क दिया कि असली वजह ”छह साल की बेरोजगारी और हर स्तर पर अधूरे वादों की हताशा” है.

उन्होंने सरकार पर नौकरी में आरक्षण पर सफलता का दावा करके जनता को गुमराह करने का आरोप लगाया तथा कहा कि राज्य का दर्जा एवं लद्दाख के आदिवासी दर्जे और पर्यावरण की रक्षा के लिए छठी अनुसूची के विस्तार की मुख्य मांगों पर पांच साल की शांतिपूर्ण अपीलों के बाद भी गौर नहीं किया गया हैं.

वांगचुक ने कहा कि ”बलि का बकरा” बनाने की रणनीति अपनाकर सरकार ”वास्तव में शांति के उपाय नहीं कर रही है,” बल्कि ऐसे कदम उठा रही है जो लोगों की मूल मांगों से ध्यान भटकाकर स्थिति को ”और बिगाड़” देंगे. अधिकारियों के मुताबिक, वांगचुक के नेतृत्व में लद्दाख राज्य का आंदोलन बुधवार को लेह में हिंसा, आगजनी और हिंसा में बदल गया, जिसमें चार लोगों की मौत हो गई और 40 पुलिसर्किमयों सहित कम से कम 80 लोग घायल हो गए. केंद्रीय गृह मंत्रालय ने बुधवार रात एक बयान में आरोप लगाया था कि कार्यकर्ता सोनम वांगचुक और ”राजनीति से प्रेरित” कुछ ऐसे लोग, जो सरकार और लद्दाखी समूहों के प्रतिनिधियों के बीच बातचीत में हुई प्रगति से खुश नहीं हैं , उनके ”भड़काऊ बयानों” की वजह से भीड़ हिंसक हो गई.

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