Friday, September 25, 2026
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राजोआना को अब तक फांसी क्यों नहीं दी गई: उच्चतम न्यायालय

नयी दिल्ली. उच्चतम न्यायालय ने बुधवार को पूछा कि 1995 में पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह की हत्या के लिए गए मौत की सजा पाए बलवंत सिंह राजोआना को अब तक फांसी क्यों नहीं दी गई, जबकि केंद्र ने कहा था कि यह एक ”गंभीर अपराध” है. राजोआना पिछले 29 वर्षों से जेल में बंद है, जिसमें से 15 वर्ष उसने मृत्युदंड की सजा काटी है.

अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल के. एम. नटराज ने न्यायमूर्ति विक्रम नाथ, न्यायमूर्ति संदीप मेहता और न्यायमूर्ति एन. वी. अंजारिया को अपराध की गंभीरता से अवगत कराया. पीठ ने नटराज से पूछा, “आपने अब तक उसे फांसी क्यों नहीं दी? इसके लिए कौन जिम्मेदार है? कम से कम हमने तो फांसी पर रोक नहीं लगाई है.” शीर्ष अदालत राजोआना की दया याचिका पर फैसले में देरी के आधार पर उसकी मौत की सजा को आजीवन कारावास में बदलने की याचिका पर सुनवाई कर रही है.

राजोआना की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने कहा कि उनके मुवक्किल की दया याचिका पर कोई फैसला नहीं हुआ है.
नटराज ने कहा कि वह निर्देश लेंगे और पीठ को स्थिति से अवगत कराएंगे. रोहतगी ने कहा, ”कोई नहीं जानता कि क्या हो रहा है.” उन्होंने कहा कि शीर्ष अदालत ने पहले कहा था कि दया याचिका पर समय पर फैसला किया जाना चाहिए. उन्होंने कहा कि शीर्ष अदालत ने पाया है कि राजोआना ने खुद दया याचिका दायर नहीं की थी, बल्कि यह एक गुरुद्वारा समिति की ओर से दायर की गई है.

पीठ ने मामले की सुनवाई 15 अक्टूबर के लिए स्थगित कर दी और कहा कि केंद्र के अनुरोध पर मामले को स्थगित नहीं किया जाएगा.
पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री और 16 अन्य लोगों की 31 अगस्त, 1995 को चंडीग­ढ़ में स्थित प्रशासनिक सचिवालय के प्रवेश द्वार पर हुए विस्फोट में मौत हो गई थी. एक विशेष अदालत ने जुलाई, 2007 में राजोआना को मौत की सजा सुनाई थी.

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