Friday, September 25, 2026
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छत्तीसगढ़ : किसानों से राजनीतिक दलों के वादे ने धान बेचने की गति पर असर डाला, खरीद धीमी

रायपुर. छत्तीसगढ़ की मुख्य फसल धान को लेकर किसानों से राजनीतिक दलों के चुनावी वादों और त्यौहार का असर यहां जारी धान खरीदी में हुआ है. राज्य में न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर धान खरीदी शुरू होने के करीब एक महीने बाद किसानों से लगभग 13.21 लाख मीट्रिक टन धान खरीदा गया है जो पिछले वर्ष खरीदी गई मात्रा से कम है.

राज्य के राजनीतिक जानकारों के मुताबिक, चुनाव प्रचार में राजनीतिक दलों द्वारा अधिक कीमत पर धान खरीदी का वादा, त्यौहार और धान में नमी ने राज्य में धान बेचने की गति को प्रभावित किया है. राज्य के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, राज्य में एक नवंबर से किसानों से धान खरीदी शुरू होने के बाद से मंगलवार तक 3,17,223 किसानों से 13,20,457.80 मीट्रिक टन धान खरीदा गया है.

उन्होंने बताया कि पिछले खरीफ मौसम (2022-23) में 5.42 लाख किसानों ने इसी अवधि (एक नवंबर से 29 नवंबर) के दौरान 19.30 लाख मीट्रिक टन धान बेचा था. राज्य सरकार ने चालू मौसम के दौरान 130 लाख मीट्रिक टन धान खरीदने का लक्ष्य रखा है.
एक सरकारी अधिकारी ने बुधवार को बताया कि किसानों से धान खरीदी के लिए 2739 खरीद केंद्र स्थापित किए गए हैं. खरीद अभियान एक नवंबर को शुरू हुआ है तथा अगले वर्ष 31 जनवरी तक जारी रहेगा.

उन्होंने बताया, ”लगभग 26.87 लाख किसानों ने अपनी उपज बेचने के लिए पंजीकरण कराया है.” मौजूदा कांग्रेस सरकार केंद्र द्वारा निर्धारित न्यूनतम समर्थन मूल्य पर धान की खरीद कर रही है और धान किसानों को प्रति एकड़ नौ हजार रुपए ‘इनपुट सब्सिडी’ दे रही है. राज्य सरकार ने चालू खरीफ मौसम के लिए खरीद की सीमा 15 क्विंटल प्रति एकड़ से बढ़ाकर 20 क्विंटल प्रति एकड़ कर दी थी. इस निर्णय को पार्टी के चुनावी घोषणापत्र में भी शामिल किया गया है. कांग्रेस ने यह भी वादा किया है कि यदि वह राज्य में सत्ता बरकरार रखती है, तो किसानों को प्रति क्विंटल 3,200 रुपये मिलेंगे.

पार्टी ने किसानों को लुभाने के लिए ऋण माफी का भी वादा किया है. पार्टी ने इससे पहले 2018 के चुनाव में भी किसानों से ऋण माफी का वादा किया था. माना जाता है कि इसका असर चुनाव में हुआ था. भारतीय जनता पार्टी ने वादा किया है कि अगर वह राज्य में सत्ता में आई तो ‘कृषि उन्नति योजना’ शुरू की जाएगी, जिसके तहत किसानों से 3,100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से 21 क्विंटल प्रति एकड़ धान खरीदा जाएगा. दोनों प्रमुख दलों ने यह स्पष्ट नहीं किया है कि धान की ऊंची कीमत फसल खरीद के किस मौसम से दी जाएगी.

90 सदस्यीय राज्य विधानसभा के लिए दो चरणों में सात और 17 नवंबर को मतदान हुआ है. वोटों की गिनती तीन दिसंबर को होगी.
राज्य के किसान मानते हैं कि राजनीतिक दलों के वादों का असर धान खरीद पर हो रहा है. दुर्ग जिले के पाटन विधानसभा क्षेत्र के सावनी गांव के किसान लीलाराम चंद्राकर ने कहा कि उनके क्षेत्र के अधिकतर किसानों ने अपना धान नहीं बेचा है और इसका मुख्य कारण यह है कि वे नई सरकार के गठन का इंतजार कर रहे हैं.

चंद्राकर ने कहा, ”भाजपा ने प्रति एकड़ 21 क्विंटल धान 3100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से खरीदने का वादा किया है. पार्टी ने यह भी वादा किया है कि धान खरीद के लिए भुगतान एक बार में किया जाएगा, जबकि मौजूदा कांग्रेस सरकार चार किस्तों में एमएसपी पर ‘इनपुट सब्सिडी’ देती है. इसलिए किसान तीन दिसंबर तक इंतजार कर रहे हैं, जब चुनाव परिणाम आएंगे.” चंद्राकर 18 एकड़ जमीन पर धान की खेती करते हैं और उन्होंने अभी तक अपनी उपज नहीं बेची है.

उन्होंने कहा, ”खरीद केंद्र (खरीद केंद्र) गांव में ही है. इस बार फसल कटाई में देरी भी हुई और धान में नमी अधिक है. 17 प्रतिशत तक नमी वाला धान खरीद केंद्रों में स्वीकार्य है. एक कारण यह भी है कि किसान धान नहीं बेच रहे हैं.” इसी तरह के विचार व्यक्त करते हुए दुर्ग जिले के रौता गांव के किसान भीखम पटेल ने कहा, ”चुनावी वादों के अलावा, नवंबर में दिवाली सहित अन्य त्योहारों ने भी धान खरीद को प्रभावित किया है, क्योंकि किसान त्योहार में व्यस्त थे.” पटेल 26 एकड़ भूमि में धान की खेती करते हैं और अब तक उन्होंने 7.50 एकड़ में उगाई गई अपनी उपज बेच दी है.

उन्होंने यह भी कहा कि किसान यह सोचकर दुविधा में हैं कि यदि भाजपा जीतती है तब प्रति एकड़ 21 क्विंटल धान खरीदा जाएगा और अगर वे चुनाव नतीजों से पहले अपना धान 20 क्विंटल प्रति एकड़ की सीमा पर बेचेंगे तो उन्हें नुकसान होगा. राजनीतिक विशेषज्ञ आर कृष्ण दास ने कहा, ”धान खरीद की धीमी गति की ऐसी ही स्थिति 2018 के चुनावों के दौरान देखी गई थी जब कांग्रेस ने 2,500 रुपये में धान खरीदा और कर्ज माफी का वादा किया था. इस बार भी किसानों को चुनाव नतीजों का इंतजार है.” उन्होंने कहा, ”राजनीतिक दलों ने अपने घोषणापत्र में यह उल्लेख नहीं किया है कि धान खरीद के बदले अधिक कीमत किस खरीफ सीजन से दी जाएगी.”

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