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रिहाई को जीत समझना पड़ा महंगा, सतना में जुलूस निकालने पर पुलिस का बड़ा एक्शन

सतना

जेल से रिहाई के बाद गैंगस्टर अंदाज में सड़क पर शक्ति प्रदर्शन करना मान सिंह उर्फ बेटू सिंगरौल और उसके साथियों को भारी पड़ गया।
पुलिस ने आरोपियों का शहर में जुलूस निकाला

सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने और सार्वजनिक रूप से कानून-व्यवस्था को चुनौती देने वाले इस प्रदर्शन के बाद कोलगवां पुलिस ने आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। इसके बाद पुलिस ने आरोपियों का शहर में जुलूस निकाला।

अपनी गलती का एहसास कराया

आरोपियों को अपनी गलती का एहसास कराते हुए यह कहलवाया गया कि अब वे किसी को डराने-धमकाने के लिए जुलूस नहीं निकालेंगे। कार्रवाई सीएसपी मनीष त्रिपाठी के नेतृत्व में टीआई सुदीप सोनी की अगुआई वाली पुलिस टीम ने की।
समर्थकों ने फूल-मालाओं से स्वागत किया

16 वर्षीय सत्यम शुक्ला हत्याकांड के आरोपी 23 वर्षीय मान सिंह उर्फ बेटू सिंगरौल को करीब 14 महीने जेल में रहने के बाद मंगलवार को न्यायालय से जमानत मिली थी। जेल से बाहर आते ही समर्थकों ने फूल-मालाओं से उसका स्वागत किया।

काफिले के साथ शहर में शक्ति प्रदर्शन किया

बाइक रैली और चारपहिया वाहनों के काफिले के साथ शहर में शक्ति प्रदर्शन किया गया। काफिला बिरला रोड से होते हुए सिद्धार्थ कॉलोनी तक पहुंचा। इस दौरान बेटू बोलेरो के बोनट पर बैठकर सिगरेट पीता नजर आया। इसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे थे।

बीच-बचाव करने पर सत्यम को मार दी थी गोली

मामला 4 सितंबर 2025 का है। कोलगवां थाना क्षेत्र के एफसीआई गोदाम के पास सूर्यप्रताप सिंह एक दुकान पर चाय पीने रुका था। इसी दौरान बेटू सिंगरौल अपने साथियों के साथ वहां पहुंचा। मोबाइल छीनने और वापस मांगने को लेकर विवाद शुरू हुआ।
गंभीर रूप से घायल सत्यम की मौत हो गई थी

आरोप है कि सूर्यप्रताप पर गोली चलाने की कोशिश के दौरान 16 वर्षीय सत्यम शुक्ला ने बीच-बचाव किया और आरोपियों को कट्टा अलग रखने के लिए कहा। इसी बात पर विवाद बढ़ गया और सत्यम के सीने में गोली मार दी गई। गंभीर रूप से घायल सत्यम की मौत हो गई थी। मामले में चार आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था।

बोनट पर बैठकर सिगरेट पीने के अंदाज में शक्ति प्रदर्शन

न्यायालय से जमानत मिलना किसी आरोपी का कानूनी अधिकार है, लेकिन इसे अपराध से दोषमुक्ति नहीं माना जा सकता। इसके बावजूद रिहाई के बाद जिस तरह बाइक रैली, वाहनों के काफिले और बोनट पर बैठकर सिगरेट पीने के अंदाज में शक्ति प्रदर्शन किया गया, उसने शहर में कानून के प्रति जवाबदेही को लेकर बहस छेड़ दी थी। पुलिस की कार्रवाई के बाद अब आरोपियों का जुलूस चर्चा में है। संदेश साफ है कि जमानत मिलने का मतलब कानून और यातायात नियमों से ऊपर हो जाना नहीं है।

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