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कुर्सी छोड़ किसानों के बीच पहुंचे रायसेन कलेक्टर, खेती-किसानी पर खुलकर हुई चर्चा

रायसेन 
किसानों की समस्याओं को करीब से समझने और खेती-किसानी की जमीनी हकीकत जानने के लिए कलेक्टर रोहित सिसोनिया बुधवार को ग्रामीण क्षेत्रों के दौरे पर रहे। इस दौरान उनका एक अलग अंदाज देखने को मिला, जब वे ग्राम नकतरा में कृषि विज्ञान केंद्र परिसर में किसानों के बीच जमीन पर बैठकर उनसे खेती-किसानी के मुद्दों पर चर्चा करते नजर आए।

उन्होंने किसानों से खेती में आ रही परेशानियों, कृषि तकनीकों, उत्पादन बढ़ाने के उपायों और आमदनी बढ़ाने की संभावनाओं पर खुलकर बातचीत की।

कलेक्टर का सहज और आत्मीय अंदाज देखकर किसान भी उत्साहित नजर आए। उन्होंने बिना किसी संकोच के अपनी समस्याएं और सुझाव साझा किए।

किसानों की समस्याएं समझीं
कलेक्टर ने कृषि विज्ञान केंद्र नकतरा की नर्सरी का अवलोकन कर कृषि वैज्ञानिकों से विभिन्न फसलों की उन्नत किस्मों और नर्सरी तैयार करने की तकनीक की जानकारी ली। इसके बाद किसानों के बीच बैठकर उनकी बात सुनी और बेहतर कृषि पद्धतियों, फसल विविधीकरण तथा आधुनिक तकनीकों को अपनाने पर जोर दिया।

उन्होंने कृषि वैज्ञानिकों को निर्देश दिए कि किसानों को उन्नत खेती के तरीकों की जानकारी देकर उनकी आय बढ़ाने के लिए लगातार मार्गदर्शन उपलब्ध कराया जाए।

बिजली आपूर्ति पर फोकस
कलेक्टर ने ग्राम हिनोतिया महलपुर पहुंचकर किसानों से संवाद किया। यहां किसानों ने बिजली की समस्या से उन्हें अवगत कराया, जिस पर कलेक्टर ने तत्काल विद्युत वितरण कंपनी के अधिकारी को फोन कर समस्या का शीघ्र निराकरण करने के निर्देश दिए।

उन्होंने स्पष्ट कहा कि किसानों को कृषि कार्यों के लिए जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराने में किसी तरह की लापरवाही नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कृषक भगवान सिगोरिया के बायो रिसर्च सेंटर का निरीक्षण कर वहां हो रहे कृषि नवाचारों और गतिविधियों की जानकारी ली। साथ ही गांव में खाद गोदाम निर्माण के लिए उपयुक्त स्थल को लेकर भी चर्चा की।

खाद वितरण की व्यवस्था देखी
वहीं, रायसेन में एमपी स्टेट एग्रो के खाद गोदाम का निरीक्षण कर कलेक्टर ने खाद की उपलब्धता और वितरण व्यवस्था का जायजा लिया। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि किसानों को व्यवस्थित तरीके से खाद उपलब्ध कराया जाए, ताकि उन्हें अनावश्यक परेशानियों का सामना न करना पड़े।

इस दौरान किसानों से चर्चा करते हुए उन्होंने फसल कटाई के बाद पराली नहीं जलाने की समझाइश दी और इसके स्थान पर पर्यावरण के अनुकूल वैकल्पिक उपाय अपनाने की अपील की।

 

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