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उदंती में 3500 पेड़ों पर संकट, उन्हें बचाने बेंगलुरु से आए ट्री डॉक्टर ने लगाया मरहम

 गरियाबंद

 सुखाने की साजिश का शिकार बने पेड़ों को स्वस्थ करने में महीनों और सालों तक देखभाल की जरूरत पड़ सकती है। इसी चुनौती के बीच कर्नाटक के बेंगलुरु से आए ट्री डॉक्टर विजय निशांत ने गरियाबंद के उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में करका के जंगलों में लगातार 8 दिन तक रहकर गर्डलिंग से प्रभावित पेड़ों के उपचार का काम किया। उनका प्रयास उन पेड़ों को बचाना है, जिनके तनों को चारों तरफ से काटकर (गर्डलिंग कर) उन्हें सूखने के लिए छोड़ दिया गया था।

वन विभाग ने ऐसे करीब 3500 पेड़ों को चिन्हांकित किया है। अब इन पेड़ों को बचाने के लिए उपचार के साथ-साथ स्थानीय वनकर्मियों को भी प्रशिक्षित किया जा रहा है।

नहीं पहुंचता है भोजन

करका क्षेत्र के जंगलों में पेड़ों को नुकसान पहुंचाने का मामला वन संरक्षण के लिए बड़ी चुनौती बनकर सामने आया है। गर्डलिंग में पेड़ के तने के चारों ओर की छाल को गहराई तक काट दिया जाता है। इससे पेड़ के भीतर भोजन पहुंचाने की प्रक्रिया प्रभावित होती है और पेड़ धीरे-धीरे सूखने लगता है। ऐसे पेड़ों को बचाने के लिए समय पर उपचार और लगातार निगरानी जरूरी होती है। ट्री डॉक्टर विजय निशांत इसी काम में जुटे हैं। उनका प्रयास है कि जिन पेड़ों को बचाया जा सकता है, उन्हें दोबारा स्वस्थ होने का मौका मिले और जंगल की हरियाली बनी रहे।

यह त्रासदी है, आने वाली पीढ़ियों के लिए क्या बचेगा

ट्री डॉक्टर विजय निशांत ने कहा कि इतने सारे पेड़ों की कटाई और उन्हें इस तरह नुकसान पहुंचाना एक बहुत बड़ी त्रासदी जैसी लग रही है। अगर जंगलों को इसी तरह काटा गया, तो आने वाली पीढ़ियों के लिए हम कुछ भी नहीं छोड़ पाएंगे। उन्होंने कहा कि उनका पूरा प्रयास रहेगा कि ज्यादा से ज्यादा पेड़ों की जान बचा सकें और उन्हें फिर से जीवित कर सकें। पेड़ों को नुकसान पहुंचाना आसान है, लेकिन उन्हें दोबारा स्वस्थ करने में समय और लगातार देखभाल की जरूरत होती है।

एक फोन आया, दो घंटे में टिकट बुक और पहुंच गए ट्री डॉक्टर

करका के जंगलों में गर्डलिंग से प्रभावित हजारों पेड़ों को बचाने की कोशिश के पीछे एक फोन कॉल की अहम भूमिका रही। उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व के उपनिदेशक वरुण जैन ने जब पेड़ों की गंभीर स्थिति को लेकर डॉक्टर विजय निशांत से संपर्क किया, तो उन्होंने देर नहीं की। जानकारी के मुताबिक, वरुण जैन का फोन आने के करीब दो घंटे के भीतर विजय निशांत ने फ्लाइट टिकट बुक करा लिया और पेड़ों के उपचार के लिए छत्तीसगढ़ पहुंचने की तैयारी कर ली। इसके बाद वे गरियाबंद के जंगलों में पहुंचे और प्रभावित पेड़ों को बचाने के काम में जुट गए।

एक दशक में काटे गए सवा लाख पेड़

उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व के उपनिदेशक वरुण जैन ने बताया कि सैटेलाइट से मिली जानकारी के अनुसार, करका क्षेत्र में पिछले एक दशक के दौरान सवा लाख से अधिक पेड़ों को काटा जा चुका है। बड़ी संख्या में पेड़ों को काटने के बाद भी छोड़ दिया गया है। उन्होंने कहा कि कट चुके पेड़ों को वापस नहीं लाया जा सकता, लेकिन जो पेड़ अभी मरने की कगार पर हैं, उनका उपचार करने का प्रयास किया जा रहा है, ताकि वे फिर से स्वस्थ हो सकें और जंगल में हरियाली बनी रहे।

उपचार किया और प्रशिक्षित भी किया

वन विभाग के सेवानिवृत्त एसडीओ गोपाल सिंह राजपूत ने बताया कि डॉक्टर विजय निशांत उनकी टीम के करीब 50 लोगों को पेड़ों के उपचार की ट्रेनिंग दे रहे हैं। इसका उद्देश्य यह है कि स्थानीय वनकर्मी भी गर्डलिंग से प्रभावित पेड़ों की पहचान और उनका उपचार करना सीख सकें। इससे विजय निशांत के लौटने के बाद भी पेड़ों की देखभाल और उपचार का काम जारी रखा जा सकेगा।

वन संरक्षण की क्षमता होगी विकसित

करका के जंगलों में शुरू हुई यह मुहिम सिर्फ पेड़ों का इलाज करने तक सीमित नहीं है, बल्कि वन संरक्षण के लिए स्थानीय स्तर पर क्षमता विकसित करने की कोशिश भी है। पुराने पेड़ों को दोबारा बड़ा होने में कई दशक लग सकते हैं। ऐसे में प्रभावित पेड़ों को बचाना जंगल के भविष्य के लिए महत्वपूर्ण है। अब चुनौती यह है कि उपचार के बाद भी उनकी नियमित निगरानी की जाए और प्रशिक्षित वनकर्मी इस काम को लगातार आगे बढ़ाएं।

 

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