स्वयं के जामवंत खुद बनें युवा – कुलगुरु डॉ. दिवाकर सिंह राजपूत
'भारतीय युवा ‘जेन ज़ेड’ नहीं बल्कि ‘जेन बी’ (जनरेशन फॉर विकसित भारत) हैं' : डॉ. शिवेश प्रताप सिंह
युवाओं को मिला नया मंत्र: खुद बनें अपने जामवंत, ‘Gen B’ से विकसित भारत का संकल्प
ग्वालियर
जीवाजी विश्वविद्यालय में आयोजित विश्वविद्यालय स्तरीय राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस) नेतृत्व एवं प्रशिक्षण शिविर के षष्ठम दिवस पर स्वयंसेवकों को युवाओं की भूमिका, भारतीय सभ्यता, मानवीय मूल्यों तथा कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के सामाजिक प्रभावों पर केंद्रित बौद्धिक सत्र का आयोजन किया गया। षष्ठम दिवस की शुरुआत प्रभात फेरी, योग-पीटी तथा परिसर में स्वच्छता अभियान से हुई तथा बौद्धिक सत्र कि शुरुवात माँ सरस्वती देवी और प्रेरणा पुरुष स्वामी विवेकानंद जी के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित के साथ हुई। तत्पश्चात कार्यक्रम समन्वयक डॉ हरिशंकर सिंह कंसाना जी द्वारा प्रतिवेदन वाचन किया गया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि माननीय कुलगुरु माननीय डॉ. दिवाकर सिंह राजपूत जी ने रामायण के प्रसंग का स्मरण कराते हुए कहा कि जिस प्रकार जाम्बवंत जी ने हनुमान जी को उनकी शक्ति का बोध कराया था, उसी प्रकार आज के युवाओं को भी अपनी क्षमताओं को पहचानकर स्वयं का जाम्बवंत बनना होगा। उन्होंने कहा कि एनएसएस युवाओं को ‘मैं नहीं, हम’ की भावना से सेवा और राष्ट्रहित के लिए कार्य करने की प्रेरणा देता है।
कुलगुरु ने ‘विकसित’ शब्द की प्रेरक व्याख्या करते हुए विमर्श, कर्तव्यपरायणता, सिद्धि और तरंग को विकसित भारत की दिशा में महत्वपूर्ण बताया।
मुख्य वक्ता डॉ. शिवेश प्रताप सिंह, सीनियर रिसर्च फेलो, डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी रिसर्च फाउंडेशन, नई दिल्ली ने कहा कि भारतीय युवा केवल ‘Gen Z’ नहीं, बल्कि ‘Gen B – Generation for Viksit Bharat’ हैं। उन्होंने AI के बढ़ते प्रभाव के बीच मानवीय मूल्यों की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि विकसित भारत की नींव तकनीकी प्रगति के साथ-साथ मानवीय संवेदना, सामाजिक समरसता और पारिवारिक मूल्यों पर आधारित होनी चाहिए।
उन्होंने युवाओं से विभाजनकारी प्रवृत्तियों से दूर रहकर एकजुट समाज और सशक्त राष्ट्र के निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया।
माननीय कुलगुरु डॉ. दिवाकर सिंह राजपूत जी और डॉ. शिवेश प्रताप सिंह जी के हाथों से सभी स्वयंसेवकों, जिला संगठकों, कार्यक्रम अधिकारियों, और कार्यक्रम समन्वयक जी को मेडल पहनाकर सम्मानित किया।अंत में शिविर संचालक एवं कार्यक्रम समन्वयक डॉ. हरिशंकर सिंह कंसाना ने स्मृति चिह्न भेंट किया। शिविर संचालक एवं राष्ट्रीय सेवा योजना, जीवाजी विश्वविद्यालय के कार्यक्रम समन्वयक डॉ. हरिशंकर सिंह कंसाना के निर्देशन में आयोजित बौद्धिक सत्र का मंच संचालन प्रो. मुदिता मिश्रा ने किया।
कार्यक्रम के दौरान डॉ. संजय कुमार पांडे, प्रो. हिंदू सिंह धाकड़, डॉ. नरेंद्र कुमार वर्मा, डॉ अर्चना सेन, प्रो. विनोद सिंह कुशवाह, डॉ. गिरजा नरवरिया, प्रो. दीक्षा त्यागी एवं प्रो. एच एल. पटेल उपस्थित रहें।कार्यक्रम के अंत में प्रो. डॉ. मनोज अवस्थी ने अतिथियों एवं सभी सहभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया।


