वाशिंगटन
अमेरिका और चीन के बीच करीब 30 अरब डॉलर के सामान पर टैरिफ लगाने को लेकर सहमति बन गई है। दोनों देश आगे की आर्थिक बातचीत के लिए एक ट्रेड काउंसिल भी बनाएंगे। यह फैसला चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के तीन दिन के अमेरिका दौरे और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मुलाकात के बाद हुआ। शी का यह दौरा 2015 के बाद वाशिंगटन का पहला दौरा था। वाइट हाउस के अनुसार, इस समझौते में अमेरिका से चीन जाने वाले सामान शामिल हैं। इनमें खेती का सामान, लकड़ी और कॉस्मेटिक्स हैं। चीन के छोटे उपकरण, खिलौने और सजावट के सामान पर भी बेहतर टैरिफ मिलेगा।
चीन के विदेश मंत्रालय ने कहा कि दोनों देश कुआलालंपुर में हुई पिछली बातचीत को आगे बढ़ाएंगे और व्यापार पर चर्चा जारी रखेंगे। यह समझौता मौजूदा ट्रेड डील को दो महीने बढ़ाने के बाद आया है। अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने कहा कि इससे बड़े समझौते पर काम करने का समय मिलेगा।
वाइट हाउस में लंबी मुलाकात और डिनर
ट्रंप और शी ने गुरुवार को वाइट हाउस में कई घंटे बात की। इसके बाद दोनों ने सरकारी अधिकारियों और बिजनेस लीडर्स के साथ डिनर किया। इसमें अल्फाबेट के सुंदर पिचाई, माइक्रोसॉफ्ट के सत्या नडेला, एनवीडिया के जेन्सेन हुआंग और ओपनएआई के सैम ऑल्टमैन भी शामिल थे। दोनों नेताओं ने स्थिरता और सहयोग पर जोर दिया। शी ने कहा कि दोनों देशों को एक-दूसरे के फायदे वाला सहयोग बढ़ाना चाहिए और प्रतिस्पर्धा को सीमा में रखना चाहिए।
एआई पर भी बात होगी
व्यापार के साथ-साथ दोनों देश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पर भी बातचीत शुरू करने पर राजी हुए। इसमें मौकों और जोखिम दोनों पर चर्चा होगी। नवंबर में एआई पर एक और दौर होने की उम्मीद है। अधिकारी एआई से जुड़ी घटनाओं पर बात करने का एक चैनल भी बनाएंगे। वाइट हाउस के अनुसार, दोनों नेता इस बैठक में 'आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस' की जगह 'सुपर इंटेलिजेंस' शब्द इस्तेमाल करने पर सहमत हुए। चीन ने इस शब्द का स्वागत किया और और बातचीत की अपील की।
अन्य समझौते भी हुए
शी के दौरे में सिर्फ व्यापार और एआई ही नहीं थे। दोनों देश एशिया-पैसिफिक आर्थिक सहयोग और जी-20 समिट जैसी बड़ी बैठकें आयोजित करने में एक-दूसरे की मदद करेंगे। ट्रंप और शी एक-दूसरे के देश में होने वाली बैठकों में शामिल होने की योजना बना रहे हैं। उन्होंने यह भी तय किया कि अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों पर अलग-अलग देशों या संस्थाओं द्वारा लगाए गए ट्रांजिट टोल नहीं होने चाहिए।
क्या है टैरिफ विवाद?
अमेरिका-चीन टैरिफ विवाद दोनों बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच लंबे व्यापार तनाव से जुड़ा है। अमेरिका ने चीन के साथ व्यापार घाटा, व्यापार के तरीके और बौद्धिक संपदा के मुद्दों को टैरिफ लगाने की वजह बताया था। अमेरिका ने 2018 में चीनी सामान पर कई टैरिफ लगाना शुरू किया था। इसके बाद चीन ने अमेरिकी सामान पर जवाबी टैरिफ लगाए। बीजिंग ने अमेरिकी कदमों को एकतरफा और नियमों के खिलाफ बताया। चीन ने कुछ रेयर अर्थ एलिमेंट पर निर्यात नियंत्रण और कुछ अमेरिकी कंपनियों पर रोक भी लगाई।
इसके बाद दोनों तरफ टैरिफ बढ़ाने के कई दौर चले। चीन अमेरिका को आयात से ज्यादा निर्यात करता है, इसलिए उसके पास टैरिफ लगाने के लिए कम सामान थे। इसलिए उसने निर्यात नियंत्रण जैसे अन्य तरीके भी अपनाए। 2025 में भी यह सिलसिला चला। चीन ने अमेरिकी कदमों को धमकी और दबाव बताया था।


