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वन्यप्राणियों की सुरक्षा के लिए सख्ती, छत्तीसगढ़ के जंगलों में प्लास्टिक पर लगेगा जुर्माना

बिलासपुर.

वन्यप्राणियों की सुरक्षा और संरक्षण को देखते हुए वन मुख्यालय ने बड़ा निर्णय लिया है। एटीआर सहित प्रदेश के सभी वन मंडलों और संरक्षित क्षेत्रों में प्लास्टिक के इस्तेमाल और कचरे पर सख्ती से रोक लगाने के निर्देश जारी किए गए हैं।

अब यदि किसी सैलानी के पास प्रतिबंधित प्लास्टिक पाया जाता है या उसे जंगल में फेंकते हुए पकड़ा जाता है, तो उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई करते हुए 500 रुपए या उससे अधिक की प्रशमन राशि वसूल की जाएगी।

वन्यप्राणियों के संरक्षण के लिए सख्त होगी कार्रवाई
वन्यप्राणियों के संरक्षण और संवर्धन के लिए शासन स्तर पर करोड़ों रुपए खर्च किए जा रहे हैं। प्रदेश के सभी वन मंडलों, रेंज, डिवीजन, अचानकमार टाइगर रिजर्व सहित राष्ट्रीय उद्यान और अभयारण्यों को प्लास्टिक प्रदूषण से मुक्त करने के लिए कार्रवाई का दायरा बढ़ाया जा रहा है। संरक्षित क्षेत्रों में प्रतिबंधित प्लास्टिक मिलने पर केवल समझाइश देने के बजाय तलाशी, जब्ती, प्लास्टिक हटाने और नियमों के तहत प्रशमन राशि वसूलने की कार्रवाई की जाएगी। इसके लिए सर्किल फॉरेस्ट ऑफिसर और बीट फॉरेस्ट ऑफिसर स्तर तक के अधिकारियों को अधिकार देने के निर्देश जारी किए गए हैं। वन्यजीव प्रबंधन एवं जैव विविधता संरक्षण के प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं मुख्य वन्यजीव वार्डन कार्यालय की ओर से जारी निर्देश में कहा गया है कि संरक्षित क्षेत्रों में प्लास्टिक के उपयोग पर पहले से रोक के निर्देश हैं। इसके बावजूद प्लास्टिक के उपयोग और कचरे पर प्रभावी नियंत्रण नहीं हो पा रहा है। इसे देखते हुए अब छत्तीसगढ़ प्लास्टिक एवं अन्य जैव अनाशित सामग्री नियम, 2023 के प्रावधानों को सख्ती से लागू करने के निर्देश दिए गए हैं। राज्य के नियमों के तहत प्लास्टिक कैरी बैग, नॉन-वूवन पॉलीप्रोपलीन बैग, प्लास्टिक और थर्मोकोल से बने डिस्पोजेबल कप, प्लेट, गिलास, कटोरे, चम्मच और स्ट्रॉ समेत कई वस्तुएं प्रतिबंधित हैं।

टाइगर रिजर्व में भी सख्त प्रावधान लागू
अचानकमार टाइगर रिजर्व के अलावा प्रदेश के उदंती-सीतानदी, इंद्रावती और गुरु घासीदास-तमोर पिंगला टाइगर रिजर्व सहित राष्ट्रीय उद्यानों और अभयारण्यों के लिए भी निर्देश जारी किए गए हैं। जारी आदेश में स्पष्ट कहा गया है कि संबंधित क्षेत्रों के सर्किल और बीट फॉरेस्ट अधिकारियों को नियमों के तहत कार्रवाई के लिए अधिकृत एवं सशक्त किया जा सकता है।

500 से 1 लाख रुपए तक प्रशमन राशि
नियमों में अपराध की प्रकृति और संबंधित व्यक्ति के आधार पर प्रशमन राशि निर्धारित की गई है। पहली बार उल्लंघन करने पर व्यक्ति या स्ट्रीट वेंडर से 500 रुपए, दुकान या प्रतिष्ठान से 5 हजार रुपए और निर्माता से 1 लाख रुपए तक की राशि ली जा सकती है। दूसरी बार अपराध करने पर यह राशि क्रमशः 5 हजार, 50 हजार और 2 लाख रुपए होगी। इसके बाद के अपराधों को अशमनीय रखा गया है।
जुर्माने की राशि और अपराध के प्रशमन के रूप में प्राप्त राशि राज्य सरकार के संबंधित खाते में जमा की जाएगी। इस राशि का उपयोग पर्यावरण संरक्षण और पर्यावरण से जुड़ी विभिन्न कार्ययोजनाओं में किया जाएगा।

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