नई दिल्ली, 6 सितंबर 2026। यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियन्स (UFBU) ने बैंक कर्मचारियों और अधिकारियों से जुड़े लंबित मुद्दों के समाधान तथा बैंकिंग क्षेत्र में कर्मचारियों के हितों की रक्षा के लिए आंदोलनकारी कार्यक्रमों और अखिल भारतीय बैंक हड़ताल का आह्वान किया है।
UFBU बैंक कर्मचारियों और बैंक अधिकारियों के संगठनों का साझा मंच है, जिसमें ऑल इंडिया बैंक एम्प्लॉईज एसोसिएशन (AIBEA), ऑल इंडिया बैंक ऑफिसर्स कॉन्फेडरेशन (AIBOC), नेशनल कॉन्फेडरेशन ऑफ बैंक एम्प्लॉईज (NCBE), ऑल इंडिया बैंक ऑफिसर्स एसोसिएशन (AIBOA), बैंक एम्प्लॉईज फेडरेशन ऑफ इंडिया (BEFI), इंडियन नेशनल बैंक ऑफिसर्स कांग्रेस (INBOC) और इंडियन नेशनल बैंक एम्प्लॉईज फेडरेशन (INBEF) शामिल हैं।
UFBU के अनुसार, ये संगठन सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों, निजी बैंकों, विदेशी बैंकों, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों और सहकारी बैंकों में कार्यरत 90 प्रतिशत से अधिक बैंक कर्मचारियों और अधिकारियों का प्रतिनिधित्व करते हैं।
आंदोलन और हड़ताल का कार्यक्रम
UFBU ने निम्नलिखित तिथियों पर आंदोलनकारी कार्यक्रम और अखिल भारतीय बैंक हड़ताल का आह्वान किया है:
- 11 सितंबर 2026 — अखिल भारतीय आंदोलन
- 28, 29 और 30 सितंबर 2026 — लगातार तीन दिवसीय बैंक हड़ताल
- 26 अक्टूबर 2026 से — अनिश्चितकालीन अखिल भारतीय बैंक हड़ताल
UFBU ने स्पष्ट किया है कि आंदोलन का उद्देश्य लंबित मुद्दों का समाधान, द्विपक्षीय समझौतों का सम्मान और बैंक कर्मचारियों के साथ न्याय सुनिश्चित करना है।
UFBU की प्रमुख मांगें
1. 5-दिवसीय बैंकिंग सप्ताह लागू किया जाए
UFBU की प्रमुख मांग है कि बैंकिंग क्षेत्र में सप्ताह में पांच दिन काम लागू किया जाए और शेष सभी शनिवारों को अवकाश घोषित किया जाए।
UFBU के अनुसार, मई 2015 में हुए समझौते के तहत प्रत्येक महीने के दूसरे और चौथे शनिवार को अवकाश घोषित किया गया था, जबकि शेष शनिवारों को पूर्ण कार्य दिवस बनाया गया। उस समय भविष्य में सभी शनिवारों को अवकाश घोषित करने की दिशा में प्रयास करने का आश्वासन दिया गया था।
नवंबर 2020 में हुए समझौते के दौरान भी इस मुद्दे पर आगे बातचीत और सौहार्दपूर्ण समाधान का आश्वासन दिया गया। इसके बाद वेतन संशोधन के लिए हुई वार्ता में इस मांग पर फिर चर्चा हुई।
मार्च 2024 में हुए समझौते में IBA और बैंक प्रबंधन ने शेष शनिवारों को भी अवकाश घोषित करने पर सहमति व्यक्त की। इसके बदले बैंक यूनियनों ने सोमवार से शुक्रवार तक प्रतिदिन कार्य अवधि में 40 मिनट की वृद्धि पर सहमति दी।
UFBU के अनुसार, इस प्रस्ताव को वित्त मंत्रालय, भारत सरकार की मंजूरी के लिए भेजा गया था, लेकिन दो वर्ष से अधिक समय बीत जाने के बावजूद यह मामला अभी तक लंबित है।
UFBU का कहना है कि केंद्र एवं राज्य सरकारों, RBI, LIC, GIC, NABARD, निजी कंपनियों तथा शेयर, मुद्रा और विदेशी मुद्रा बाजार सहित कई क्षेत्रों में पहले से ही पांच दिवसीय कार्य सप्ताह लागू है। बैंकों में भी प्रत्येक महीने दो शनिवार पहले से ही अवकाश के दिन हैं।
UFBU के अनुसार, शेष शनिवारों को अवकाश घोषित करने से ग्राहकों के लिए बैंकिंग सेवाओं के व्यावसायिक घंटों में कोई कमी नहीं होगी, क्योंकि यूनियनों ने सोमवार से शुक्रवार तक प्रतिदिन 40 मिनट अतिरिक्त कार्य/व्यावसायिक समय के लिए सहमति दी है।
UFBU ने कहा कि बैंक कर्मचारियों और अधिकारियों ने कोरोना महामारी जैसे कठिन समय में भी देश की जनता को बैंकिंग सेवाएं उपलब्ध कराईं। वर्तमान समय में बैंकिंग कार्य की बढ़ती जटिलता और तनाव को देखते हुए कर्मचारियों के लिए बेहतर वर्क-लाइफ बैलेंस सुनिश्चित करना आवश्यक है।
2. PLI योजना में एकतरफा बदलाव का विरोध
UFBU ने सरकार द्वारा Performance Linked Incentive (PLI) योजना में किए गए बदलावों को द्विपक्षीय समझौते का उल्लंघन बताते हुए इसका विरोध किया है।
UFBU के अनुसार, PLI योजना नवंबर 2020 में भारतीय बैंक संघ (IBA) और बैंक यूनियनों/एसोसिएशनों के बीच हुए द्विपक्षीय समझौते के तहत लागू की गई थी। इस योजना में सभी कर्मचारी तथा स्केल-I से स्केल-VII तक के अधिकारी शामिल हैं।
मौजूदा द्विपक्षीय PLI व्यवस्था के तहत बैंक के प्रदर्शन और लाभ के आधार पर एक दिन के वेतन से अधिकतम 15 दिन के वेतन तक प्रोत्साहन का प्रावधान है। यह प्रोत्साहन बैंक के सभी कर्मचारियों और अधिकारियों के लिए समान व्यवस्था के आधार पर लागू होता है।
UFBU का कहना है कि यह व्यवस्था बैंक की सामूहिक टीम भावना और बैंक के समग्र प्रदर्शन को बेहतर बनाने के उद्देश्य से बनाई गई थी।
हालांकि, नवंबर 2024 में वित्तीय सेवा विभाग (DFS), वित्त मंत्रालय ने स्केल-IV से स्केल-VII के अधिकारियों के लिए संशोधित प्रोत्साहन फॉर्मूला अपनाने का निर्देश जारी किया। UFBU ने इसे IBA और यूनियनों के बीच हुए द्विपक्षीय समझौते के विपरीत बताया।
UFBU के अनुसार, संशोधित व्यवस्था अधिकारियों के व्यक्तिगत प्रदर्शन पर आधारित है, जबकि पहले की PLI व्यवस्था बैंक के समग्र प्रदर्शन पर आधारित थी।
इस मुद्दे को सरकार के समक्ष उठाए जाने के बावजूद समाधान नहीं होने पर UFBU ने मार्च 2025 में हड़ताल का आह्वान किया था। मुख्य श्रम आयुक्त के समक्ष हुई सुलह प्रक्रिया के बाद हड़ताल को स्थगित किया गया और IBA तथा यूनियनों को सरकार के समक्ष संशोधित प्रस्ताव प्रस्तुत करने की सलाह दी गई।
इसके बाद IBA और यूनियनों ने द्विपक्षीय बैठक कर सरकारी फॉर्मूले में संशोधन संबंधी प्रस्ताव प्रस्तुत किया। UFBU के अनुसार, अभी तक DFS/सरकार की ओर से इस पर कोई संतोषजनक प्रतिक्रिया नहीं मिली है।
UFBU ने कहा कि मार्च 2026 में DFS/सरकार ने बैंकों को अपने प्रोत्साहन फॉर्मूले को लागू करने की सलाह दी। इसके बाद UFBU ने इस एकतरफा निर्णय को चुनौती देते हुए दिल्ली उच्च न्यायालय का रुख किया। मामला अभी न्यायालय के समक्ष लंबित है।
UFBU के अनुसार, 21 अगस्त 2026 को DFS/सरकार ने सभी बैंकों को संशोधित प्रोत्साहन योजना लागू करने की दिशा में आगे बढ़ने की सलाह दी।
PLI योजना में असमानता का आरोप
UFBU का दावा है कि नई व्यवस्था में स्केल-IV से स्केल-VII के लगभग 40,000 अधिकारी, जो कुल बैंक कर्मचारियों के लगभग 5 प्रतिशत हैं, व्यक्तिगत प्रदर्शन के आधार पर अधिकतम 365 दिनों के मूल वेतन तक प्रोत्साहन प्राप्त कर सकते हैं।
इसके विपरीत, शेष लगभग 95 प्रतिशत बैंक कर्मचारियों के लिए अधिकतम प्रोत्साहन 15 दिनों के वेतन तक सीमित है।
UFBU ने इसे कर्मचारियों के बीच अत्यधिक असमानता और भेदभाव बताते हुए कहा कि इससे बैंक कर्मचारियों की सामूहिक टीम भावना प्रभावित होगी तथा PLI योजना के मूल उद्देश्य को ही नुकसान पहुंचेगा।
UFBU के अनुसार, नई व्यवस्था:
- द्विपक्षीय रूप से सहमत PLI योजना के विपरीत है।
- बैंक कर्मचारियों की एकीकृत टीम को अलग-अलग वर्गों में बांटती है।
- बैंक के सामूहिक प्रदर्शन के बजाय अधिकारियों के व्यक्तिगत प्रदर्शन पर आधारित है।
- 15 दिन के वेतन की अधिकतम सीमा वाली द्विपक्षीय व्यवस्था के मुकाबले 365 दिनों तक के मूल वेतन का प्रावधान करती है।
- अधिकारियों को उनके वास्तविक प्रदर्शन से अलग-अलग ग्रेडों में वर्गीकृत करने की व्यवस्था करती है।
- लगभग 5 प्रतिशत कर्मचारियों के लिए असमान रूप से अधिक वित्तीय लाभ का प्रावधान करती है।
- अंतर-कैडर और इंट्रा-कैडर असमानता को बढ़ावा देती है।
- कर्मचारियों के बीच निराशा और असंतोष पैदा कर सकती है।
- सामूहिक सौदेबाजी और द्विपक्षीय समझौते की प्रक्रिया को कमजोर करती है।
UFBU ने कहा कि जब विवाद मुख्य श्रम आयुक्त के समक्ष लंबित है, तब औद्योगिक विवाद अधिनियम/औद्योगिक संबंध संहिता के तहत यथास्थिति बनाए रखने की अपेक्षा की जाती है। इसके बावजूद योजना को लागू किया जाना गंभीर चिंता का विषय है।
सामूहिक सौदेबाजी के सम्मान की मांग
UFBU ने कहा कि बैंकिंग क्षेत्र में कर्मचारियों और प्रबंधन के बीच वर्षों से चली आ रही द्विपक्षीय व्यवस्था को सम्मान दिया जाना चाहिए। संगठन के अनुसार, मार्च 2024 का संयुक्त नोट बैंक बोर्डों द्वारा अनुमोदित है और इसी आधार पर अधिकारियों की सेवा एवं पेंशन संबंधी विनियमों में भी संशोधन किए गए हैं।
UFBU ने स्पष्ट किया कि वर्तमान आंदोलन कर्मचारियों पर थोपा हुआ नहीं है, बल्कि सरकार और बैंक प्रबंधन द्वारा द्विपक्षीय समझौतों को लागू न करने तथा एकतरफा निर्णय लेने के कारण उत्पन्न हुआ है।
UFBU ने सरकार से मांग की है कि 5-दिवसीय बैंकिंग सप्ताह को तत्काल लागू किया जाए, PLI योजना में एकतरफा और भेदभावपूर्ण बदलाव वापस लिए जाएं तथा यूनियनों के साथ द्विपक्षीय बातचीत के माध्यम से लंबित मुद्दों का समाधान किया जाए।
UFBU ने बैंक कर्मचारियों और अधिकारियों से आंदोलन को सफल बनाने तथा अपनी जायज मांगों के समर्थन में एकजुट होने का आह्वान किया है।



