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ईंधन का महाझटका: 120 डॉलर प्रति बैरल पहुंचा क्रूड, भारत में 3 रुपये महंगा हुआ पेट्रोल और डीजल

ईरान-अमेरिका युद्ध और होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव के बीच भारत में पेट्रोल और डीजल के दाम 3 रुपये प्रति लीटर बढ़ गए हैं। कच्चा तेल महंगा होने से तेल कंपनियों ने कीमतों में बढ़ोतरी का फैसला किया।

देश की तेल विपणन कंपनियों (OMCs) ने शुक्रवार को पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 3 रुपये प्रति लीटर की भारी बढ़ोतरी करने का फैसला किया है। पश्चिम एशिया में ईरान और अमेरिका के बीच जारी युद्ध जैसी स्थितियों और ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ के बंद होने की आशंकाओं ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों को 120 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुँचा दिया है।

इस वैश्विक संकट के कारण भारतीय तेल कंपनियों पर पड़ रहे बोझ को कम करने के लिए कीमतों में यह इजाफा किया गया है।

 

शहर  पेट्रोल (नया रेट)  डीजल (नया रेट)
दिल्ली (NCR)  ₹97.77  ₹90.67
 मुंबई  ₹106.68  ₹99.67
 कोलकाता  ₹108.74  ₹95.13
 चेन्नई  ₹103.67  ₹98.27

​महानगरों में नई कीमतें
​आज सुबह 6 बजे से लागू हुई नई दरों के बाद दिल्ली में पेट्रोल की कीमत अब 94.77 रुपये और डीजल 87.67 रुपये प्रति लीटर के करीब पहुँच गई है। मुंबई में यह आंकड़ा और भी अधिक है, जहाँ पेट्रोल 103 रुपये के पार चला गया है। जानकारों का मानना है कि ईंधन की कीमतों में इस अचानक बढ़ोतरी से माल ढुलाई महंगी होगी, जिसका सीधा असर फल, सब्जी और अन्य आवश्यक वस्तुओं की कीमतों पर पड़ेगा, जिससे आने वाले दिनों में महंगाई और बढ़ सकती है।

​पीएम मोदी की अपील और विदेशी मुद्रा का संकट
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में देशवासियों से पेट्रोल और डीजल की खपत कम करने और पर्यावरण अनुकूल साधनों को अपनाने की अपील की थी। सरकार का मानना है कि भारत अपनी जरूरत का लगभग 85% तेल आयात करता है, और होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव के कारण सप्लाई चेन बाधित हुई है। इस संकट की वजह से भारत का आयात बिल बढ़ गया है और विदेशी मुद्रा भंडार पर भी दबाव पड़ रहा है।

​स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में तनाव और ग्लोबल क्राइसिस
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्ग है, जहाँ से दुनिया का लगभग 20% कच्चा तेल गुजरता है। ईरान और अमेरिका के बीच जारी सैन्य संघर्ष के कारण इस मार्ग पर भारतीय जहाजों पर हुए हमलों ने जोखिम बढ़ा दिया है। सप्लाई बाधित होने के डर से वैश्विक स्तर पर ‘पैनिक बाइंग’ शुरू हो गई है, जिससे कच्चे तेल के दाम स्थिर नहीं हो पा रहे हैं। ओमान तट के पास जारी अस्थिरता ने भारत समेत पूरी दुनिया की ऊर्जा सुरक्षा को चुनौती दी है।

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