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छत्तीसगढ़ शराब घोटाला मामला : चालान पेश होते ही जेल से बाहर आए सौम्या चौरसिया और केके श्रीवास्तव

रायपुर. पूर्व मुख्यमंत्री की उपसचिव रही राज्य प्रशासनिक सेवा की निलंबित अफसर सौम्या चौरसिया और तांत्रिक केके श्रीवास्तव अब जमानत पर जेल से बाहर आ गए हैं. सौम्या चौरसिया और केके श्रीवास्तव को आबकारी घोटाले में पहले ईडी फिर ईओडब्लू ने गिरफ्तार किया था. जमानत मिलने के बाद दोनों बुधवार को रायपुर सेंट्रल जेल से बाहर आ गए हैं.

छत्तीसगढ़ के चर्चित आबकारी घोटाले में दोनों को आरोपी बनाया गया था. शुरुआती जांच में शराब घोटाला 2000 करोड़ का माना जा रहा था, जो आगे बढ़ते हुए 3100 करोड रुपए तक पहुंच गया. ईडी ने इस मामले में इसीआईआर दर्ज की थी. ईडी के बाद ईओडब्लू ने भी इस मामले में प्रकरण कायम किया था. आरोप था कि नकली होलोग्राम बना सरकारी शराब दुकानों के माध्यम से शराब बिना एक्साइज ड्यूटी दिए बिकवाई जाती थी. जिसमें शासन को नुकसान होता था. इस मामले में सौम्या और केके श्रीवास्तव को पहले ईडी फिर ईओडब्लू ने गिरफ्तार किया था.

सौम्या चौरसिया ने जमानत के लिए पहले ईओडब्लू अदालत में जमानत याचिका लगाई थी. याचिका खारिज होने के बाद उन्होंने हाईकोर्ट का रुख किया था . हाईकोर्ट से भी जमानत याचिका खारिज होने के बाद उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में याचिका लगाई थी. सुप्रीम कोर्ट ने दुबारा सुनवाई के लिए मामला हाईकोर्ट भेज दिया और निश्चित समय सीमा के भीतर सुनवाई के निर्देश दिए थे.

हाईकोर्ट की सिंगल बेंच ने मामले में बीस फरवरी को सुनवाई की थी, जिसके बाद फैसला रिजर्व रख लिया गया था. 28 फरवरी को ओपन हुए फैसले में सौम्या चौरसिया को जमानत प्रदान कर दी गई. पर जमानत के साथ ही यह शर्त भी रखी गई कि शराब घोटाले में ईओडब्लू ट्रायल कोर्ट में जिस दिन चालान पेश करेगी,तब उसी दिन सौम्या का बेल फर्निश होगा और वे जेल से बाहर आएंगी. विधि विशेषज्ञों के मुताबिक ऐसा इसलिए किया गया ताकि सौम्या की तरफ से विवेचना प्रभावित ना हो पाए.

EOW ने 1500 पन्नों का चालान किया पेश

आज ईओडब्लू ने सौम्या चौरसिया, केके श्रीवास्तव और राजीव भवन के अकाउंटेंट देवेंद्र डडसेना के खिलाफ 1500 पेज का आठवां पूरक चालान पेश किया गया. चालान में तीनों की आबकारी घोटाले में भूमिका बताई गई है. अब तक कुल 51 आरोपियों के खिलाफ चालान पेश किया गया है.

हाईकोर्ट के निर्देश के मुताबिक चालान पेश होने के बाद आज सौम्या चौरसिया और केके श्रीवास्तव को बेल मिल गई और दोनों सेंट्रल जेल रायपुर से रिहा हो गए. दोनों को जेल लेने कुछ लोग आए थे. दोनों गाड़ियों से बैठकर रायपुर जेल से रवाना हो गए.

जेल से बाहर आने के बाद केके श्रीवास्तव ने कहा कि कुंभ मेले के समय से उन्होंने दाढ़ी और बाल बढ़ाई है. वे पूजा पाठ करते हैं, कोई तांत्रिक नहीं है. उनके पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल से वर्षों के संबंध है. उनके मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री सुंदरलाल पटवा से भी संबंध रहे. केके श्रीवास्तव ने कहा कि उनके जिससे भी संबंध है वह निजी और व्यक्तिगत संबंध रहे हैं ना कि किसी पार्टी के आधार पर. वह निजी तौर पर किसी व्यक्ति को पसंद करते हैं ना कि पार्टी को.

कार्यवाही के संबंध में उन्होंने कहा कि चूंकि मामला अदालत में विचाराधीन है इसलिए वह इस संबंध में कुछ नहीं कहेंगे. हां पर उन्होंने कोई भी गलत नहीं किया है इसलिए उन्हें किसी कार्यवाही का डर भी नहीं है. इसके बाद केके वहां से रवाना हो गए.

बता दें सौम्या चौरसिया जब पहले जमानत पर थी तब उन्हें सशर्त जमानत मिली थी कि वे छत्तीसगढ़ में नहीं रहेंगी. केवल अदालत में पेशी और जांच एजेंसियों के बुलावे पर आएंगी. ईओडब्लू ने उन्हें आबकारी घोटाले में पूछताछ के लिए बुलाया था, जिसके बाद उन्हें वहीं से जेल भेज दिया था. उनके वकील ने जमानत के लिए तर्क प्रस्तुत करते हुए बताया था कि सौम्या को केंद्रीय और राज्य की एजेंसियों ने 6 अलग-अलग बार हिरासत में लिया है. राजनैतिक षड्यंत्र के तहत एक ही मामले में पहले केंद्रीय एजेंसी उनकी गिरफ्तारी करती है और उसके बाद राज्य की एजेंसी. वहीं हाईकोर्ट के निर्देश के अनुसार आज उन्हें रिहा कर दिया गया.

शराब घोटाले में EOW ने बताई क्या है दोनों की भूमिका….

आज पेश हुए 1500 पेज के चालान में ईओडब्लू ने बताया है कि कृष्ण कुमार श्रीवास्तव उर्फ के.के. श्रीवास्तव के संबंध में यह प्रमाणित हुआ है कि उसने जानबूझकर सिंडिकेट के अवैध उगाही तंत्र के माध्यम से षड़यंत्रपूर्वक किए गए इस बड़े आर्थिक अपराध में सक्रिय भूमिका निभाई. उसके द्वारा अवैध नगद राशि के उठाव, एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जाने, उसके व्यवस्थापन, संभावित निवेश एवं खपाने तथा अपने प्रभाव का दुरुपयोग कर अवैध धन अर्जित करने जैसी गतिविधियों में सहभागिता की गई, जिससे वह इस संगठित अपराध का हिस्सेदार बना.

तत्कालीन उप सचिव, मुख्यमंत्री सचिवालय, सौम्या चौरसिया के संबंध में उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर यह प्रमाणित हुआ है कि उसने अपने शासकीय पद का दुरुपयोग करते हुए शराब घोटाला सिंडिकेट को संरक्षण, समन्वय, प्रशासकीय सुविधा एवं समर्थन प्रदान किया. साथ ही अपराध में उसकी सक्रिय संलिप्तता, अवैध लाभ प्राप्त करने तथा षड़यंत्र के माध्यम से शासन के राजस्व को अपूर्णीय क्षति पहुंचाने वाली भूमिका प्रमाणित हुई है.

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