Friday, September 25, 2026
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सोनम वांगचुक ने न्यायालय से वीडियो कांफ्रेंस के जरिये पेश होने की मांगी अनुमति, केंद्र का विरोध

नयी दिल्ली. केंद्र ने सोमवार को उच्चतम न्यायालय में जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की ओर से दाखिल उस अर्जी का विरोध किया जिसमें उन्होंने राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत उनकी हिरासत से संबंधित मामले में जोधपुर जेल से वीडियो कांफ्रेंस के जरिये पेश होने का अनुरोध किया है.

शीर्ष अदालत वांगचुक की पत्नी गीतांजलि जे. अंगमो द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई कर रही थी. इसमें आरोप लगाया गया है कि वांगचुक की हिरासत अवैध और मनमानी है एवं उनके मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करती है. अंगमो की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने न्यायमूर्ति अरंिवद कुमार और न्यायमूर्ति एन वी अंजारिया की पीठ को बताया कि कार्यकर्ता जेल से वीडियो कांफ्रेंस के माध्यम से जुड़ना चाहते हैं और उन्होंने पीठ से इसकी अनुमति मांगी है.

केंद्र की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अर्जी का विरोध करते हुए कहा, ‘‘हमें देश भर के सभी दोषियों के साथ एक जैसा व्यवहार करना होगा.’’ शीर्ष अदालत ने मामले की सुनवाई 15 दिसंबर के लिए स्थगित कर दी. न्यायालय ने 24 नवंबर को मामले की सुनवाई केंद्र और केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता के अनुरोध पर स्थगित कर दी थी क्योंकि उन्होंने अंगमो द्वारा दायर प्रत्युत्तर पर जवाब देने के लिए समय देने का अनुरोध किया था. शीर्ष अदालत ने 29 अक्टूबर को अंगमो की संशोधित याचिका पर केंद्र और लद्दाख प्रशासन से जवाब मांगा था.

वांगचुक को 26 सितंबर को कड़े राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (रासुका) के तहत हिरासत में लिया गया था. यह घटना केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख को राज्य का दर्जा और क्षेत्र को छठी अनुसूची में शामिल करने की मांग को लेकर हुए हिंसक प्रदर्शनों के दो दिन बाद हुई थी. इस हिंसक प्रदर्शन में चार लोगों की मौत हो गई थी और 90 लोग घायल हो गए थे. सरकार ने वांगचुक पर हिंसा भड़काने का आरोप लगाया है.

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