Sunday, September 27, 2026
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भारत ने 2024-25 में घरेलू स्रोतों से 1,20,000 करोड़ रुपये के सैन्य उपकरण खरीदे : राजनाथ

नयी दिल्ली. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने मंगलवार को कहा कि भारत ने 2024-25 के अंत तक घरेलू स्रोतों से 1,20,000 करोड़ रुपये मूल्य के सैन्य उपकरण और हथियार खरीदे हैं. उन्होंने बताया कि भारत राष्ट्रीय सुरक्षा चुनौतियों का सामना करने के लिए आत्मनिर्भरता को मजबूत करने पर लगातार ध्यान केंद्रित कर रहा है.

सिंह ने एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि रक्षा में आत्मनिर्भरता केवल उत्पादन या अर्थव्यवस्था का मामला नहीं है, बल्कि यह पहली और सबसे महत्वपूर्ण प्राथमिकता है क्योंकि यह भारत की सामरिक स्वायत्तता के साथ-साथ संप्रभुता से भी जुड़ी है.
उन्होंने एक सम्मेलन में कहा, ”रक्षा और सुरक्षा पूरे राष्ट्र की सामूहिक जिम्मेदारी है और रक्षा क्षेत्र को मजबूत करना केवल एक संस्थान या सरकार का कर्तव्य नहीं है, बल्कि सभी भारतीयों का साझा संकल्प है.” रक्षामंत्री ने इस अवसर पर राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से एक मजबूत, वैश्विक रूप से प्रतिस्पर्धी रक्षा विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र के निर्माण में सक्रिय भागीदार बनने का आ”ान किया.

सिंह ने एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि सरकार युद्ध के बदलते स्वरूप खासतौर पर ड्रोन जैसे ‘नॉन-कॉन्टैक्ट वॉरफेयर’ (दूरस्थ युद्ध तकनीक) के महत्व को समझती है और उसके अनुसार तैयारी कर रही है. इस संदर्भ में उन्होंने विभिन्न सुरक्षा चुनौतियों का सामना करने के लिए भारत के अपने रक्षा उद्योगों को ब­ढ़ाने के महत्व को रेखांकित किया.

उन्होंने कहा, ”2021-22 में घरेलू स्रोतों से हमारी पूंजीगत खरीद लगभग 74,000 करोड़ रुपये की थी, लेकिन 2024-25 के अंत तक यह ब­ढ़कर लगभग 1,20,000 करोड़ रुपये हो गई है. यह बदलाव केवल आंकड़ों का नहीं, बल्कि मानसिकता के परिवर्तन का भी प्रतीक है.” रक्षा मंत्री ने पिछले दशक में भारत के रक्षा विनिर्माण क्षेत्र की ‘अभूतपूर्व वृद्धि’ को रेखांकित करते हुए कहा कि रक्षा उत्पादन 2014 में करीब 46,000 करोड़ रुपये का था जो 2025 में ब­ढ़कर करीब 1.5 लाख करोड़ रुपये हो गया है. उन्होंने कहा कि इसमें से करीब 33,000 करोड़ रुपये का योगदान निजी क्षेत्र का है, जो स्पष्ट संकेत है कि उद्योग भी आत्मनिर्भरता मिशन में समान हितधारक बन गया है.
सिंह ने कहा कि भारत का लक्ष्य 2029 तक 3 लाख करोड़ रुपये का रक्षा विनिर्माण और 50,000 करोड़ रुपये का रक्षा निर्यात हासिल करना है.

रक्षा मंत्री ने कहा कि मोदी सरकार ने पिछले 10 वर्षों में रक्षा उपकरणों के स्वदेशी डिजाइन, विकास और निर्माण को प्रोत्साहित करने के लिए कई नीतिगत पहल की हैं. उन्होंने बताया कि अब सैन्य हार्डवेयर की खरीद में घरेलू स्रोतों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है. सिंह ने कहा, ”भारत सरकार आधुनिक युद्ध की बदलती प्रकृति से भली-भांति परिचित है. आज का युद्ध पूरी तरह प्रौद्योगिकी-आधारित हो चुका है. हमने इसका उदाहरण ऑपरेशन सिंदूर में भी देखा.”

उन्होंने कहा, “इसमें हमने देखा कि ड्रोन, ड्रोन-रोधी प्रणाली और वायु-रक्षा प्रणाली जैसी दूरस्थ युद्ध तकनीकों का महत्व तेजी से ब­ढ़ा है.” सिंह ने भारत को 2047 तक विकसित देश बनाने के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए रक्षा क्षेत्र के लिए प्रमुख उद्देश्यों का भी उल्लेख किया. उन्होंने कहा, ”पहला उद्देश्य महत्वपूर्ण रक्षा क्षमताओं में आत्मनिर्भरता हासिल करना. दूसरा, हमें रक्षा क्षेत्र में एक प्रमुख वैश्विक निर्यातक बनना होगा.” रक्षा मंत्री ने कहा, ”तीसरा, नयी अत्याधुनिक तकनीकों में प्रगति करना ताकि भारत अत्याधुनिक रक्षा प्रौद्योगिकी वाले देशों की श्रेणी में शामिल हो सके.”

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