Sunday, September 27, 2026
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जमीन के बदले नौकरी मामला: CBI ने प्राथमिकी रद्द करने की लालू की याचिका का किया विरोध

नयी दिल्ली. केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने भूमि के बदले नौकरी घोटाले में राष्ट्रीय जनता दल (राजद) प्रमुख लालू प्रसाद यादव के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी रद्द करने का आग्रह करने वाली उनकी याचिका का दिल्ली उच्च न्यायालय में बृहस्पतिवार को विरोध किया.
सीबीआई ने याचिका की स्वीकार्यता का मुद्दा उठाते हुए कहा कि देरी के आधार पर उनकी याचिका खारिज कर दी जानी चाहिए.

न्यायमूर्ति रवीन्द्र डुडेजा ने सीबीआई की ओर से आंशिक दलीलें सुनीं और मामले की सुनवाई 17 अक्टूबर के लिए स्थगित कर दी.
सीबीआई की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एस.वी. राजू ने दलील दी कि उनके पास वैकल्पिक उपाय उपलब्ध होने के आधार पर यादव की याचिका को खारिज कर दिया जाना चाहिए. उन्होंने कहा कि यादव को प्राथमिकी रद्द करने के लिए सीधे उच्च न्यायालय जाने के बजाय पहले सत्र न्यायालय का दरवाजा खटखटाना चाहिए था.

राजू ने कहा कि कोई व्यक्ति निरस्तीकरण याचिका या रिट याचिका दायर करके पुनरीक्षण याचिका दायर करने की 90 दिनों की समय सीमा को पार नहीं कर सकता. उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि इस याचिका को देरी के आधार पर खारिज किया जाना चाहिए, क्योंकि यह 90 दिनों की अवधि बीत जाने के बाद दायर की गई थी. यद्यपि आरोप-पत्र पर संज्ञान लेने का आदेश निचली अदालत द्वारा 27 फरवरी 2023 को पारित किया गया था, लेकिन उच्च न्यायालय में याचिका दो साल से अधिक समय बाद 23 मई 2025 को दायर की गई थी.

यादव के अधिवक्ता ने दलील दी थी कि आरोपी पर मुकदमे के लिए अनिवार्य मंजूरी नहीं होने के कारण जांच अवैध है और सीबीआई के अधिवक्ता ने उनके अधिवक्ता की इस दलील का भी विरोध किया. यादव की ओर से दलील देते हुए वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल और मनिंदर सिंह ने कहा, ”हम मंजूरी नहीं मिलने को चुनौती दे रहे हैं. वे प्राथमिकी दर्ज नहीं कर सकते थे. जांच शुरू नहीं हो सकती. हम केवल आरसी को खारिज कराने में रुचि रखते हैं.”

यह मामला भारतीय रेलवे के मध्य प्रदेश के जबलपुर स्थित पश्चिम मध्य क्षेत्र में ग्रुप-डी की नियुक्तियों से संबंधित है. ये नियुक्तियां 2004 से 2009 के बीच यादव के रेल मंत्री रहने के दौरान की गई थीं. ये नियुक्तियां कथित तौर पर नौकरी पाने वाले अ्भ्यियथयों की ओर से राजद प्रमुख के परिवार या सहयोगियों के नाम पर हस्तांतरित की गई या उन्हें उपहार में दी गई जमीन के बदले की गई थी. यादव और उनकी पत्नी, दो बेटियों, अज्ञात सरकारी अधिकारियों और निजी व्यक्तियों सहित अन्य के खिलाफ 18 मई 2022 को मामला दर्ज किया गया था.

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