Friday, September 25, 2026
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अयप्पा संगमम पर राजनीतिक विवाद जारी; एलडीएफ ने सफल और यूडीएफ ने ‘फ्लॉप’ करार दिया

तिरुवनंतपुरम. केरल सरकार के सहयोग से त्रावणकोर देवस्वोम बोर्ड (टीडीबी) द्वारा आयोजित ‘ग्लोबल अयप्पा संगमम’ के समापन के साथ ही रविवार को सत्तारू­ढ़ वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (एलडीएफ) और विपक्षी यूडीएफ के बीच इस बात को लेकर राजनीतिक बहस छिड़ गई कि यह आयोजन सफल रहा या असफल.

मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) नेताओं ने संगमम को एक ”बड़ी सफलता” बताया, जबकि विपक्ष ने इसे ”फ्लॉप” करार देते हुए खारिज कर दिया, तथा कुछ सत्रों के दौरान सभागार में ज्यादातर कुर्सियां खाली होने के दृश्यों का हवाला दिया. माकपा के प्रदेश सचिव एम.वी. गोविंदन ने सबसे पहले प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि भागीदारी उम्मीद से अधिक रही. उन्होंने पूछा, ”हमने 3,000 लोगों के लिए योजना बनाई थी. 4,600 से अधिक लोग आए. क्या यह कोई खामी है?” आलोचकों पर निशाना साधते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि मीडिया का एक वर्ग ”फर्जी अभियान” चला रहा है और यहां तक ??कि इस कार्यक्रम को ”बदनाम” करने के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई)-जनित तस्वीरों और वीडियो का भी इस्तेमाल कर रहा है.

देवस्वोम मंत्री वी एन वासवन ने कहा कि 4,126 लोगों ने भाग लिया, जिनमें 182 विदेशी प्रतिनिधि (श्रीलंका से 39) और तमिलनाडु, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, ओडिशा, दिल्ली, छत्तीसग­ढ़, पंजाब, गुजरात और महाराष्ट्र जैसे अन्य राज्यों से 2,125 प्रतिनिधि शामिल थे. उन्होंने कहा कि शेष 1,219 केरल से थे, जिनमें विभिन्न देवस्वोम बोर्ड के प्रतिनिधि भी शामिल थे. मंत्री ने कहा कि केरल उच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुसार, संगमम श्रद्धालुओं को असुविधा पहुंचाए बिना और पर्यावरण अनुकूल प्रोटोकॉल का पालन करते हुए पारदर्शी तरीके से आयोजित किया गया.

उन्होंने कहा, ”इसमें शामिल कांग्रेस की कर्नाटक इकाई के नेताओं समेत किसी की ओर से कोई शिकायत नहीं मिली. सभागार खाली रहने के दावे निराधार हैं-प्रतिनिधि अलग-अलग जगहों पर समानांतर सत्रों में भाग ले रहे थे.” वासवन ने कहा कि आलोचकों ने उद्घाटन सत्र से पहले कार्यक्रम स्थल के वीडियो प्रसारित किए थे ताकि ”कम उपस्थिति को गलत तरीके से दर्शाया जा सके.” उन्होंने कहा कि न तो सरकार और न ही टीडीबी का कोई राजनीतिक एजेंडा है, और उनका एकमात्र उद्देश्य सबरीमला को एक वैश्विक आध्यात्मिक केंद्र के रूप में स्थापित करना है.

तीन सत्रों से सामने आई सिफारिशों का मूल्यांकन करने के लिए 18 सदस्यीय समिति गठित की गई है और इसकी रिपोर्ट सार्वजनिक की जाएगी. इस बीच, केरल विधानसभा में विपक्ष के नेता वी.डी. सतीशन ने कहा कि मुख्यमंत्री पिनराई विजयन के नेतृत्व में आयोजित अयप्पा संगमम ”राजनीतिक उद्देश्यों से प्रेरित एक उपहास” साबित हुआ. कांग्रेस नेता ने कहा कि कार्यक्रम स्थल पर खाली कुर्सियां इस बात का प्रमाण थीं कि अयप्पा के श्रद्धालुओं को गुमराह करने की सरकार की कोशिश नाकाम हो गई.

सतीशन ने कहा, ”यह महसूस करते हुए कि यह चुनावों को ध्यान में रखकर रचा गया एक राजनीतिक नाटक मात्र है, श्रद्धालु कार्यक्रम से दूर रहे.” उन्होंने दावा किया, ”यह तर्क देना कि ये तस्वीरें एआई का इस्तेमाल कर बनाई गई थीं, लोगों की बुद्धिमत्ता का अपमान है. एम वी गोविंदन को ऐसे बयानों से खुद को उपहास का पात्र नहीं बनाना चाहिए.” सतीशन ने यह भी कहा कि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को आमंत्रित करना ”केरल की धर्मनिरपेक्ष भावना का अपमान” है.

उन्होंने पूछा, ”देवस्वोम मंत्री ने कार्यक्रम में गर्व के साथ योगी आदित्यनाथ का अभिवादन प­ढ़ा, इससे सरकार क्या संदेश दे रही है? संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा (यूडीएफ) नेता और कोल्लम के सांसद एन. के. प्रेमचंद्रन ने संगमम को ”पूरी तरह विफल” करार देते हुए आरोप लगाया कि यह ”समुदायों को ध्रुवीकृत करने के लिए राजनीति से प्रेरित” था.

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