Saturday, September 26, 2026
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नारा लोकेश ने मुख्यमंत्री के रूप में पिता चंद्रबाबू नायडू के पहले शपथग्रहण का जश्न मनाया

अमरावती: आंध्र प्रदेश के सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री नारा लोकेश ने सोमवार को अपने पिता एन चंद्रबाबू नायडू के एक सितंबर 1995 को मुख्यमंत्री के रूप में पहली बार शपथ लेने की 30वीं वर्षगांठ मनाई। नायडू ने 1995 से 2004 तक मुख्यमंत्री के रूप में राज्य का लगातार नेतृत्व किया और 2014 तथा 2024 में फिर मुख्यमंत्री बने। इस तरह वह कुल चार बार मुख्यमंत्री बने। अपने पहले दो कार्यकालों के दौरान, वह अविभाजित आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री थे।

लोकेश ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘श्रीमान (नायडू) को…तीन दशक पूरे होने पर हार्दिक बधाई। मैं उन्हें घर पर ‘नाना’ (पिता) और कार्यस्थल पर ‘बॉस’ कहने का सौभाग्य पाता हूँ। दिल से अब भी युवा और अनुभव से दृढ़, हमारे मुख्यमंत्री स्पष्टता, साहस और दृढ़ विश्वास के साथ नयी चुनौतियों का सामना करने के लिए तैयार हैं।’’

उन्होंने कहा कि आज से 30 साल पहले, नायडू ने पहली बार मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली थी, जिससे एक ऐसे युग की शुरूआत हुई, जिसने आंध्र प्रदेश की महत्वाकांक्षाओं को नया आयाम दिया और इसके उत्थान को गति दी।

लोकेश ने कहा कि प्रौद्योगिकी के साथ शासन को ‘पुर्निर्निमत’ करने से लेकर निवेश और नौकरियां लाने तक, यह यात्रा संभावनाओं को वास्तविकता में बदलने और आकांक्षाओं को टिकाऊ संस्थानों में बदलने के बारे में रही है।

उन्होंने कहा, ‘‘हाईटेक सिटी (हैदराबाद) और जीनोम वैली के नयी प्रौद्योगिकीय पहचान को सशक्त बनाने से लेकर भविष्य के लिए तैयार शहरीकरण के निर्माण की हमारी इच्छाशक्ति के प्रतीक अमरावती तक, उनके नेतृत्व ने नवाचार, बुनियादी ढांचे और समावेशन को एक साथ जोड़ा है।’’

तेलुगु देशम पार्टी (तेदेपा) के महासचिव के अनुसार, ‘सीबीएन (नायडू) प्लेबुक’ में ‘जवाबदेही के साथ गति’ का मिश्रण किया गया है, जिसमें लचीले बुनियादी ढांचे, डेटा-संचालित सेवाओं और ऐसे प्लेटफार्म का निर्माण किया गया है, जो नागरिकों और उद्यमों को समान रूप से सशक्त बनाते हैं।

उन्होंने कहा कि इसी तरह ‘गरीबी उन्मूलन योजनाएं और आरक्षण नीतियां’ बनाकर नायडू के कार्यकाल में ‘‘सामाजिक न्याय और सबसे कमजोर लोगों के सशक्तीकरण में उल्लेखनीय सुधार’’ हुआ है।

लोकेश ने अपने पिता की प्रशंसा करते हुए कहा, ‘‘तीस साल एक मील के पत्थर से भी बढकर हैं। यह एक जीवंत विरासत है। हाईटेक सिटी से लेकर ‘‘क्वांटम’’ की सीमाओं तक, बायोटेक की आकांक्षाओं से लेकर डेटा-संचालित अर्थव्यवस्थाओं तक, यह कार्य एक प्रगतिशील विरासत बना हुआ है।’’

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