Saturday, September 26, 2026
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पर्यावरण संकट से निपटने में समान रूप से सहभागिता निभानी होगी: मुख्यमंत्री साय

रायपुर. मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने बृहस्पतिवार को कहा कि छत्तीसगढ़ अपनी सौर और जल विद्युत क्षमता का विस्तार कर रहा है तथा 2030 तक भारत को 500 गीगावाट अक्षय ऊर्जा क्षमता का लक्ष्य हासिल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा. साय ने कहा है कि पर्यावरण संकट और जलवायु परिवर्तन राष्ट्रीय चिंतन का विषय बन गया है और इस समस्या से निपटने के लिए सभी को समान रूप से सहभागिता निभानी होगी. अधिकारियों ने बताया कि साय आज राजधानी रायपुर के पंडित दीनदयाल उपाध्याय सभागार में आयोजित छत्तीसगढ़ हरित शिखर कार्यक्रम के प्रथम संस्करण को संबोधित कर रहे थे.

साय ने जलवायु परिवर्तन पर अपनी चिंता जाहिर करते हुए कहा, “इस वर्ष देश में गर्मी ने पिछले सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए. राजधानी दिल्ली में तापमान 52.3 डिग्री तक पहुंच गया था. दुबई जैसे रेगिस्तानी इलाके में इतनी अत्यधिक बारिश हुई कि शहर बाढ़ की चपेट में आ गया.” मुख्यमंत्री ने कहा कि जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए छत्तीसगढ़ में अनेकों कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं तथा सरकार वृक्षारोपण को बढ़ावा देने के लिए किसान वृक्ष मित्र योजना व ग्रीन क्रेडिट योजना का क्रियान्वयन कर रही है.

साय ने कहा, ”राज्य का 44 फीसदी हिस्सा वनाच्छादित है और हम इसे सहेजने का काम गंभीरता के साथ कर रहे हैं. हाल ही में हमने गुरु घासीदास-तमोर पिंगला को बाघ अभयारण्य बनाने की पहल की है.” उन्होंने कहा कि इसके माध्यम से वन्यजीवों के संरक्षण और पर्यावरण के संवर्धन में भी बड़ी मदद मिलेगी और यह देश का तीसरा सबसे बड़ा बाघ अभयारण्य होगा. उन्होंने कहा, “हम अपनी सौर और जल विद्युत क्षमता का विस्तार कर रहे हैं और 2030 तक भारत के 500 गीगावाट अक्षय ऊर्जा के लक्ष्य को प्राप्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे.” वन मंत्री केदार कश्यप ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा, “हमने संसाधनों का दुरुपयोग करना शुरू कर दिया है और हम अपने अस्तित्व को चुनौती देने का काम कर रहे हैं.”

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